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जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ सीजफायर खत्म: राजनाथ

जितेंद्र सिंह ने इसे अमरनाथ यात्रा को ध्यान में रखते हुए केंद्र का कदम बताया, जबकि उमर अब्दुल्ला ने इसे केंद्र की नाकामी करार दिया

Bhasha Updated On: Jun 17, 2018 07:47 PM IST

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जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ सीजफायर खत्म: राजनाथ

रमजान के महीने के दौरान जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठनों के खिलाफ अभियानों पर लगाई गई रोक को केंद्र सरकार ने खत्म कर दिया है. इसी के साथ केंद्र सरकार ने ऐलान करते हुए सुरक्षा बलों को निर्देश दिया कि वे सभी जरूरी कार्रवाई करें. जिससे आतंकवादियों को हमले और हिंसा करने से रोका जाए.

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, 'सुरक्षा बलों को निर्देश दिया जाता है कि वह पहले की तरह सभी जरूरी कार्रवाई करें. ताकि आतंकवादियों को हमले और हिंसा करने और हत्याएं करने से रोका जाए.'

राजनाथ सिंह ने साफ किया कि सरकार राज्य में आतंक और हिंसा मुक्त माहौल बनाने का अपना प्रयास जारी रखेगी. उन्होंने कहा, ‘यह जरूरी है कि शांतिप्रिय लोगों का हर तबका एक साथ आए. ताकि आतंकवादियों को अलग-थलग कर उन्हें शांति की राह पर लौटने के लिए प्रेरित किया जा सके. जो गुमराह किए गए हैं.'

मालूम हो कि केंद्र सरकार ने 17 मई को निर्णय लिया था कि रमजान के दौरान जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बल आतंकवादियों के खिलाफ अभियान नहीं चलाएंगे. सरकार ने कहा था कि राज्य के शांतिप्रिय लोगों के हित में यह फैसला किया गया था ताकि रमजान के महीने में उन्हें अच्छा माहौल मिले.

उकसावे के बाद भी सुरक्षा बलों ने संघर्ष विराम लागू किया

राजनाथ सिंह ने आतंकियों के उकसाने के बावजूद भी फैसले को लागू कराने के लिए सुरक्षा बलों की तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर सहित देश भर के लोगों ने इसकी काफी तारीफ की और इससे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली.’ उन्होंने कहा कि यह उम्मीद की जा रही थी कि इस पहल की सफलता सुनिश्चित करने के लिए हर कोई सहयोग करेगा.

गृह मंत्री ने कहा, ‘इस दौरान सुरक्षा बलों ने उदाहरणीय संयम बरता जबकि आतंकवादियों ने नागरिकों और सुरक्षा बलों पर अपने हमले जारी रखे. इन हमलों में कई लोगों की जान गई और कई लोग घायल हुए.’ अधिकारियों के मुताबिक, इस साल 17 अप्रैल और 17 मई के बीच आतंकवाद की 18 घटनाएं हुई हैं. और अभियान पर रोक के दौरान यह आंकड़ा 50 के ऊपर चला गया था.

गृह मंत्री ने कहा कि अभियान पर रोक के दौरान आतंकवादियों ने एक सैनिक की हत्या कर दी. उदारवादी रवैया अपनाने वाले आम नागरिकों पर हमले किए और आखिरकार जानेमाने पत्रकार शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्या कर दी. जो शांति की एक सशक्त आवाज थे.

अमरनाथ यात्रा के चलते संघर्ष विराम खत्म करने की मांग

सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को 28 जून से शुरू होने जा रही अमरनाथ यात्रा को बाधित करने के कुछ आतंकवादी संगठनों के मंसूबों के बारे में सतर्क किया था. इसी के साथ दक्षिण कश्मीर में कुछ अभियान चलाने की जरूरत भी बताई थी. पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘हमें फैसले को सही भावना से देखने की जरूरत है. गृह मंत्रालय ने सभी उपलब्ध सूचनाओं पर गौर करके फैसला किया है, कि एक महीने तक अभियान पर लगी रोक को अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.’

उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि हम सबके लिए तात्कालिक प्राथमिकता शांतिपूर्ण और सफल तरीके से अमरनाथ यात्रा का संचालन करना है. और इसके लिए न सिर्फ सरकार बल्कि सिविल सोसाइटी को सहयोग करना होगा. हमें सुनिश्चित करना होगा कि ऐसा कुछ भी नहीं हो जिससे अमरनाथ यात्रा बाधित हो और श्रद्धालू हतोत्साहित हों.’

विपक्ष ने संघर्ष विराम हटाने को बताया केंद्र की नाकामी

हालांकि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी नेताओं पर निशाना साधते हुए इसे केंद्र की नाकामी करार दिया. उन्होंने ट्वीट कर कहा 'यह केंद्र की पहल थी और फिर यह लोग इसकी नाकामी का जश्न मना रहे हैं. जैसे इसका ऐलान हमारे दुश्मनों ने किया था.'

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