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क्रीमी लेयर के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण देने से इनकार नहीं कर सकते: केंद्र

अटॉर्नी जनरल ने बताया कि हालांकि समुदाय के कुछ लोग इससे उबर चुके हैं लेकिन फिर भी जाति और पिछड़ेपन का ठप्पा अभी भी उन पर लगा हुआ है

Updated On: Aug 16, 2018 01:39 PM IST

Bhasha

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क्रीमी लेयर के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण देने से इनकार नहीं कर सकते: केंद्र

केंद्र ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि क्रीमी लेयर के सिद्धांत को लागू कर अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय (एससी/एसटी) से आने वाले सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता. शीर्ष न्यायालय ने कहा कि जाति और पिछड़ेपन का ठप्पा अब भी समुदाय के साथ जुड़ा हुआ है.

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पांच जजों वाली और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ को बताया कि ऐसा कोई फैसला नहीं है जो यह कहता हो कि एससी/एसटी समुदाय के समृद्ध लोगों को क्रीमी लेयर सिद्धांत के आधार पर आरक्षण का लाभ देने से इनकार किया जा सकता है.

वेणुगोपाल से पूछा गया था कि क्या क्रीमी लेयर सिद्धांत को लागू करके उन लोगों को लाभ से वंचित किया जा सकता है जो इससे बाहर आ चुके हैं ताकि यह तय किया जा सके कि एससी/एसटी समुदाय के पिछड़े लोगों तक आरक्षण का लाभ पहुंच सके.

अटॉर्नी जनरल ने बताया कि हालांकि समुदाय के कुछ लोग इससे उबर चुके हैं लेकिन फिर भी जाति और पिछड़ेपन का ठप्पा अभी भी उन पर लगा हुआ है. पीठ में जस्टिस कुरियन जोसफ, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस इंदु मल्होत्रा भी हैं.

पांच जजों की पीठ यह देख रही है कि सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में ‘क्रीमी लेयर’ से जुड़े उसके 12 साल पुराने फैसले को सात सदस्यों की पीठ की ओर से फिर से देखने की जरूरत तो नहीं है.

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