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केजरीवाल और विश्वास की 'जंग' में बीजेपी के कूदने का मतलब क्या है....

केजरीवाल और कुमार विश्वास की तनातनी के बीच बीजेपी और कांग्रेस का उतर आना यह दिखाता है कि दोनों पार्टियां आम आदमी पार्टी के भीतर चल रही तनातनी में किस कदर रुचि रखती है

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi Updated On: Dec 29, 2017 12:46 PM IST

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केजरीवाल और विश्वास की 'जंग' में बीजेपी के कूदने का मतलब क्या है....

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कुमार विश्वास के बीच तनातनी रोचक और रोमांचक होती जा रही है. इस तकरार में धीरे से बीजेपी भी एंट्री मारती दिखाई दे रही है. बीजेपी की नेशनल आईटी सेल के इंचार्ज अमित मालवीय ने बड़ी चालाकी या कहें समझदारी से एक ट्वीट किया है. इसमें उन्होंने लिखा है कि अगर मीडिया रिपोर्ट्स पर भरोसा किया जाए तो जिन कुमार विश्वास की लोकप्रियता से अरविंद केजरीवाल को पावर मिली, उन्हें राज्य सभा के लिए अनदेखा किया जा रहा है.

दिलचस्प है कि मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से अमित मालवीय ने यह बात कही है. लेकिन साथ में जोड़ दिया है कि उनकी (कुमार विश्वास) वजह से ही केजरीवाल सत्ता तक पहुंचे. कुमार विश्वास की बीजेपी से नजदीकियों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है. यह बात लंबे समय से चलती रही है कि वो बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. हालांकि खुद कुमार विश्वास ने इन बातों का खंडन किया है. ऐसे समय में बीजेपी के आईटी सेल का इस तरह सामने आना एक बार फिर कयासों को बल देता है.

इस ट्वीट के जवाब में तमाम ट्वीट सामने आ रहे हैं. Altnew के संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने जवाब में गूगल एनालिसिस के जरिए इसका जवाब भी दिया है. उन्होंने अमित मालवीय के इस दावे को गलत बताया है कि कभी भी कुमार विश्वास की लोकप्रियता अरविंद केजरीवाल से ज्यादा थी. वो साबित करना चाहते हैं कि कुमार विश्वास की वजह से केजरीवाल को सत्ता मिली हो, यह सच नहीं है. उन्होंने पांच साल का डाटा शेयर किया है. इस ग्राफ से साफ होता है कि सर्च वॉल्यूम के लिहाज से अरविंद केजरीवाल हमेशा ही कुमार विश्वास से बहुत आगे रहे हैं.

लोकप्रियता में कौन आगे है, इस बहस से आगे निकलें, तो भी अमित मालवीय का ट्वीट महज एक ट्वीट नहीं है. याद कीजिए, चंद रोज पहले अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया था. इसमें वो कांग्रेस का समर्थन करते दिखे थे.

गुजरात चुनाव के वक्त भी केजरीवाल ने कहा था कि उस उम्मीदवार को वोट दें, जो बीजेपी को हरा सके. जाहिर तौर पर इसे कांग्रेस के समर्थन से जोड़कर देखा गया. उसके बाद जब मेट्रो लाइन का उद्घाटन हुआ और उसमें अरविंद केजरीवाल को नहीं बुलाया गया, तो उनके समर्थन में कांग्रेस के अजय माकन ने ट्वीट कर दिया. अब बीजेपी के राष्ट्रीय आईटी सेल के प्रमुख कुमार विश्वास की अहमियत बता रहे हैं.

ऐसे में धीरे-धीरे कुमार विश्वास बनाम अरविंद केजरीवाल की जंग में बीजेपी और कांग्रेस भी हिस्सा बनते जा रहे हैं. ये तनातनी और रोचक होने की उम्मीद है. इस वक्त राज्यसभा में आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार कौन होगा, इसे लेकर चर्चा है. माना जा रहा है कि कुमार विश्वास को किनारे कर दिया गया है. इसके बाद कुमार विश्वास समर्थक गुरुवार से पार्टी मुख्यालय में डेरा जमाए हुए हैं. इसी को लेकर कुमार विश्वास ने ट्वीट भी किया था. इस ट्वीट में एक तरह उन्होंने खुद को अभिमन्यु करार दिया था. महाभारत में अभिमन्यु को कौरवों ने चक्रव्यूह में फंसा कर मारा था. कुमार विश्वास ने ट्वीट किया कि मरने के बावजूद अभिमन्यु विजेता था. ऐसे में वो खुद की शहादत का मैदान तैयार कर रहे हैं. यह इसीलिए हो रहा है, क्योंकि उन्हें अब राज्यसभा भेजे जाने की उम्मीद नहीं है.

इन दोनों की तनातनी के बीच बीजेपी और कांग्रेस का उतर आना यह दिखाता है कि दोनों पार्टियां आम आदमी पार्टी के भीतर चल रही तनातनी में किस कदर रुचि रखती है. केजरीवाल और कुमार विश्वास की तनातनी क्या शक्ल लेगी, वो तो एक सवाल है ही. लेकिन ज्यादा बड़ी बात अब ये है कि इन दोनों की लड़ाई में बीजेपी और कांग्रेस किस तरह की भूमिका अदा करती हैं.

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