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पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों को लेकर कांग्रेस का लिटमस टेस्ट है 'भारत बंद'

राहुल गांधी की गैर मौजूदगी में अशोक गहलोत और अहमद पटेल ने बंद को कारगर बनाने के लिए खाका तैयार किया है. कांग्रेस के लिए यह प्रदर्शन किसी इम्तिहान से कम नहीं है

Updated On: Sep 10, 2018 09:10 AM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

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पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों को लेकर कांग्रेस का लिटमस टेस्ट है 'भारत बंद'

कांग्रेस ने पेट्रोल डीजल की बढ़ी कीमतों के विरोध में सोमवार को भारत बंद का आह्वान किया है. जिसकी तैयारी के लिए कांग्रेस में लंबी मीटिंग हुई है. सभी प्रदेश अध्यक्षों को इस बंद को सफल बनाने के निर्देश दिए गए हैं. कांग्रेस के लिए भारत बंद एक बड़ी चुनौती है. जिसके लिए पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. राहुल गांधी की गैर मौजूदगी में अशोक गहलोत और अहमद पटेल ने बंद को कारगर बनाने के लिए खाका तैयार किया है. कांग्रेस के लिए ये प्रदर्शन किसी इम्तिहान से कम नहीं है.

कांग्रेस के मास्टर स्ट्रैटजिस्ट पर दारोमदार

कांग्रेस के मुख्य रणनीतिकार अहमद पटेल पर इस बंद को सफल बनाने की ज़िम्मेदारी है. पार्टी के भीतर ये काम वही करते रहे हैं. इसलिए कांग्रेस भारत बंद जैसा आह्वान का जोखिम उठा रही है. कांग्रेस को लग रहा है कि कामयाबी मिल जाएगी. अहमद पटेल के राजनीतिक रिश्ते सभी दलों में ठीक-ठाक है. जिसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है. अहमद पटेल की कोशिश रंग ला रही है. कांग्रेस सहयोगी दलों से भी मदद मांग रही है.

Bharat Bandh Congress

पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दाम के विरोध में कांग्रेस ने भारत बंद बुलाया है

सहयोगी दलों से भी मिल रही है मदद

कांग्रेस ने शरद यादव के जरिए सहयोगी दलों को साधने की कोशिश कर रही है. जिसमें आरजेडी ने कांग्रेस का साथ देने की हामी भर दी है. लेकिन देश के सबके बड़े सूबे यूपी में कांग्रेस के सामने चुनौती है. जिसे अखिलेश यादव ने पूरा कर दिया है. समाजवादी पार्टी ने पूरे प्रदेश में धरना देने की हिदायत दी है. एसपी ने सोमवार को बुलाई बैठक स्थगित कर दी है. एसपी के समर्थन से कांग्रेस को राहत मिल सकती है. हालांकि ममता बनर्जी ने कांग्रेस की हिमायत की है. लेकिन भागीदारी पर संशय है.

पूरे उत्तर भारत में कांग्रेस ना सरकार में है ना विपक्ष में है. कांग्रेस के नेता सहयोगी दलों को तैयार कर रहे हैं ताकि मोदी सरकार को घेरने में सफल हो जाए. कांग्रेस के साथ दिक्कत है कि यूपी, बिहार, बंगाल, झारखंड में पार्टी के पास कार्यकर्ताओं की कमी है. जिससे सड़क पर पार्टी की ताकत नहीं दिखाई दे रही है.

ahmed patel

अहमद पटेल

वहीं बंगाल को छोड़कर बाकी उत्तर भारत में बीजेपी की सरकार है. जहां प्रशासन भी मुस्तैद रहेगा. बीजेपी शासित राज्यों में बंद को सफल बनाना और भी मुश्किल है. हालांकि पार्टी को भरोसा है कि विपक्षी दल भले ही अंदरूनी समर्थन करे लेकिन बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने की इस कोशिश में सहयोग करेंगे.

कांग्रेस के साथ दिक्कत है कि जहां सरकार नहीं है. वहां संगठन भी कमजोर है. जिसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है. मसलन महाराष्ट्र में बिना एनसीपी के सहयोग से बंद सफल नहीं हो सकता है. झारखंड में जेएमएम का साथ चाहिए. तो आन्ध्र प्रदेश में सत्ताधारी टीडीपी के सहयोग के लिए बातचीत की जा रही है. तमिलनाडु में डीएमके ने मदद का भरोसा दिया है.

बंद को सफल बनाने की तैयारी

भारत बंद को सफल बनाने के लिए पार्टी के पदाधिकारी दिन-रात एक किए हुए हैं. सभी नेताओं को व्यक्तिगत तौर से संपर्क साधा जा रहा है. कांग्रेस के जिला अध्यक्षों को पार्टी की तरफ से निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि बंद में सभी लोगों का सहयोग लिया जा सके. हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने बताया कि उन्होंने सभी यूनियन से बात की है. व्यापारियों का सहयोग लेने के लिए इन संगठनों के जिम्मेदार लोगों को राजी कर रहे हैं. ट्रांसपोर्ट संगठन से खासकर सहयोग मांगा जा रहा है. वहीं अशोक तंवर खुद हरियाणा के जींद में रहकर इस विरोध को सफल बनाएंगे.

