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राफेल मुद्दे पर मोदी सरकार पर हमलावर कांग्रेस, कहा- दो सरकारों के बीच नहीं है सौदा

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने अगर कसम खा ली है कि सच नहीं बताएंगे तो हमने भी कसम खाई है कि हम सच सामने लाकर मानेंगे’

Updated On: Nov 14, 2018 04:48 PM IST

FP Staff

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राफेल मुद्दे पर मोदी सरकार पर हमलावर कांग्रेस, कहा- दो सरकारों के बीच नहीं है सौदा

कांग्रेस ने दसॉ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एरिक ट्रैपियर पर गलतबयानी का आरोप लगाया है. बुधवार को पार्टी ने यह दावा किया कि यह सौदा दो सरकारों के बीच नहीं है क्योंकि इसके लिए बातचीत में फ्रांस की सरकार कहीं शामिल नहीं थी.

कांग्रेस ने कहा कि अगर यह सरकारों के बीच का समझौता है तो नरेंद्र मोदी सरकार और दसाल्ट को तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए. पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने पत्रकारों से कहा, 'सरकार जितनी भी कोशिश कर ले, सच को नहीं दबा सकती.' उन्होंने मंगलवार को न्यूज़ एजेंसी एएनआई को ट्रैपियर के दिए इंटरव्यू का हवाला देते हुए कहा, ‘दसॉ के सीईओ ने जो कहा है वो झूठ है. मैं तथ्यों के साथ उनकी गलतबयानी को साबित कर रहा हूं. 28 मार्च, 2015 को रिलायंस डिफेंस का गठन हुआ था. 24 अप्रैल, 2015 को इसकी इकाई रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर का गठन हुआ. अगर 24 अप्रैल से पहले एरिक ट्रैपियर को कंपनी के गठन का पता नहीं था तो फिर संयुक्त उपक्रम (जेवी) कैसा हुआ?’

सिब्बल ने कहा, ‘ट्रैपियर ने कहा है कि रिलायंस डिफेंस के पास जमीन थी, इसलिए उसके साथ सौदा किया गया. जबकि जून, 2015 में रिलायंस ने जमीन के लिए आवेदन किया था. 29 अगस्त, 2015 को जमीन आवंटित हुई. फिर दसॉ को अप्रैल में कैसे पता चला कि उनके पास जमीन थी?’

कपिल सिब्बल

कपिल सिब्बल

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘ट्रैपियर ने कहा कि एचएएल के पास जमीन नहीं थी, इसलिए उनके साथ संयुक्त उपक्रम नहीं किया? जबकि एचएएल ने बेंगलुरू हवाई अड्डे के निकट जमीन के लिए आवेदन किया था और उसके पास वहां पहले से बहुत सारी जमीन थी.’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘फ्रांस्वा ओलांद का बयान भी एक बड़ा तथ्य है. ट्रैपियर को सार्वजनिक रूप से कहना चाहिए कि ओलांद झूठ बोल रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘यह सरकारों के बीच का सौदा नहीं है क्योंकि फ्रांस में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. इस सौदे की बातचीत में ट्रैपियर और दसॉ के दूसरे अधिकारी थे जबकि भारत की तरफ से रक्षा मंत्रालय के अधिकारी थे. फ्रांस की सरकार को केवल मंजूरी देनी थी. जब फ्रांस की सरकार बातचीत में शामिल ही नहीं थी तो फिर यह सरकारों के बीच का समझौता कैसे हो गया?’

सिब्बल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री इस पर मौन हैं. अब सुप्रीम कोर्ट फैसला करेगा लेकिन तथ्य जनता के बीच आने चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी भ्रष्टाचार का मतलब आप जानते हैं. अगर आपने कसम खा ली है कि सच नहीं बताएंगे तो हमने भी कसम खाई है कि हम सच सामने लाकर मानेंगे.’

बता दें कि ट्रैपियर ने अपने इंटरव्यू में दावा किया है कि राफेल विमान सौदा में कुछ भी गलत नहीं है और यह साफ-सुथरा है.

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