S M L

यूपी में बागियों के भरोसे कांग्रेस: क्या मोदी की राह पर चल रहे हैं राहुल गांधी?

यूपी में कांग्रेस के पास जमीनी नेता तैयार नहीं हो रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस के पास बाहर से आए नेताओं के भरोसे चलने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है

Updated On: Feb 03, 2018 12:59 PM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

0
यूपी में बागियों के भरोसे कांग्रेस: क्या मोदी की राह पर चल रहे हैं राहुल गांधी?

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हालत खस्ता है. वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के साथ साइकिल की सवारी करने के बावजूद कांग्रेस दहाई का आंकड़ा नहीं छू सकी. कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी का ध्यान यूपी में कांग्रेस को खड़ा करने पर लगा हुआ है. यूपी में कांग्रेस के पास नेता तो हैं लेकिन कार्यकर्ता नहीं हैं.

बीजेपी की तरह कांग्रेस सोशल इंजीनियरिंग भी नहीं कर पा रही है. राहुल गांधी की निगाह ऐसे नेताओं पर है, जो कांग्रेस के साथ आ सकते हैं. राहुल गांधी लगातार ऐसे नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं जो अपनी पार्टी में या तो हाशिए पर हैं या मौजूदा व्यवस्था से खुश नहीं है.

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के पूर्व नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी मायावती से अलग होने के बाद राजनीतिक बियाबान में हैं. उन्होंने राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा के नाम से अपना दल भी खड़ा किया है. लेकिन एक बड़े दल के सहारे की जरूरत है. बताया जा रहा है कि जनवरी के तीसरे हफ्ते में राहुल गांधी से नसीमुद्दीन की मुलाकात हुई है, जिसमें उनके साथ बीएसपी छोड़कर आए लगभग 10 पूर्व सांसद और विधायक भी थे. इससे पहले पिछले साल 28 नवंबर को भी नसीमुद्दीन ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी.

maywati-nasimuddin

हालांकि उनके कांग्रेस में औपचारिक तौर पर शामिल होने के लिए अभी तारीख तय की जा रही है. बताया जा रहा है कि नसीमुद्दीन बांदा के आसपास कांग्रेस के पक्ष में काम कर रहे हैं. बताया यह भी जा रहा है कि वो जल्दी ही राहुल गांधी के साथ एक मंच पर नजर आएंगे. इसके अलावा समाजवादी पार्टी (एसपी) के शिवपाल सिंह यादव से भी कांग्रेस के नेताओं से बातचीत चल रही है.

शिवपाल की अभी राहुल गांधी से मुलाकात नहीं हो पाई है. लेकिन बातचीत आखिरी दौर में हैं. कांग्रेस अभी तय नहीं कर पा रही है कि आखिर शिवपाल सिंह यादव को किस तरह से पार्टी में लाया जाए. ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस के नेता अखिलेश यादव को भी नाराज नहीं करना चाहते हैं. वहीं कांग्रेस के सूत्र बता रहे है कि अखिलेश के गठबंधन तोड़ने से ये काम आसान हो गया है.

नसीमुद्दीन क्यों है महत्वपूर्ण ?

नसीमुद्दीन सिद्दीकी कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं. इस वक्त कांग्रेस के पास यूपी में मुस्लिम नेताओं का अभाव है. सलमान खुर्शीद कांग्रेस में यूपी के बड़े नेता हैं. लेकिन जमीनी पकड़ से दूर हैं. नसीमुद्दीन बीएसपी से निकाले जाने से पहले पार्टी में निर्विवाद रूप में नंबर 2 नेता रहे हैं. उनकी बीएसपी के काडर पर भी अच्छी पकड़ है, खास कर जिला स्तर के वर्कर और बीएसपी के मुस्लिम वर्कर पर, जिससे कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल सकती है.

कांग्रेस को लग रहा है कि इस फैसले के बाद बांदा, फतेहपुर, इलाहाबाद और तराई की कुछ सीटों पर मुस्लिम वर्कर बीएसपी का साथ छोड़कर कांग्रेस के साथ आ सकते हैं. नसीमुद्दीन कांशीराम के समय से ही बीएसपी को खड़ा करने में मशक्कत कर चुके हैं. वो एक जमाने में मायावती के खास भी रह चुके हैं. लेकिन फिर अचानक पार्टी से निकाल दिए गए. नसीमुद्दीन ने पहले समाजवादी पार्टी में जाने की कोशिश की थी लेकिन वहां बात नहीं बन पाई.

