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शशि थरूर का बयान राहुल गांधी के ‘सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड’ की हवा निकालने वाला है

चुनावी मौसम में कांग्रेस को शशि थरूर से लेकर मणिशंकर अय्यर जैसे अपने नेताओं को संभाल कर आगे चलना होगा, वरना, सेल्फ गोल के माहिर यह खिलाड़ी राहुल गांधी की 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की रणनीति पर पानी फेर देंगे

Updated On: Oct 15, 2018 07:17 PM IST

Amitesh Amitesh

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शशि थरूर का बयान राहुल गांधी के ‘सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड’ की हवा निकालने वाला है
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राम मंदिर को लेकर कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने चेन्नई में आयोजित 'द हिंदू लिट फॉर लाइफ डायलॉग 2018' में कहा कि कोई भी अच्छा हिंदू विवादित स्थान पर राम मंदिर नहीं चाहेगा. शशि थरूर के मुताबिक, ‘हिंदू लोग अयोध्या में भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं. इसलिए कोई भी अच्छा व्यक्ति दूसरों के ढहाए गए पूजा स्थल पर राम मंदिर का निर्माण नहीं चाहेगा.’

बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने शशि थरूर के बयान को कांग्रेस की तरफ से राम मंदिर बनने से रोकने को लेकर किया गया प्रयास बताया है. राव ने कहा, ‘कांग्रेस की यह वोटबैंक की राजनीति है. कभी कोर्ट जाकर राम मंदिर मसले पर सुनवाई को टालने की कोशिश करते हैं. राहुल गांधी कभी शिवभक्त तो कभी राम भक्त बन जाते हैं और कभी छिप कर कहते हैं कि हम मुस्लिम की पार्टी हैं.’

हालाकि बवाल बढ़ा तो इस मुद्दे पर कांग्रेस की तरफ से सफाई भी आई. कांग्रेस प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने कहा, ‘शशि थरूर का बयान उनका निजी बयान है. यह मामला कोर्ट में लंबित है और कोर्ट का जो भी फैसला होगा वो कांग्रेस पार्टी को मान्य है.’

क्या काम आएगी कांग्रेस की सफाई?

कांग्रेस जितनी भी सफाई दे लेकिन, शशि थरूर का बयान उस वक्त आया है जब 5 राज्यों में विधानसभा के चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. गुजरात में शिवभक्ति दिखाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अब मध्य प्रदेश में राम भक्त के तौर पर नजर आ रहे हैं. ऐसे वक्त में उनकी पार्टी के एक सांसद की तरफ से आया यह बयान राहुल गांधी की रणनीति की धार कुंद करने वाला है.

राहुल गांधी मध्य प्रदेश के एक मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए

राहुल गांधी मध्य प्रदेश के एक मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए

कभी शिवभक्त तो कभी रामभक्त, कभी सोमनाथ तो कभी कैलाश मानसरोवर तो कभी अयोध्या की यात्रा कर अपने-आप को सच्चा हिंदू और भगवान का भक्त साबित करने की कोशिश में लगे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कोशिश को थरूर के बयान ने पलीता लगाने का काम किया है. बीजेपी ने शशि थरूर के इस बयान को लपकने में देर नहीं किया.

वीएचपी और संतों की कानून बनाने की मांग

दरअसल वीएचपी और संतों के साथ बैठक के बाद राम मंदिर निर्माण को लेकर कई तरह के कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया गया है. इनमें धरना-प्रदर्शन से लेकर ज्ञापन देना और फिर सभी सांसदों को उनके संसदीय क्षेत्र में घेराव करने का भी कार्यक्रम तय हुआ है. कोशिश सांसदों पर दबाव बनाकर राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनवाने का है. साधु-संतों और वीएचपी के लोगों की मांग है कि राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाया जाए.

हालाकि यह सब तब हो रहा है जबकि इसी महीने की 29 तारीख से सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई शुरू हो रही है. यानी एक तरफ 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही होगी, ठीक उसी वक्त दूसरी तरफ वीएचपी के लोगों की तरफ से मंदिर मुद्दे को गरमाया भी जाएगा. अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनाव के पहले नहीं आता है तो भी इस मुद्दे को संघ परिवार और वीएचपी की तरफ से हवा दी जाती रहेगी.

मतलब साफ है अगले विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक इस मुद्दे को जिंदा रखने की कोशिश की जाएगी. दूसरी तरफ, बीजेपी सुप्रीम कोर्ट के फैसले या फिर आपसी सहमति के आधार पर राम मंदिर निर्माण की बात कहती रहेगी.

सुप्रीम कोर्ट में इसी महीने के आखिर से अयोध्या मसले पर सुनवाई शुरू होगी

सुप्रीम कोर्ट में इसी महीने के आखिर से अयोध्या मसले पर सुनवाई शुरू होगी

कांग्रेस की गलती को लपकने की कोशिश में बीजेपी

पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर का बयान कुछ इसी तरह का था जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किया गया निजी हमला कांग्रेस को उल्टा पड़ गया. मणिशंकर अय्यर ने मोदी को 'चाय वाला' बताकर टी-स्टॉल लगाने की सलाह दी थी. इसके बावजूद कई मौकों पर मणिशंकर अय्यर वही गलती करते रहे. यहां तक कि पिछले साल हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में भी उनका प्रधानमंत्री मोदी को लेकर दिया गया विवादित बयान बीजेपी के लिए वरदान साबित हो गया.

उस वक्त प्रधानमंत्री मोदी ने अय्यर के बयान को हर रैली में उठाना शुरू कर दिया. अब एक बार वही गलती शशिश थरूर कर रहे हैं. राम मंदिर भले ही नहीं बन सका है लेकिन, इस मुद्दे पर सियासत खूब होती रही है. इस संवेदनशील मसले पर बीजेपी संभल कर कोर्ट के फैसले के इंतजार की बात कर रही है.

लेकिन, चुनावी मौसम में कांग्रेस की तरफ से की गई गलती भारी पड़ सकती है. कांग्रेस को शशि थरूर से लेकर मणिशंकर अय्यर जैसे नेताओं को संभाल कर आगे चलना होगा, वरना, सेल्फ गोल के माहिर यह खिलाड़ी राहुल गांधी की रणनीति पर पानी फेर देंगे.

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