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छठ व्रत को लेकर सोनिया गांधी पर दिया मनोज तिवारी का वक्तव्य बेहद क्रूर है

मनोज तिवारी के हालिया बयान ने राहुल गांधी को एक चुनावी मुद्दा दे दिया है जिसे वह बीजेपी के खिलाफ हथियार बनाकर भुनाने की पूरी कोशिश कर सकते हैं

Updated On: Nov 12, 2018 05:57 PM IST

FP Staff

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छठ व्रत को लेकर सोनिया गांधी पर दिया मनोज तिवारी का वक्तव्य बेहद क्रूर है

छठ पूजा बिहार और पूर्वांचल के लोगों लिए बेहद आस्था का विषय है. लोगों की आस्था इस लोकपर्व में कुछ इस तरीके की है कि इस पूजा को लेकर हंसी-मजाक भी नहीं किया जाता. इस छठ के व्रत में पवित्रता को बेहद महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है. लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप की राजनीति ऐसी है कि बिना धर्म का सहारा लिए इसका काम नहीं चलता है. छठ जैसे पवित्र पर्व को इस बार राजनीतिक हथियार के रूप में भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इस्तेमाल किया है. मनोज तिवारी ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी पर छठ की आड़ लेकर कटाक्ष किया है. मनोज तिवारी ने कहा है कि अगर सोनिया गांधी ने छठ का व्रत किया होता तो उनका बच्चा भी बुद्धिमान होता!

मनोज तिवारी का बयान ऐसे समय में आया है जब सभी सियासी पार्टियां आने वाले चुनावों के लिए जनता को लुभाने की पूरी कोशिश कर रही हैं. ऐसे में मनोज तिवारी छठ पूजा के नाम पर सियासी जुमला तैयार करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं. बीजेपी के पास पहले ही जुमलों की कोई कमी नहीं है. ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कई मौकों पर ऐसा कहते हुए सुने गए हैं.

मनोज तिवारी के हालिया बयान ने राहुल गांधी को एक चुनावी मुद्दा दे दिया है जिसे वह बीजेपी के खिलाफ हथियार बनाकर भुनाने की पूरी कोशिश कर सकते हैं. यह पहली बार नहीं है जब राहुल की मां और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष को लेकर सियासी बयानबाजी हुई हो. इससे पहले भी सोनिया गांधी को लेकर सियासी बयानबाजी होती रही है जिसका खूब मुद्दा भी बना है. साल 2004 में जब सोनिया गांधी के पीएम बनने की बात आई थी तो उस समय बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज का अजीबोगरीब बयान आज भी लोगों की याद में तारी है. सुषमा स्वराज ने तब कहा था कि अगर सोनिया गांधी भारत की पीएम बन जाएंगी तो मैं अपने बाल कटवा लूंगी और सन्यासी का जीवन व्यतीत करूंगी.

Sushma Swaraj

हालांकि इस बार यह मुद्दा इसलिए ज्यादा गरमा गया है क्योंकि छठ बिहार समेत कई राज्यों में प्रमुखता से मनाया जाने वाला पर्व है. क्या ये बयान देते समय मनोज तिवारी के जेहन में इस बात का खयाल आया होगा कि भारत के ही जिन इलाकों में छठ व्रत नहीं मनाया जाता क्या वहां के लोग बुद्धिमान नहीं होते! आस्था और बुद्धिमत्तता का ये कैसा बेमेल संबंध स्थापित किया गया है!

मनोज तिवारी जिस पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष हैं उसी पार्टी में ऐसे नेता बड़ी संख्या में भरे हैं जिनका ताल्लुक ऐसे इलाकों से है जहां छठ पर्व नहीं मनाया जाता. तो क्या देश के उन इलाकों से ताल्लुक रखने वाले बीजेपी के नेता बुद्धिमान नहीं होते. ऐसे नेताओं में हमारे देश के प्रधानमंत्री से लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेता शामिल हैं. ये नेता कम से कम मनोज तिवारी की नजर में तो बुद्धिमान होंगे ही. तो क्या इन नेताओं के बारे में भी मनोज तिवारी ऐसी ही कोई बात कहेंगे? बिल्कुल नहीं.

दरअसल मनोज तिवारी भी यूपी-बिहार में छठ के प्रति लोगों की आस्था से पूरी तरह वाकिफ हैं. ये बयान ही इसलिए दिया गया जिससे साबित किया सके कि कांग्रेस की धर्म में आस्था नहीं है. लेकिन इस बात को कहने के चक्कर में मनोज तिवारी एक आत्मघाती बयान दे गए. उन्होंने एक ऐसा बयान दे दिया जो सिर्फ राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी पर नहीं लागू होता है बल्कि ये बीजेपी के भी शीर्ष नेताओं पर लागू होता है जो यूपी-बिहार से ताल्लुक नहीं रखते.

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