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क्या छत्तीसगढ़ के 'कुमारस्वामी' बन पाएंगे पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे अमित जोगी?

चुनाव से ठीक पहले मायावती ने अजीत जोगी की पार्टी से गठबंधन कर लिया, बीएसपी सुप्रीमो ने कर्नाटक में भी जेडीएस से गठबंधन किया था और निर्णायक भूमिक में रहीं

Updated On: Nov 02, 2018 11:26 AM IST

Abhishek Tiwari Abhishek Tiwari

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क्या छत्तीसगढ़ के 'कुमारस्वामी' बन पाएंगे पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे अमित जोगी?
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इसी साल भारत के दक्षिण में स्थित राज्य कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हुआ था. आने वाले दिनों में मध्य भारत में स्थित एक राज्य में चुनाव होने वाला है. तारीख का ऐलान हो चुका है. तारीख को देख चर्चाएं भी हो रही हैं, फैसले भी दिए जा रहे हैं और उम्मीद भी लगाई जा रही है. भारतीय राजनीति में यह होना आम बात है. यह होता आया है और होता रहेगा. लेकिन दक्षिण भारत से मध्य भारत के चुनाव को जोड़ना कोई फसाना नहीं बल्कि हकीकत को जोड़ने जैसा है.

भारतीय राजनीति में रुचि रखने वाले लोगों को यह जरूर याद होगा कि इस साल दक्षिण भारत के एक राज्य कर्नाटक में चुनाव हुआ था. इस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और उनके बेटे एचडी कुमारास्वामी की पार्टी जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी (बीएसपी) से गठबंधन किया था. अब जिस राज्य में चुनाव हो रहा है, वहां भी एक सफल पिता की पार्टी, जिसकी कमान अब बेटा संभाल रहा है, से मायावती की पार्टी ने गठबंधन कर लिया है.

अब तक की कहानी से आप समझ गए होंगे कि बात किसकी हो रही है. अगर अब भी नहीं समझें तो मैं बता दे रहा हूं. बात छत्तीसगढ़ की हो रही है और मायावती ने जिस पार्टी से गठबंधन किया है उसका नाम है छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (सीजेसी). कांग्रेस से निकाले जाने के बाद राज्य के पहले मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता रहे अजीत जोगी ने इस पार्टी को बनाया था. अब उनके बेटे अमित जोगी इस पार्टी के भविष्य हैं.

छत्तीसगढ़ और कर्नाटक चुनाव को जोड़ने की वजह

इन दोनों राज्यों में टक्कर सिर्फ दो बड़ी पार्टियों के बीच थी. त्रिशंकु विधानसभा होने या जोड़-तोड़ की स्थिति में इन दोनों पार्टियों का महत्व एक जैसा है. यानी किंगमेकर की भूमिका में होना. कर्नाटक में यही हुआ और पूर्ण बहुमत से कुछ कदम दूर रह गई कांग्रेस को जेडीएस से हाथ मिलाना पड़ा और कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने.

कर्नाटक में जेडीएस से हाथ मिलाने वाली बीएसपी ने छत्तीसगढ़ में एन वक्त पर ऐलान कर दिया कि वह अजीत जोगी के साथ गठबंधन करने जा रही है. 15 साल से सत्ता का सुख भोग रहे रमन सिंह के लिए यह खबर किसी संजीवनी से कम नहीं रही होगी. लेकिन राज्य में हालात 15 सालों से एक जैसे नहीं हैं और बहुत कुछ बदला है.

कर्नाटक में जिस स्थिति में जेडीएस थी उस स्थिति की सीजेसी के साथ उम्मीद कम है क्योंकि छत्तीसगढ़ में कोई भी पार्टी में जीत-हार का अंतर कुछ खास नहीं होता है. लेकिन अगर ऐसी स्थिति हो गई तो छोटी पार्टियों का महत्व काफी बढ़ जाता है.

