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कांग्रेस स्थापना दिवस: वंशवाद से ज्यादा विविधता को दर्शाता है कांग्रेस का अध्यक्ष पद

कांग्रेस में 19 साल बाद नेतृत्व का परिवर्तन हुआ है. सोनिया गांधी के बाद अब उनके बेटे राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बने हैं

Updated On: Dec 28, 2017 08:34 AM IST

FP Staff

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कांग्रेस स्थापना दिवस: वंशवाद से ज्यादा विविधता को दर्शाता है कांग्रेस का अध्यक्ष पद

नेहरू-गांधी खानदान की पांचवी पीढ़ी के राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष चुन लिए गए हैं. 132 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद पर राष्ट्रपिता से लेकर हिंदू महासभा के बड़े नेता, विदेशी मूल के लोगों से लेकर देश के हर कोने के लोग इसकी कमान संभाल चुके हैं. जो लोग इसके अध्यक्ष बने उनमें से चार महिलाओं और तीन नेताओं की हत्या भी हुई है.

भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्षों ने इतिहास की किताब में  अपने स्वयं के अध्याय लिखे हैं. 47 साल के राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस में उत्सव सा माहौल है. कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन 19 साल बाद हो रहा है.

1985 में कांग्रेस पार्टी का गठन हुआ था. आजादी के बाद अब तक 15 लोगों ने इसका नेतृत्व किया है. इनमें से चार अध्यक्ष नेहरू-गांधी परिवार से रहे हैं. राहुल इस खानदान से कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाले पांचवें नेता हैं.

1947 में आजादी मिलते समय आचार्य जेबी कृपलानी इसके अध्यक्ष थे. इसके बाद पट्टाभि सीतारमैया अध्यक्ष बने. जब भारत गणतंत्र घोषित हुआ तो राजर्षि कहे जाने वाले पुरुषोत्तमदास टंडन इसके अध्यक्ष थे. 1951 में कांग्रेस की कमान जवाहर लाल नेहरू के हाथ में आई और 1954 तक रही.

1959 में एक साल के लिए कांग्रेस अध्यक्ष बनीं. उनके बाद नीलम संजीव रेड्डी 5 साल तक कांग्रेस अध्यक्ष रहे. इंदिरा के पास दुबारा कांग्रेस की कमान आने में 19 साल का समय लग गया. इस बीच में भारतीय राजनीति के कई प्रसिद्ध नाम कांग्रेस अध्यक्ष रहे. इनमें के कामराज, जगजीवन राम और शंकर दयाल शर्मा शामिल हैं.

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी के पास कांग्रेस की बागडोर आई. कांग्रेस में वंशवाद का पहला सीधा उदाहरण यहां दिखता है क्योंकि राजीव इससे पहले राजनीति में उस तरह से सक्रिय नहीं थे.

राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस की कमान प्रतिभाशाली माने जाने वाले पी वी नरसिंह राव के हाथ में आई. 1996 में राव की विदाई के बाद सीताराम केसरी कांग्रेस अध्यक्ष बने.

सीताराम केसरी के दौर में देश और कांग्रेस दोनों ने स्थिरता देखी. केसरी के समय में इंद्र कुमार गुजराल और एच डी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने. केसरी ने खुद प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांछा में संयुक्त मोर्चे की सरकार गिरवा दी. उस समय सियासी गलियारों में ये कहावत तक चलने लगी कि न खाता न बही, जो केसरी कहें वो सही.

सीताराम केसरी को दी गई ज़बरदस्ती विदाई के बाद सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनीं. सोनिया तब से कांग्रेस अध्यक्ष बनी हुई हैं. बतौर अध्यक्ष दो दशक कांग्रेस में रहने के दौरान सोनिया और कांग्रेस दोनों ने कई उतार-चढ़ाव देखे. विदेशी बहू और फील गुड के बावजूद उन्होंने अटल बिहारी जैसे दिग्गज को धूल चटा दी. लाल कृष्ण अडवाणी के 2009 में प्रधानमंत्री न बनने के लिए सोनिया गांधी की भी कांग्रेस जिम्मेदार है.

सोनिया गांधी के समय में एक बड़ा बदलाव दिखा. कांग्रेस अध्यक्ष का घर 10-जनपथ प्रधानमंत्री निवास 7-आरसीआर से बड़ा सत्ता केंद्र बन गया.

महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, अबुल कलाम आजाद और सरोजिनी नायडू और राहुल गांधी के परदादा मोतीलाल नेहरू जैसे शानदार शख्सियत वाले लोगों ने गुजरे समय में कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व किया है.

दिसंबर 1885 में कांग्रेस के पहले अधिवेशन सत्र में पत्रकार, न्यायविद् और राजनेता व्योमेश चंद्र बैनर्जी पार्टी के अध्यक्ष चुने गए थे. वहीं दादा भाई नौरोजी कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाले दूसरे व्यक्ति थे. बदरुद्दीन तैयबजी कांग्रेस के पहले मुस्लिम अध्यक्ष थे. ऐनी बेसेंट कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष और सरोजनी नायडू पहली भारतीय महिला अध्यक्ष थीं. सोनिया गांधी के विदेशी मूल को लेकर उठने वाले सवालों से कई वर्ष पूर्व 5 ऐसे लोग कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे जिनका जन्म भारत से बाहर हुआ था.

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