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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018: इन नेताओं की परफॉरमेंस तय करेगी सियासी पार्टियों का भविष्य

छत्तीसगढ़ की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं जिनकी चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है. इनकी हार-जीत पार्टी और राज्य के सियासी समीकरणों के लिए काफी मायने रखती है

Updated On: Dec 10, 2018 05:52 PM IST

Rituraj Tripathi Rituraj Tripathi

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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018: इन नेताओं की परफॉरमेंस तय करेगी सियासी पार्टियों का भविष्य

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजे आने में अब बहुत कम समय रह गया है. ऐसे में सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. चर्चा यह कि क्या सीएम रमन सिंह अपना सियासी किला बचा पाएंगे या जीत की उम्मीद में छटपटा रही कांग्रेस, बाजी को अपने नाम करेगी.

बीजेपी बीते 15 सालों से इस राज्य में शासन कर रही है, ऐसे में अगर कांग्रेस को सकारात्मक परिणाम मिलते हैं तो यह कांग्रेस के लिए घर वापसी होगी जो 2019 के लोकसभा चुनावों में संजीवनी का काम करेगी. दोनों ही दलों की ओर से सीएम पद की कुर्सी के लिए सियासी समीकरणों पर गुणाभाग किया जा रहा है.

छत्तीसगढ़ की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं जिनकी चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है. इनकी हार-जीत पार्टी और राज्य के सियासी समीकरणों के लिए काफी मायने रखती है. एक तरफ बीजेपी के सामने अपने 15 साल के शासन को सिद्ध करने की चुनौती है वहीं कांग्रेस के लिए खोई हुई सत्ता की चाबी हासिल करना एक बड़ी जंग है. इन नेताओं की साख दांव पर लगी है..

डॉ. रमन सिंह

डॉ रमन सिंह छत्तीसगढ़ बीजेपी के कद्दावर नेता हैं. वह बीते 15 सालों से छत्तीसगढ़ के सीएम हैं और बीजेपी को इस राज्य में मजबूत आधार देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है. रमन सिंह ने अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत भारतीय जनसंघ से की थी. वह 1990 और 1993 में मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे हैं और 1999 में लोकसभा के सदस्य रहे.

बाजपेयी सरकार में वह राज्य मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2003 से वह लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीते हैं, तब से लेकर अब तक छत्तीसगढ़ के सीएम के रूप में उन्होंने बीजेपी को एक नई दिशा दी है.

अगर इन चुनावों में रमन सिंह को सफलता मिलती है तो उनके नाम चार बार लगातार सीएम बनने का रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा लेकिन अगर वह हारे तो बीजेपी का तीन कार्यकाल में बनाया गया किला छत्तीसगढ़ में ध्वस्त हो जाएगा जिसका खामियाजा 2019 के लोकसभा चुनावों में भी पड़ सकता है.

ब्रजमोहन अग्रवाल

ब्रजमोहन अग्रवाल को छत्तीसगढ़ बीजेपी में दूसरी पंक्ति का नेता माना जाता है. वह कृषि एवं सिंचाई मंत्री हैं. इसके अलावा उनके पास छत्तीसगढ़ कैबिनेट में कई मंत्रालय हैं. छत्तीसगढ़ में लोग उन्हें मोहन भईया के नाम से पुकारते हैं.

अग्रवाल एबीवीपी का प्रतिनिधित्व करते हुए 1977 में राजनीति में आए थे. 1990 में वह पहली बार मध्य प्रदेश से विधायक बने. 1993 में दूसरी और 1998 में वह तीसरी बार विधायक बने. 2005 में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया. वह अब तक 6 बार विधायक रहे हैं.

ऐसे में देखना होगा कि क्या ब्रजमोहन अग्रवाल सातवीं बार विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी साख बचा पाएंगे या इन चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ेगा. अग्रवाल को बीजेपी में एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता है जिसने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों ही राज्यों में तीन-तीन बार विधानसभा चुनाव जीता. उनकी अपने राज्य की जनता पर अच्छी पकड़ मानी जाती है.

