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कांग्रेस अप्रासंगिक है और बीजेपी छत्तीसगढ़ में सभी मोर्चों पर विफल रही: अजीत जोगी

फ़र्स्टपोस्ट से बात करते हुए जोगी ने छत्तीसगढ़ और दूसरी पार्टियों को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपना रुख साफ किया

Updated On: Nov 07, 2018 08:36 AM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

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कांग्रेस अप्रासंगिक है और बीजेपी छत्तीसगढ़ में सभी मोर्चों पर विफल रही: अजीत जोगी
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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और अब जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के संस्थापक, राजनीतिक मास्टरमाइंड के तौर पर हासिल अपनी उपलब्धियों को राजनेता के रूप में कमतर करते हैं. जब उन्होंने अपना खुद का संगठन लांच करने का फैसला लिया और राज्य में किसी भी प्रमुख पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करने का फैसला किया, तो यह राजनेता की बेचैनी को दर्शा रहा था. वास्तव में कोई नहीं जानता कि वह किसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगे, सत्तारूढ़ बीजेपी को या कांग्रेस को. बीएसपी को साझीदार बनाकर चुनाव लड़ने का फैसला करके, उन्होंने निश्चित रूप से प्रतिद्वंद्वियों की चिंता बढ़ा दी है.

फ़र्स्टपोस्ट से बात करते हुए जोगी ने छत्तीसगढ़ और दूसरी पार्टियों को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपना रुख साफ किया. पेश हैं इसके कुछ अंश...

फ़र्स्टपोस्ट: छत्तीसगढ़ में कोटा निर्वाचन क्षेत्र की मौजूदा विधायक आपकी पत्नी डॉ. रेणु जोगी कांग्रेस की एक वफादार सिपाही थीं, जो आपकी पार्टी में शामिल नहीं हुईं और कांग्रेस में ही रहने का फैसला लिया. लेकिन आखिरी पलों में, कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया. आपका क्या कहना है?

जवाब: कांग्रेस का डॉ. रेणु जोगी को टिकट नहीं देना उनका पार्टी का अंदरूनी मामला है, इसलिए मैं इस पर ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा. हालांकि मैं यह जिक्र करना चाहूंगा कि यह कांग्रेस राज्य इकाई की ‘एबीजे’ (एनिबॉडी बट जोगी यानी कोई भी चलेगा, लेकिन जोगी नहीं) रणनीति का हिस्सा है जो 2003 से चलन में है.

मैं रेणु को अपनी पार्टी में शामिल होने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा था लेकिन श्रीमती सोनिया गांधी के साथ उनके पारिवारिक संबंधों के कारण, वह पिछले ढाई सालों से कांग्रेस के साथ थीं. कांग्रेस के प्रति उनकी वफादारी का इससे बड़ा सबूत क्या हो सकता है कि उन्होंने पति-पत्नी के रिश्ते से ज्यादा कांग्रेस के साथ अपने रिश्ते को तरजीह दी? फिर भी कांग्रेस उनके पार्टी के प्रति समर्पण को नहीं पहचान पाई, इसलिए पार्टी ने उन्हें कोटा से अलग करने की कोशिश की, जो उनके लिए एक परिवार की तरह है.

वह कोटा से अलग नहीं रह सकती हैं, इसलिए अब वह जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं.

फ़र्स्टपोस्ट: आप छत्तीसगढ़ में राजनीति करने बावजूद अभी भी राष्ट्रीय महत्व के नेता हैं. आपके पार्टी छोड़ने के बाद से कांग्रेस में नेतृत्व का खालीपन है. क्या आपको लगता है कि यह आपके लिए फायदेमंद होगा?

जवाब: यह विडंबना है कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार होने के बाद भी उनके पास अभी तक एक भी चेहरा नहीं है जिसे छत्तीसगढ़ में पेश कर सके. उनके सभी तथाकथित नेता अपने खुद के निर्वाचन क्षेत्रों तक ही सीमित हैं. यह निश्चित रूप से उनके लिए नुकसानदायक है. जैसा कि एक मशहूर कहावत है-  'ज्यादा साधु, मठ उजाड़.' हमने पहले भी 2008 और 2013 में ऐसी हालत देखी है, जब मुख्यमंत्री पद के सभी तथाकथित उम्मीदवारों ने नतीजों से ठीक पहले शीर्ष पद के लिए हाई कमान से लॉबीइंग की थी, लेकिन जब नतीजे आए, तो दावेदार अपनी सीट भी नहीं जीत सके.

जहां तक मेरी पार्टी या बल्कि मेरे गठबंधन का मसला है, हम इससे फिक्रमंद नहीं हैं क्योंकि यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है. हमारी लड़ाई बीजेपी के साथ है. कांग्रेस तो अप्रासंगिक हो चुकी है. हम रमण सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

फ़र्स्टपोस्ट: बीएसपी और आपकी पार्टी की साझा ताकत बीजेपी को हराने के लिए काफी होगी? राज्य में बीएसपी का बड़ा वोट शेयर नहीं है.

