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आंकड़ों की जुबानी: 2016 के बाद किसी किसान ने नहीं की आत्महत्या

NCRB की साइट पर 2015 तक के आंकड़े हैं. 2016 के बाद से NCRB की रिपोर्ट अभी तक नहीं पब्लिश नहीं हुई है

Updated On: Dec 20, 2018 04:00 PM IST

FP Staff

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आंकड़ों की जुबानी: 2016 के बाद किसी किसान ने नहीं की आत्महत्या

पिछले तीन साल में क्या देश में किसी किसान ने खुदकुशी की है. यह सवाल अगर आपसे पूछा जाए तो आपका जवाब हां हो सकता है. लेकिन यही सवाल जब केंद्र सरकार से पूछा जाए तो उसका जवाब ना हो सकता है.

असल में केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन साल में किसी किसान ने आत्महत्या नहीं की है. कृषि मंत्रालय ने संसद में कहा है कि कृषि संकट की वजह से जब किसान कर्ज में डूबे थे उस दौरान किसी किसान ने आत्महत्या नहीं की थी.

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कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने मंगलवार को संसद में बताया कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) में 2016 के बाद से किसी किसान की आत्महत्या का डेटा नहीं है. NCRB में क्राइम डाटा का संग्रह होता है.

कैसे हुआ खुलासा?

संसद में तृणमूल कांग्रेस के लीडर दिनेश त्रिवेदी ने जब राधामोहन सिंह से पूछा कि 2016 के बाद कितने किसानों ने खुदकुशी की है और उनके परिवार को दोबारा बसाने की क्या तैयारी है.

NCRB की साइट पर 2015 तक के आंकड़े हैं. 2016 के बाद से NCRB की रिपोर्ट अभी तक नहीं पब्लिश नहीं हुई है. मंत्री ने लिख कर यह दिया है कि सरकार देश के किसानों के लिए अहम कदम उठाएगी.

एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकारों ने किसानों की आत्महत्या के आंकड़े क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो को दे दिए हैं. एक अन्य सूत्र ने कहा, 'ये आंकड़े 2015 तक ही पब्लिश हुए हैं. लिहाजा कृषि मंत्रालय सिर्फ उन्हीं आंकड़ों के हिसाब से जवाब दे रही है.'

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