Photo Source: Ajit Jogi Facebook

Photo Source: Ajit Jogi Facebook

जैसे जेडीएस के सर्वेसर्वा अब कुमारस्वामी हैं, वैसे ही अमित जोगी का भी हाल हो गया है. इस बार के चुनाव में अजीत जोगी मैदान में नहीं है और उनका स्वास्थ्य भी सक्रिय राजनीति का इजाजत नहीं देता. अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी इस छत्तीसगढ़ चुनाव में काफी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं क्योंकि बीजेपी के लिए भी हालात राज्य में इस बार ठीक नहीं हैं. 15 साल से सरकार चला रहे रमन सिंह से अलग अब राज्य की जनता किसी को नेता चुनना चाहती है. ऐसे में अगर किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो अमित जोगी सबसे खास बन जाएंगे और अगली सरकार बनाने का सारा दारोमदार उन्हीं पर होगा.

अब जान लेते हैं, कौन हैं अमित जोगी

अमित जोगी की सर्वप्रथम और सबसे बड़ी पहचान यह है कि वो छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे हैं. अमित जोगी के जन्म स्थान, नागरिकता और तारीख तक पर कई सालों तक एक सोच नहीं बन पाई थी. फिर खुद अमित ने इन मामलों पर सफाई देकर बात को खत्म किया था.

अमित जोगी ने कहा था कि उनका जन्म अमेरिका के डालास में हुआ है और भारत की नागरिकता तत्कालीन गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने 2002 में दिलवाई थी. उनके जन्म दिन को लेकर भी संशय था, जिसे उन्होंने दूर करते हुए बताया कि वो 7 अगस्त 1977 को पैदा हुए थे.

अमित जोगी भारत के प्रतिष्ठित दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज के छात्र रहे हैं. यहां से उन्होंने ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की थी. बाद में अमित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पॉलिटिक्स और इंटरनेशनल स्टडीज में शिक्षा ग्रहण की. इसके अलावा रायपुर की एक यूनिवर्सिटी से उन्होंने एलएलबी की डिग्री भी हासिल की है.

अमित पहली बार 2013 में मरवाही से छत्तीसगढ़ विधानसभा पहुंचे थे. उस समय उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को राज्य में सबसे ज्यादा मतों से हराया था. इस बार का चुनाव अमित जोगी के लिए किसी लिटमस टेस्ट से कम नहीं. खुद की सीट बचाने लेकर पार्टी के लिए कुछ नया कर गुजरने का मामला भी तो सामने है.

किसके साथ जाएगा जोगी परिवार

बीजेपी राज्य में 15 सालों से सत्ता में है. उससे पहले अजीत जोगी की सरकार हुआ करती थी. लेकिन अब तक राज्य में नहीं हुए कार्यों के लिए रमन सरकार यानी चाउर बाबा से सवाल पूछा जाने लगा है. ऐसे में अगर मौका किंग मेकर बनने का आया तो अजीत-अमित जोगी किस पाले बैठेंगे इस पर अंदाजा लगाना मुश्किल है.

ajit jogi

उनके पास ये बात भी होगी कि नई पार्टी को चलाना है और लोगों तक पहुंचना है तो वो किसी से भी हाथ मिला सकने के लिए तैयार होंगे और वे यह कर भी सकते हैं. कौन नहीं चाहता कि उनकी पार्टी के लोग मंत्रिपरिषद में शामिल हों. क्योंकि ऐसा होने से पार्टी को भी लाभ होगा. जिस पार्टी के लोग सरकार में रहेंगे उन्हें अपने दल को जमीन पर बड़ा करने का पर्याप्त मौका होगा. इसका लाभ हर कोई लेना चाहता है तो फिर जोगी परिवार भी इससे पीछे नहीं हटेगा. सवाल पार्टी के साथ-साथ अमित जोगी के भविष्य का भी है.

दो चरण में होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में अगर राज्य के मतदाताओं ने कुछ और तय कर रखा है तो कोई बात नहीं. अगर स्थिति जोड़ तोड़ की आई तो जोगी परिवार बड़ा खेल करने के लिए तैयार बैठा हुआ है.

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