जवाब: वोट शेयर पर विचार करने के बजाय (जो पूरे राज्य में कुल वोट दर्शाता है), आपको निर्वाचन क्षेत्रों में वोटों को देखने की जरूरत है जो बीएसपी ने सभी चुनावों में हासिल किया है. चूंकि भारत में ‘फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट’ चुनावी प्रणाली का पालन किया जाता है, इसलिए निर्वाचन क्षेत्र का वोट मायने रखता है, न कि टोटल वोट शेयर. अगर हम 2003, 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और बीएसपी द्वारा हासिल वोटों को एक साथ मिलाकर देखें तो साफ है कि कॉम्बिनेशन इन सभी चुनावों में बहुमत हासिल कर रहा था जो स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि अगर ये दोनों पार्टियां साथ होतीं तो छत्तीसगढ़ में बीजेपी कभी सत्ता में नहीं आ सकती थी.

मौजूदा समय में, कांग्रेस अप्रासंगिक हो गई है. लोगों को कांग्रेस से कोई उम्मीद नहीं है और इसी कारण से वो रमण सिंह सरकार के भ्रष्टाचार के बावजूद बीजेपी को वोट दे रहे हैं. अब हमारे गठबंधन के रूप में उनके सामने एक स्पष्ट विकल्प है. यह गठबंधन जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) और बीएसपी की ताकत को एकजुट करने में मदद करेगा; बस्तर क्षेत्र और औद्योगिक बेल्ट में सीपीआई समर्थित श्रमिक संघ सीआईटीयू की मौजूदगी से भी फायदा होगा.

बीएसपी के साथ हमारा गठबंधन सिर्फ दो पक्षों में नहीं बल्कि दो दिलों का मिलन है जो एक साथ धड़तते हैं. इस तथ्य की सबसे बड़ी निशानी यह है कि मेरी बहू रिचा बीएसपी के निशान पर चुनाव लड़ रही हैं.

फ़र्स्टपोस्ट: आपके विचार में, रमन सिंह सरकार के 15 साल के कार्यकाल की क्या कमजोरियां हैं?

जवाब: संक्षेप में, मैं कहना चाहूंगा कि सरकार आम आदमी से संबंधित सभी तीनों क्षेत्रों- स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर नाकाम रही है. जब मैं सुरक्षा की बात कहता हूं तो इसमें महिलाओं की सुरक्षा, वित्तीय सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, बढ़ते अपराध और माओवादी समस्या शामिल है. इसके लिए अंतर्निहित कारण अक्षमता और चौतरफा भ्रष्टाचार है.

अपनी बात समझाने के लिए मैं कुछ उदाहरण पेश करना चाहता हूं, जो स्पष्ट रूप से रमन सिंह सरकार के 15 वर्षीय कार्यकाल की नाकामी को उजागर करते हैं:

राज्य में 30 लाख बेरोजगार युवा होने के बावजूद, बाहरी लोगों को नौकरियां दी जा रही हैं.

सरकार शराब बेचने का कारोबार चला रही है लेकिन रेशनलाइजेशन के नाम पर स्कूल बंद कर रही है.

किसानों से किए वादे के मुताबिक एमएसपी नहीं दिया जिससे वो आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं.

सरपल्स बिजली वाला राज्य बिजली की कमी से जूझ रहा है, लेकिन सरकार दूसरे राज्यों को बिजली बेच रही है.

गलत नीतियों के कारण व्यापारियों को मंदी का सामना करना पड़ रहा है- खासकर नोटबंदी और जीएसटी के खराब तरीके से अमल के कारण.

मानव तस्करी और महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ गए हैं.

नौकरशाही हावी है और भ्रष्टाचार का बोलबाला है- मुख्यमंत्री खुद एक साल से अपने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से कमीशनखोरी रोकने के लिए कह रहे हैं ताकि अगले 30 वर्षों तक शासन किया जा सके… यह सूची अंतहीन है.

फ़र्स्टपोस्ट: आपका मुख्य चुनावी मुद्दा क्या होगा?

जवाब: राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भारत के एकमात्र ऐसे राज्य हैं जहां अभी तक कोई क्षेत्रीय पार्टी नहीं है. यह चुनाव छत्तीसगढ़ में परिदृश्य को बदल देगा. अब छत्तीसगढ़ के लोगों को निर्णय लेने के लिए दिल्ली या नागपुर पर निर्भर नहीं रहना होगा. उनके सभी फैसले छत्तीसगढ़ में लिए जाएंगे.

यह सरकार “छत्तीसगढ़ के लोगों की, छत्तीसगढ़ के लोगों द्वारा और छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए” होगी.

फ़र्स्टपोस्ट: माओवादी समस्या के प्रति आपका दृष्टिकोण क्या होगा?

जवाब: माओवादी समस्या का समाधान गोली से नहीं किया जा सकता. एक प्रसिद्ध कहावत है, 'आंख के बदले आंख से पूरी दुनिया अंधी हो जाएगी.' यह बात इस मामले में भी लागू होती है. माओवादी समस्या को बातचीत कर उनको राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करके हल किया जा सकता है. नेपाल में यही हुआ. हमें सामाजिक-आर्थिक विकास की जरूरत है, उन्हें शिक्षा और रोजगार की जरूरत है, और उन्हें एक अच्छी जीवनशैली के लिए प्रेरित करना होगा.

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