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हिमाचल प्रदेश चुनाव: दलित कार्ड को भुनाने में जुटी कांग्रेस, बीजेपी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में एम्स का शिलान्यास करेंगे

Updated On: Oct 02, 2017 06:32 PM IST

Bhasha

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हिमाचल प्रदेश चुनाव: दलित कार्ड को भुनाने में जुटी कांग्रेस, बीजेपी

दलित राजनीति से आमतौर पर दूर रहने वाले हिमाचल प्रदेश में आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी दलित कार्ड को भुनाने में जुट गए हैं. दलित मतदाताओं को साधने के लिए दोनों दल ‘दलित सम्मेलनों’ के आयोजन पर खास जोर दे रहे हैं.

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की 25 प्रतिशत दलित आबादी को साधने में कांग्रेस और बीजेपी दोनों दल जोरशोर से जुट गए हैं. राज्य में दोनों दलों की ओर से ‘दलित सम्मेलनों’ के आयोजनों का सिलसिला शुरू हो गया है और इसमें दलित बहुल इलाकों पर खास ध्यान दिया जा रहा है.

राज्य में 68 सदस्यीय विधानसभा में 20 सीटें आरक्षित हैं जिसमें अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 17 है जबकि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए तीन सीटें आरक्षित हैं. अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में चूड़ा, इंदोरा, जयसिंहपुर, बैजनाथ, अन्नी, कर्सोग, नाचन, बाल्ह, भोरंज, चिंतपूर्णी, भंडूटा, सोलन, कसौली, पच्छाड, श्रीरेणुकाजी, रामपुर, रोहरू शामिल है. अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में भारमौर, लाहौल स्पीति और किन्नौर शामिल है.

3 अक्टूबर को प्रधानमंत्री हिमाचल जाएंगे

हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक इतिहास पर गौर करें तो प्रदेश में चुनाव कभी जातिवाद पर आधारित नहीं रहे हैं. आमतौर पर विधानसभा चुनाव को लोग क्षेत्रीय मुद्दों के आधार पर देखते रहे हैं जबकि लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दे हावी रहते हैं. लेकिन इस बार जहां कांग्रेस अपनी सत्ता कायम करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है, तो बीजेपी भी राज्य में सत्ता हासिल करने में कोई कमी नहीं रख रही है, ऐसे में दलितों का विषय प्रमुखता से उठ रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में आएंगे. इस मौके पर वे बिलासपुर में प्रदेश के पहले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का शिलान्यास करेंगे.

बिलासपुर सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट है. प्रदेश में ‘50 प्लस’ मिशन को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने दलित सम्मेलनों की शुरूआत की. इन सम्मेलनों का आयोजन खासतौर पर ऐसे क्षेत्रों में किया जा रहा है जो सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं या जिन क्षेत्रों में दलितों की अच्छी खासी आबादी है.

दलितों को लुभाने में कांग्रेस भी पीछे नहीं दिखना चाहती है

बीजेपी इन क्षेत्रों में छोटी छोटी सभाएं कर रही है और वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की कमियों को गिना रही है. हमीरपुर में जहां प्रेम कुमार धूमल ने दलित स्वाभिमान सम्मेलन में हिस्सा लिया, तो जुब्बल कोटखई में प्रदेश प्रभारी मंगल पांडे में कार्यक्रम को संबोधित किया.

पार्टी बद्दी और ढालपुर में भी ऐसे कार्यक्रम का आयोजन कर चुकी है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि प्रदेश में अब तक 50 ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है.

विधानसभा चुनाव से पहले दलितों को लुभाने में कांग्रेस भी पीछे नहीं दिखना चाहती है. कांग्रेस ने सोलन जिले से दलित सम्मेलनों के आयोजन का कार्यक्रम शुरू किया है और यह कसौली, कुमारहट्टी में खास तौर पर देखा जा सकता है. इसके बाद सुबाथू में पार्टी ने एक और दलित सम्मेलन का आयोजन किया था. प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे दलित कार्यक्रमों पर खास जोर दे रहे हैं.

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