अजीत जोगी

1 नवंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ एक नया राज्य बना था तब उसके पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी थे. वह कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं लेकिन 2016 में कांग्रेस से बगावत करके उन्होंने नई पार्टी 'जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़' बना ली.

जोगी आईपीएस और आईएएस भी रहे हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि वह एक ऐसे नेता हैं जिनकी रणनीति के सामने बड़े-बड़े शूरमा ढेर हो जाते हैं. जोगी संसद के दोनों सदनों के सदस्य रहे हैं. जून 2007 में वह सुर्खियों में आए थे जब उनके बेटे को एनसीपी ट्रेजरर राम अवतार जग्गी के मर्डर मामले में गिरफ्तार किया गया था.

जोगी पर बीजेपी के कुछ विधायकों को रिश्वत देने के आरोप भी लगे थे. बीजेपी ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने जोगी को बचाने के लिए सीबीआई का दुरुपयोग किया. कांग्रेस और बीजेपी से इतर जोगी की पार्टी क्या करिश्मा करके दिखाती है, यह तो वक्त ही बताएगा.

अमित जोगी

अमित जोगी छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रमुख अजीत जोगी के बेटे हैं. उन्होंने 2013 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी प्रत्याशी को 46250 वोटों के अंतर से हराया था.

अमित जोगी और उनके पिता को कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के मद्देनजर पार्टी से निष्कासित कर दिया था जिसके बाद जोगी ने खुद की पार्टी को चुनावों में उतार दिया.

आर्थिक कठिनाइयों से लड़ रही जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का इस चुनाव में जीतना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि जोगी परिवार की साख दांव पर लगी हुई है. अगर यह परिवार चुनाव हार जाता है तो पार्टी को जीवित रखना बहुत मुश्किल हो जाएगा. हालांकि जोगी परिवार दिल्ली में AAP की तरह ऑनलाइन चंदा मांगकर पार्टी को ऑक्सीजन देने की कोशिश कर रहा है.

टीएस सिंहदेव

त्रिभुवनेश्वर सरन सिंह देव यानी टीएस सिंहदेव छ्त्तीसगढ़ कांग्रेस के बड़े नेता हैं. वह छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं. 2013 के विधानसभा चुनावों के मुताबिक वह सबसे धनी विधानसभा सदस्य हैं. इसके अलावा वह सरगुजा रियासत के राजा भी हैं.

इन चुनावों में टीएस सिंहदेव के सामने चुनौती है कि कांग्रेस हर हालत में सत्ता में आए. क्योंकि बीजेपी बीते 15 सालों से लगातार राज्य में सत्ता पर काबिज है. अगर कांग्रेस हार जाती है तो यह पार्टी के लिए बहुत शर्मनाक होगा क्योंकि उसका वनवास 15 साल से बढ़कर 20 साल हो जाएगा. इसके अलावा 2019 के लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस को इस हार का खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

हालांकि टीएस सिंहदेव का कहना है कि इन चुनावों में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना रही है. उन्होंगे जोगी के साथ गठबंधन के मुद्दे पर कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो वह ऐसी सरकार का हिस्सा नहीं रहेंगे.

भूपेश बघेल

भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं. उनके लिए यह चुनाव बहुत महत्व रखता है. 15 सालों से वनवास काट रही कांग्रेस को इस चुनाव में अगर सफलता नहीं मिलती है तो भूपेश बघेल की साख पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा.

हालही में बघेल ने आशंका जताई थी कि आखिरी समय में बीजेपी ईवीएम बदल सकती है. बीजेपी पूरी तैयारी में है कि कैसे वोटिंग में गड़बड़ी की जाए. उन्होंने कहा था कि सत्ता पाने के लिए बीजेपी कुछ भी कर सकती है.

बघेल ने यह भी कहा था कि बीजेपी कांग्रेस विधायकों को खरीदने की कोशिश भी कर सकती है. हालांकि यह देखने वाली बात होगी कि आरोप-प्रत्यारोप के सियासी गणित में किसे फायदा होता है और कौन नुकसान उठाता है.

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