कांग्रेस के पदाधिकारियों को अलग से टारगेट दिया गया है. जिसमें हर पदाधिकारी को अपने इलाके में रहकर जनता को जागरुक करने का अभियान चलाने के लिए कहा गया है. दिल्ली के ओखला ब्लॉक के अध्यक्ष परवेज आलम खान ने बताया कि उनकी ड्यूटी पेट्रोल पंप पर है. जहां वो जनता को बीजेपी के बारे में बताएंगे. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की वजह से जनता को रूबरू कराएंगे. कांग्रेस ने पर्चे भी छपवाए हैं. हालांकि पार्टी के कई नेता कह रहे हैं कि वक्त कम है. इसलिए जनता को साथ जोड़ने का समय नहीं मिला है.

Congress-BJP

पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दाम के विरोध में कांग्रेस ने सोमवार को भारत बंद बुलाया है

जनता का मसला जनता का कितना समर्थन

पेट्रोल-डीज़ल का मुद्दा सीधे जनता से जुड़ा हुआ है. सोमवार को बंद का आह्वान है. यह सरकारी वर्किंग डे है. जिसको काम है, उसको घर से निकलना मजबूरी है. ऐसे में सीधे जनता की भागीदारी मुश्किल है. इस मसले से कांग्रेस को सियासी फायदे की उम्मीद है. कांग्रेस को लग रहा था कि राफेल से पार्टी को ताकत मिलेगी. लेकिन राफेल से जनता का सीधे कनेक्ट नहीं हो पाया है. तेल का मसला जनता का मुद्दा है. खासकर खरीफ की बुआई का मौसम है. जहां बारिश कम है वहां डीजल से चलने वाले पंपों के जरिए जरिए सिंचाई की जाती है. किसान की खेती में लागत बढ़ रही है. यूपी में गन्ना किसान परेशान है. उनका पुराना बकाया जस के तस बना हुआ है.

सोशल मीडिया पर जनता गुस्सा दिखा रही है.  फेसबुक और ट्विटर पर लोग पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ लगातार सरकार की आलोचना कर रहे हैं. कांग्रेस इस गुस्से को कैश करने की फिराक में है. सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री से लेकर सुषमा स्वराज के विरोध प्रदर्शन की तस्वीर साझा की जा रही है. जब बीजेपी के नेता इस मुद्दे पर यूपीए सरकार के विरोध में थे. यहीं नहीं पंतजलि योगपीठ के बाबा रामदेव की बातो के ऑडियो और वीडियो वायरल किए जा रहे है. जिसमें पेट्रोल के दाम कैसे बीजेपी के राज में कम होंगे इसके पक्ष में तर्क दिया जा रहा था. अब इस सबको मज़ाक के तौर पर दिखाया जा रहा है.

कांग्रेस का टेस्ट क्यों?

पेट्रोल-डीज़ल का दाम बढ़ने से सीधे जनता की जेब कटती है. हर दिन कीमतें बढ़ने से लोग परेशान हैं. डीज़ल के दाम बढ़ने से मंहगाई बढ़ती है. परिवहन खर्च बढ़ने से रोजमर्रा का सामान महंगा हो जाता है. इससे सब्ज़ी वगैरह के दाम बढ़ना लाज़िमी है. इस मसले पर जनता को सड़क पर लाना आसान काम है. कांग्रेस अगर जनता को सड़क पर नहीं ला पाती है. तो असफलता मानी जाएगी. वहीं पार्टी के लोकप्रियता का आकलन भी किया जाएगा.

देश में पिछले 11 दिन से पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ी हैं

पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दाम के लिए क्रूड ऑयल महंगा होने और डॉलर के मुकाबले रुपए के मूल्य में आई गिरावट को वजह बताई जा रही है

क्यों बढ़ रहे हैं तेल के दाम?

यूपीए सरकार के वक्त पेट्रोल के दाम को सरकारी नियंत्रण से बाहर कर दिया गया था. बीजेपी की सरकार आने के बाद डीज़ल को भी डी-कंट्रोल कर दिया गया है. इसका मतलब है कि तेल कंपनियां हर दिन तेल के दाम तय करेंगी. हालांकि सरकार के टैक्स की वजह से दाम बढ़ रहे हैं.

सरकार चाहे तो टैक्स कम करके जनता को राहत दे सकती है. लेकिन सरकार की दलील है कि इससे सरकारी खजाने में कमी आ सकती है. हालांकि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम तेल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं. इससे तेल के दाम कम हो सकते है. बीजेपी के नेता सुब्ररमण्यम स्वामी भी सरकार के खिलाफ है. लेकिन सरकार अपना पल्ला झाड़ रही है.

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