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नए चेहरों की नियुक्तियों के बीच कांग्रेस में सवाल, राहुल गांधी कब करेंगे CWC का गठन?

कांग्रेस की वर्किंग कमेटी महत्वपूर्ण बॉडी है, जो कांग्रेस के सभी महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए अधिकृत है

Syed Mojiz Imam Updated On: May 25, 2018 10:21 AM IST

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नए चेहरों की नियुक्तियों के बीच कांग्रेस में सवाल, राहुल गांधी कब करेंगे CWC का गठन?

कर्नाटक की हार को जीत में तब्दील करने के लिए कांग्रेस के नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. बीजेपी को सीनियर नेताओं की मदद से राहुल गांधी ने पटखनी भी दे दी है. विपक्ष के नेताओं का जमावड़ा भी बेंगलुरु में खूब रहा है. कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को संयुक्त विपक्ष का नेता बनाने की जुगत भिड़ा रहे हैं. लेकिन कांग्रेस में एक सवाल जरूर सबके मन में है. कांग्रेस वर्किंग कमेटी का गठन कब होगा?

राहुल गांधी पार्टी के भीतर बदलाव ला रहे हैं. महत्वपूर्ण स्थानों पर युवा नेताओं को कुर्सी दी जा रही है, जिससे सीनियर नेताओं में बेचैनी बढ़ी है. ज्यादातर नेताओं को लग रहा है कि संगठन में महासचिव या प्रभारी का पद भले ही ना मिले लेकिन कांग्रेस कार्यसमिति में जगह मिल जाए. इस वजह से इंतजार किया जा रहा है. इस इंतज़ार के बाद किसको क्या मिलेगा इसका फैसला राहुल गांधी को करना है. कांग्रेस वर्किंग कमेटी के गठन के बारे में संगठन महासचिव अशोक गहलोत का कहना है कि जल्दी ही सीडब्लूसी की भी सूची जारी कर दी जाएगी. हालांकि अशोक गहलोत ने कुछ विस्तार से बताने से गुरेज़ किया है. कांग्रेस के नेता अभी कर्नाटक की जीत के ख़ुमार में हैं.

कांग्रेस वर्किंग कमेटी महत्वपूर्ण

कांग्रेस की वर्किंग कमेटी महत्वपूर्ण बॉडी है, जो कांग्रेस के सभी महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए अधिकृत है. कांग्रेस वर्किंग कमेटी की जवाबदेही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रति है. इतने महत्वपूर्ण संस्था का गठन ना हो पाना आश्चर्यजनक है क्योंकि कांग्रेस को कोई फैसला लेना हो तो पंरपरा यही है कि वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाकर उसमें प्रस्ताव पास किया जाता है. लेकिन अभी कांग्रेस के वेबसाइट पर वर्किंग कमेटी की जगह स्टीयरिंग कमेटी के मेंबर के नाम है. जबकि स्टीयरिंग कमेटी का काम अधिवेशन के बाद खत्म हो जाता है. नये अध्यक्ष के चुनाव के बाद स्टीयरिंग कमेटी बनती है, जिसका काम प्लीनरी सेशन कराने की है क्योंकि वर्किंग कमेटी में 12 मेंबर चुनकर आते हैं. बाकी मेंबर कांग्रेस अध्यक्ष नामित करते हैं.

अब राहुल गांधी सभी मेंबरों को नामित करेंगें. वर्किंग कमेटी में 25 सदस्य होते है, जिसमें अध्यक्ष के अलावा संसद में पार्टी के नेता पदेन सदस्य होते हैं. कांग्रेस के संविधान में आर्टिकल 29 में वर्किंग कमेटी की शक्तियों को परिभाषित किया गया है, जिसमें इस कमेटी के पास कांग्रेस के भीतर सभी तरह के अधिकार दिए गए हैं. यहां तक कांग्रेस से जुड़ी संपत्तियों के ट्रस्टी भी यही कमेटी नियुक्त करती है.

