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पोक्सो मामलों की सुनवाई तेज करें सभी हाई कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट बच्चों से यौन हिंसा से संबंधित मुकदमों की सुनवाई की निगरानी के लिए तीन न्यायाधीशों की समिति गठित कर सकते हैं

Bhasha Updated On: May 01, 2018 06:23 PM IST

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पोक्सो मामलों की सुनवाई तेज करें सभी हाई कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों से संबंधित यौन हिंसा के मुकदमों की सुनवाई के संबंध में सभी हाई कोर्ट को मंगलवार को अनेक निर्देश दिए. इसमें सभी हाई कोर्ट से कहा गया है कि निचली अदालतों को पोक्सो कानून के तहत लंबित मामलों में अनावश्यक सुनवाई स्थगित नहीं करने का निर्देश दिया जाए.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने सभी हाई कोर्ट को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि विशेष अदालतों द्वारा बच्चों से यौन हिंसा के मुकदमों की सुनवाई तेजी से करके उनका फैसला करें.

शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट को निचली अदालतों को यह निर्देश देने के लिए कहा है कि वे यौन अपराध से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) कानून के तहत लंबित मुकदमों की सुनवाई स्थगित करने की अनावश्यक इजाजत नहीं दें.

पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट बच्चों से यौन हिंसा से संबंधित मुकदमों की सुनवाई की निगरानी के लिए तीन न्यायाधीशों की समिति गठित कर सकते हैं.

कोर्ट ने अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव की जनहित याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया. श्रीवास्तव ने राजधानी के नेताजी सुभाष पार्क के निकट एक बस्ती में 28 वर्षीय रिश्तेदार द्वारा आठ महीने की बच्ची से कथित बलात्कार के मामले में याचिका दायर की थी.

केंद्र ने भी जारी किया है अध्यादेश

नवजात शिशुओं और नाबालिग बच्चियों से बलात्कार की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 21 अप्रैल को ऐसे अपराधों के कानून में कठोर प्रावधान करते हुए एक अध्यादेश को मंजूरी दी थी. इसमें 12 साल से कम आयु की बच्चियों से बलात्कार के अपराध में मौत की सजा का भी प्रावधान किया गया है.

श्रीवास्तव ने भी अपनी याचिका में इस तरह के अपराध के लिए मौत की सजा का प्रावधान करने और ऐसे अपराधों की जांच छह महीने के भीतर पूरी करने के लिए दिशा-निर्देश बनाने का अनुरोध किया था.

दिल्ली के मामले में पुलिस ने दावा था कि आरोपी ने शराब के नशे में बच्ची से बलात्कार करना कबूल किया है.

इस बच्ची के माता पिता अपनी बच्ची को अपनी एक रिश्तेदार के पास छोड़कर काम पर जाते थे. एक रविवार जब उस रिश्तेदार का बेटा घर पर अकेला था तो उसने कथित रूप से बच्ची से दुष्कर्म किया.

काम से जब मां घर लौटी तो उसने पीड़ित के कपड़ों पर खून के निशान देखे और उसने अपने पति को सूचित किया और वे बच्ची को अस्पताल ले गए जहां उसके साथ यौन हिंसा किए जाने का पता चला.

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