शिवपाल सिंह यादव की कवायद

Shivpal Yadav

इसी तरह शिवपाल सिंह यादव भी एसपी में हाशिए पर हैं. मुलायम सिंह से उनका यकीन अब उठ चुका है. शिवपाल को पता चल गया है कि पार्टी में उनका एडजस्ट होना मुश्किल है. पहले शिवपाल ने अलग पार्टी बनाने की तैयारी की थी. लेकिन अब वो अलग पार्टी बनाने से पीछे हट गए हैं. इसलिए उन्हें माकूल यही लग रहा है कि किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाएं.

शिवपाल के कांग्रेस में आने की बात अभी फाइनल नहीं हुई है. लेकिन कांग्रेस को लग रहा है कि इससे समाजवादी पार्टी के गढ़ में पैठ बन सकती है. इटावा फर्रूख़ाबाद, फिरोज़ाबाद, मैनपुरी, संभल में कांग्रेस को मजबूती मिल सकती है. इसके अलावा शिवपाल के साथ हर जिले में समाजवादी पार्टी के वर्कर हैं, जो कांग्रेस के साथ आ सकते हैं. इससे कांग्रेस में वर्कर की कमी भी पूरी हो सकती है.

यूपी में बाहरी नेताओं के भरोसे है कांग्रेस 

2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं. लेकिन अब तक सरकार की मंशा साफ नहीं है. इधर अनुमान लगाया जा रहा है कि चुनाव पहले भी कराए जा सकते हैं. कांग्रेस भी इसी हिसाब से तैयारी कर रही है. यूपी में कांग्रेस के पास नेताओं की कमी है. पहले से कांग्रेस में बाहरी नेताओं की भरमार है. कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर समाजवादी पार्टी से सांसद रह चुके हैं. पीएल पुनिया एक जमाने में मायावती के खास अफसरों में शुमार थे. लेकिन अब कांग्रेस के छत्तीसगढ़ के प्रभारी हैं. कानपुर देहात से पूर्व बीएसपी सांसद राजाराम पाल कांग्रेस में हैं. वो 2009 में कांग्रेस से सांसद चुने गए थे. इस लिहाज से कांग्रेस यूपी में इन बाहरी नेताओं के भरोसे है.

कांग्रेस के नेता और मुलायम सिंह के आय से अधिक संपत्ति के मामले मे याचिकाकर्ता रहे विश्वनाथ चतुर्वेदी कहते हैं कि ‘कांग्रेस के लिए एसपी से अलग रहकर चुनाव लड़ना ज्यादा मुफीद है. 2009 में एसपी से अलग होकर कांग्रेस ने चुनाव लड़ा तो 22 सांसद जीत कर आए. हालांकि बाहरी नेता हमेशा कारगर नहीं होते. बेनी प्रसाद वर्मा का उदाहरण सामने है जो कांग्रेस की हालत खस्ता होते ही दोबारा एसपी में वापस चले गए.’

Rahul And Modi

बीजेपी की राह पर चल रही है कांग्रेस 

2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बाहर से आए नेताओं को टिकट बांटे. इनमें बीएसपी के नेता ज्यादा थे. स्वामी प्रसाद मौर्या बीएसपी से आए. लखीमपुर के जुगुल किशोर पासी समाज से आते हैं. बीजेपी में आने से पासी समाज का वोट बीजेपी के खाते में भी आया. इस तरह पूर्व सांसद बृजेश पाठक भी बीजेपी मे शामिल हो गए थे. कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा भी अब बीजेपी सरकार में मंत्री हैं. हालांकि हर बार दल बदलुओं की ही लॉटरी लगे यह जरूरी नहीं. फिलहाल कांग्रेस के पास जमीनी नेता तैयार नहीं हो रहे हैं. इसलिए बाहर से आए नेताओं के भरोसे चलने के अलावा पार्टी के पास अभी कोई रास्ता नहीं है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi