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योगी ने दिखाया पद्मावत रिलीज़ का जिगर, दूसरे राज्यों को दिखा ‘सियासी जौहर’ का डर

योगी का ये ही मास्टरस्ट्रोक साबित करता है कि यूं ही नहीं कोई संन्यासी सियासत में उतर कर सीएम बन जाता है

Updated On: Jan 25, 2018 05:40 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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योगी ने दिखाया पद्मावत रिलीज़ का जिगर, दूसरे राज्यों को दिखा ‘सियासी जौहर’ का डर
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फिल्म ‘पद्मावती’ से शुरू हुआ विवाद नाम बदलकर ‘पद्मावत’ होने तक भी ठंडा नहीं पड़ सका. देश भर में करणी सेना और राजपूत समाज की तरफ से विरोध और प्रदर्शन दिखाई दे रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के फिल्म रिलीज करने के आदेश के बावजूद मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों में सिनेमाघर मालिक फिल्म दिखाने का ‘जौहर’ नहीं दिखा पा रहे हैं.

इसकी बड़ी वजह असुरक्षा का भय है. ये भय राज्य सरकारों को दूर करना चाहिए. लेकिन वो राज्य सरकारें खुद अज्ञात भय से ग्रसित हैं. तभी उन्होंने बिना फिल्म पद्मावत देखे ही रिलीज़ पर बैन लगा कर विरोध की आग में घी डालने का काम किया था. अब जब कि सुप्रीम कोर्ट में चार राज्यों के खिलाफ अवमानना की याचिका दाखिल की गई है तो हरियाणा सरकार दलील दे रही है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि हिंसा इतनी भड़केगी.

Padmaavat Map(hindi)

जिन 4 राज्यों में पद्मावत रिलीज नहीं हो सकी वो बीजेपी शासित हैं. बीजेपी शासित 4 राज्यों ने फिल्म पर बैन भी लगाया था. लेकिन बीजेपी शासित राज्यों में एक अलग राज्य उत्तर प्रदेश भी है. यूपी के सीएम आदित्यनाथ खुद भी राजपूत समाज से आते हैं. योगी के साथ कट्टर हिंदुत्व की पहचान जुड़ी हुई है. योगी आदित्यनाथ ने भी शुरुआत में फिल्म के विवाद के बढ़ने पर 1 दिसंबर की रिलीज पर यूपी में रोक लगाई थी. लेकिन बाद में उन्होंने भी सेंसर से फिल्म के पास होने के बाद यूपी में फिल्म दिखाने का फैसला किया. जबकि यूपी के ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने फिल्म के दृश्यों में कांट-छांट को जरूरी बताते हुए बैन का समर्थन किया था.

लेकिन अपनी छवि से उलट योगी अकेले सीएम निकले जिन्होंने फिल्म पद्मावत को बैन करने से इनकार कर दिया. योगी ने एलान किया कि ‘यूपी में फिल्म रिलीज होगी और अब आखिर ऐसा क्या है कि फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाए’.कहने वाले कह सकते हैं कि यूपी में चुनाव नहीं हैं इसलिए योगी ने फिल्म का प्रदर्शन नहीं रोका.

VP-SinghIBN

वी पी सिंह

भले ही यूपी में हाल फिलहाल चुनाव नहीं हैं लेकिन देश की राजपूत आबादी का बड़ा हिस्सा यूपी में भी है. यूपी में राजपूत 8 फीसदी हैं. देश की राजनीति के नामी चेहरे यूपी के राजपूत समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ, गृहमंत्री और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व सीएम वीर बहादुर सिंह, पूर्व पीएम विश्वनाथ प्रताप सिंह, सरधना से विधायक संगीत सोम, राजा भैया, अमर सिंह जैसे तमाम नाम यूपी में राजपूत राजनीति का अक्स हैं.

लेकिन योगी आदित्यनाथ ने फिल्म रिलीज के चलते राजपूत विरोध की परवाह नहीं की. हालांकि 1 दिसंबर को फिल्म की रिलीज पर योगी ने शांति भंग होने की आशंका जरूर जताई थी. इसके बावजूद उन्होंने 25 जनवरी की तारीख को फिल्म की रिलीज के नाम कर दिया. योगी के फैसले की गूंज सुप्रीम कोर्ट में भी सुनाई पड़ी. जब चार राज्यों में फिल्म के बैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई तो सुप्रीम कोर्ट ने भी बैन लगाने वाली राज्य सरकारों को यूपी सरकार का हवाला दिया और कहा कि जब यूपी सरकार हालात पर नियंत्रण कर सकती है तो बाकी सरकारें क्यों नहीं? योगी का ये ही मास्टरस्ट्रोक साबित करता है कि यूं ही नहीं कोई संन्यासी सियासत में उतर कर सीएम बन जाता है.