कांग्रेस के भीतर असमंजस की स्थिति

कांग्रेस के कई नेता हैरान हैं कि आखिर सीडब्लूसी के गठन में देरी क्यों की जा रही है क्योंकि अल्पकालिक व्यवस्था से ज्यादा दिन काम नहीं चल सकता है. देरी होने की वजह से इसकी अहमियत भी कम हो जाएगी. जो कांग्रेस के संगठन की मज़बूती की दृष्टि से ठीक नहीं है. इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष पर पार्टी को मनमानी तौर पर चलाने का भी तोहमत लग सकता है. एकतरफा फैसले लेने से भी पार्टी में ऊहापोह बना रहेगा. हालांकि राहुल गांधी के पक्ष में कई दलीलें भी दी जा रही हैं. मसलन कांग्रेस के संविधान में सीडब्लूसी को लेकर कोई समय सीमा नहीं दी गयी है. दूसरे राहुल गांधी ग्रासरूट वर्कर को तरजीह दे रहे हैं. इसलिए देरी हो रही है. राहुल गांधी कांग्रेस में यंग टीम बना रहे हैं.

यूपीए काल में सीडब्लूसी से ऊपर कोर ग्रुप

2004 में कांग्रेस की अगुवाई में सरकार बनने के बाद ही वर्किंग कमेटी की अहमियत घट गयी थी. सरकार के रोज़मर्रा के काम निपटाने के लिए सोनिया गांधी ने वैकल्पिक व्यवस्था कर दी थी. सोनिया गांधी ने कोर ग्रुप का गठन कर दिया था. जिसकी बैठक हर हफ्ते शुक्रवार को प्रधानमंत्री आवास पर होती थी. इसमें कांग्रेस के नेता महत्वपूर्ण मसलों पर फैसला लेते थे. सोनिया गांधी उस वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा अहमद पटेल और सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री इस कोर ग्रुप के मेंबर थे. हालांकि कोर ग्रुप की वजह से सीडब्लूसी की बैठकें कम हो गयी थीं. ज्यादातर फैसले कोर कमेटी की बैठक में लिये जाने लगे थे. हालांकि महत्वपूर्ण फैसलों के लिए सीडब्लूसी की बैठक होती रही है.

राहुल की बन रही यंग टीम

कांग्रेस में राहुल गांधी लगातार नियुक्तियां कर रहे हैं. इस हफ्ते ही कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग का चेयरमैन नदीम जावेद को नियुक्त किया है. नदीम जावेद एनएसयूआई के अध्यक्ष रह चुके हैं. यूपी के जौनपुर से 2012 में कांग्रेस के विधायक भी चुने गए थे. इसके अलावा दिल्ली के पूर्व विधायक राजेश लिलोठिया समेत कई लोगों को सचिव बनाया है.

हालांकि अभी कांग्रेस में कई राज्यों में बदलाव की दरकार है. यूपी में नये अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा काफी दिनों से चल रही है. बिहार में कार्यवाहक अध्यक्ष से काम चल रहा है. वहीं राहुल गांधी सीनियर नेताओं को राज्य का प्रभार तो दे रहे हैं. हिमाचल प्रदेश का प्रभार पूर्व सांसद रजनी पाटिल को दिया है. लेकिन प्रभारी के साथ नौजवान नेताओं को सचिव बनाकर प्रभारियों के साथ लगा रहे हैं. राहुल गांधी पहली बार ग्रासरूट वर्करों को भी तरजीह दे रहे हैं. ज्यादातर बने सचिव पहली पीढ़ी के नेता हैं. कांग्रेस के ऊपर पहले आरोप था कि विरासत की राजनीति करने वालों को ही संगठन में स्थान मिल रहा है. लेकिन राहुल गांधी इस परिपाटी को बदलने की कोशिश कर रहे हैं.

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