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जातीय समीकरण दुरुस्त करने के लिए चंद्रबाबू नायडू ने खोला सरकारी खजाना

आंध्र प्रदेश में जातीय समीकरण को अपने पक्ष में करने की होड़ मची है. जगन मोहन रेड्डी ने जहां बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं, तो चंद्रबाबू नायडू दोनों हाथों से सरकारी खजाने से पैसा खर्च कर रहे हैं

Updated On: Feb 16, 2019 09:25 AM IST

SANJAY TIWARI

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जातीय समीकरण दुरुस्त करने के लिए चंद्रबाबू नायडू ने खोला सरकारी खजाना

आंध्र प्रदेश में जातीय समीकरण को अपने पक्ष में करने की होड़ मची है. जगन मोहन रेड्डी ने जहां बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं, तो चंद्रबाबू नायडू दोनों हाथों से सरकारी खजाने से पैसा खर्च कर रहे हैं. पहले बात चंद्रबाबू नायडू की क्योंकि आंध्र प्रदेश में उनकी सरकार है. पिछड़ी जाति के वोटर्स को लुभाने के लिए नायडू ने तोहफों की बरसात कर दी है. इसके अलावा सामान्य जाति में आने वाले कापू वोटर्स को भी नायडू अपने तरफ लुभाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं. आंध्र प्रदेश में कापू समाज के करीब 20 फीसदी और पिछड़े वर्ग के 39 प्रतिशत वोट हैं.

पिछले एक महीने के चंद्रबाबू नायडू सरकार के गवर्नमेंट ऑर्डर्स पर नजर डालें तो 1 जनवरी से 11 फरवरी के बीच पिछड़ी जाति के 216 कम्युनिटी हॉल और मैरिज कन्वेंशन सेंटर्स बनाने की मंजूरी दी गई है. इस पर करीब 29 करोड़ रुपयों का खर्च आएगा. आंध्र प्रदेश में पिछड़े वर्ग के वोटर्स की ज्यादा संख्या प्रकाशम, श्रीकाकुलम, विजयनगरम, विशाखापट्टनम और अनंतपुर जिले में है. लिहाजा 216 में 148 कम्युनिटी हॉल इन्हीं 5 जिलों में बनाए जा रहे हैं.

बजट में पिछड़ा वर्ग कल्याण संघ के लिए 3000 करोड़ रुपए का अलग से प्रावधान किया गया है. अलग अलग जातियों के नाम वित्तीय संघ बनाने का आदेश दिया गया है. पिछले एक महीने में जाति आधारित ऐसे 14 वित्तीय संघों का गठन कर दिया गया है.

Chandrababu-Naidu

आंध्र में कापू समाज के लोग लंबे समय से पिछड़े वर्ग में शामिल करने की मांग करते रहे हैं. लेकिन 50 फीसदी आरक्षण की सीमा होने की वजह से नायडू सरकार कापू को आरक्षण नहीं दे सकी थी. हाल ही में केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर तबके को 10 फीसदी अतिरिक्त आरक्षण देने का फैसला लिया है. आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू ने तुरंत उस 10 फीसदी में से 5 फीसदी कोटा कापू समाज के लिए तय कर दिया.

कापू वोटर्स को लुभाने के लिए चंद्रबाबू नायडू ने 1 जनवरी से 11 फरवरी के बीच में 100 कापू भवनों के निर्माण की अनुमति दी है. इसके लिए कापू बाहुल्य विधानसभा इलाकों को खास तौर पर चुना गया है. 100 में से 45 भवन ईस्ट गोदावरी, वेस्ट गोदावरी, गुंटूर और कृष्णा जिले में बनाए जाएंगे. ये चारों जिले कापू बाहुल्य हैं.

फिल्म एक्टर से राजनेता बने पवन कल्याण कापू समाज से हैं. उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है. पवन कल्याण ने पिछले चुनाव में चंद्रबाबू नायडू का समर्थन किया था. पिछले चुनाव में बीजेपी और टीडीपी का गठबंधन था और देश में नरेंद्र मोदी की लहर थी. लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गई है.

पवन कल्याण की जनसेना पार्टी पहली बार चुनाव में उतरने जा रही है. राजनीतिक मामलों के जानकार प्रोफेसर बी. जमींदार के मुताबिक 'पवन कल्याण वोट काटेंगे. अगर वो लेफ्ट पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव में जाते हैं, तो उनका गठबंधन तीसरी शक्ति के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा और वो कापू समाज के काफी वोट काट देंगे'.

बीजेपी अध्यक्ष कन्ना लक्ष्मीनारायण भी कापू समाज से ताल्लुक रखते हैं और पार्टी कापू समाज के बड़े नेता मुद्रागड़ा पद्मनाभम को अपने पक्ष में करने में जुटी है. ऐसे में कापू समाज के वोटों के बंटने का खतरा खड़ा हो गया है. इसलिए चंद्रबाबू नायडू कापू समाज को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. उन्होंने बजट में कापू कल्याण संघ के लिए 1000 करोड़ रुपए का ऐलान किया है.

उधर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी रेड्डी वोटों के अलावा अनुसूचित जाति और जनजाति समाज के वोटों पर नजर गड़ाए हुए है. लेकिन आंध्र में अनुसूचित जाति और जनजाति के सिर्फ 15 फीसदी वोट हैं. ऐसे में सत्ता में आने के लिए पिछड़े वर्ग के वोट में सेंध लगाना जगन मोहन रेड्डी के लिए जरूरी होगा. जगन मोहन रेड्डी 17 फरवरी को वेस्ट गोदावरी जिले में पिछड़ा वर्ग गर्जना रैली करने जा रहे हैं. इसके लिए पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है. प्रस्तावित रैली में जगन पिछड़े वर्ग के लिए कई लुभावने वादे करने वाले हैं.

jagan mohan

वायएसआर रेड्डी की मौत के बाद से जगन मोहन रेड्डी कांग्रेस से बाहर हो गए थे और नई पार्टी का गठन किया था. वो पिछले 10 साल से सत्ता से बाहर हैं. इसलिए इस बार के चुनाव उनकी पार्टी के लिए जीवन मरण का प्रश्न बनकर खड़े हैं. वहीं चंद्रबाबू नायडू का तेलंगाना में सत्ता हासिल करने का सपना हाल ही में चूर हो चुका है अगर वो आंध्र प्रदेश में सत्ता से बाहर हो जाते हैं, तो अगले पांच साल उनके लिए कठिन वनवास के हो सकते हैं.

ऐसे में दोनों पार्टियां पूरा दम लगा रही हैं. लेकिन दक्षिण भारतीय राज्यों में चुनाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि कौन कितने धनबल का इस्तेमाल करता है और वोटर्स को लुभाने के लिए कौन ज्यादा चीजें फ्री में बांटता है. चुनाव में पैसा और शराब बांटने के आरोप भी नए नहीं हैं.

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