Modi-Yogi

मध्यप्रदेश में फिल्म पद्मावत पर राजनीति अलग ही दिशा में बढ़ गई. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सबसे पहले फिल्म पद्मावत को बैन करने का एलान किया था. उन्होंने महरानी पद्मावती को राष्ट्रमाता कहते हुए पद्मावती स्मारक और पुरस्कारों का एलान भी कर दिया. दिलचस्प ये है कि आखिर पद्मावती पुरस्कार के एलान में शिवराज को 14 साल क्यों लग गए? क्या इसकी वजह सिर्फ इतनी भर है कि मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं?

Vasundhara Raje

राजस्थान सरकार ने भी बैन का एलान किया था और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने में वो करणी सेना के सामने सरेंडर की मुद्रा में नजर आ रही है. राजस्थान सरकार की सियासी मजबूरी को समझा जा सकता है. राजपूतों के आन-बान-शान के राज्य में अगर उनकी आस्था आहत होगी तो प्रतिरोध फिर प्रतिशोध की शक्ल में सड़कों पर उतरेगा.

करणी सेना ने फिल्म के रिलीज़ के पहले ही ऐलान कर दिया था कि इसके नतीजे भुगतने पड़ेंगे. करणी सेना जो उत्पात कर रही है वो अचानक नहीं हुआ है. ये विवाद खिंचते-खिंचते तोड़फोड़ और आगजनी के मोड़ पर पहुंचा है. फिल्म के शुरुआती विवाद उठने के वक्त सीएम वसुंधरा ने सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी को फिल्म के दृश्यों को काटने के बाद ही रिलीज करने लिए पत्र लिखा था. लेकिन सिर्फ पत्र लिखना भर या फिर बैन लगाना ही वास्तविक समस्या का हल नहीं था. पद्मावत पर भारी विरोध को देखते हुए फिल्म के रिलीज के पहले राज्य सरकार खुद भी राजपूत समाज के नुमाइंदों के साथ फिल्म का प्रिव्यू कर सकती थी. शायद उस प्रिव्यू से फिल्म से जुड़े ‘अनदेखे और बहुत सुने’ विवादों का तीन घंटे में ही ‘द एंड’ हो गया होता.

Lucknow: Rajput Karni Sena patron Lokendra Singh Kalvi addresses a press conference in Lucknow on Monday regarding the release of film 'Padmaavat'. PTI Photo by Nand Kumar (PTI1_22_2018_000166B)

वैसे भी राजस्थान में राजपूत समाज वसुंधरा का सबसे बड़ा समर्थक है. राजस्थान में 8 से 10 प्रतिशत राजपूत आबादी है. इन्हें कट्टर राष्ट्रवादी माना जाता है. राजस्थान में राजपूत बीजेपी के कोर वोटर माने जाते हैं. राजस्थान विधानसभा में 28 राजपूत विधायक हैं तो राजस्थान से 3 राजपूत संसद में मौजूद हैं. राजपूतों और उपसमुदायों से बनी करणी सेना और राजपूत सभा के लिए वसुंधरा महारानी से कम नहीं. इसके बावजूद वसुंधरा फिल्म के विवाद को लेकर किसी के साथ न्याय नहीं कर सकी हैं.

पद्मावत के रिलीज के पहले दिन राजस्थान की हिंसा और फिल्म का रिलीज न हो पाना कई सवाल खड़े करता है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि संविधान के आर्टिकल 21 के तहत राज्यों में कानून व्यवस्था बनाए रखना,लोगों को जीवन जीने और स्वतंत्रता का अधिकार देना राज्यों का संवैधानिक दायित्व है.

सवाल उठता है कि फिल्म पद्मावत से भड़की हिंसा के नाम पर कौन से सियासी समीकरण साधे जा रहे हैं? क्या ये चुप्पी ठीक उसी तरह है जिस तरह हरियाणा में जाट आंदोलने के वक्त खट्टर सरकार के सारे दावे फेल हो गए थे?  या फिर कानून व्यवस्था संभालने में ये कमजोरी ठीक वैसी है जैसा हरियाणा में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम की गिरफ्तारी के बाद हिंसा भड़की थी.

सवाल कई हो सकते हैं लेकिन सारे सवालों की सुई आखिर में सियासत पर जा कर ही टिकती है. इसी सियासत की वजह से राजनीतिक दलों की चुप्पी पर ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ और करणी सेना का ‘हल्ला बोल’ भारी पड़ रहा है. लेकिन राजनीति के एक योगी ने राह भी दिखाई है जिस पर चलना सत्ता के मोहपाश में बंधे सियासदां के लिए मुमकिन नहीं.

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