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CBI vs CBI: आलोक वर्मा की याचिका में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में एक बेंच वर्मा के सील बंद लिफाफे में दिए गए जवाब पर विचार कर सकती है

Updated On: Nov 28, 2018 09:47 PM IST

Bhasha

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CBI vs CBI: आलोक वर्मा की याचिका में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट गुरुवार 29 नवंबर को CBI के निदेशक आलोक कुमार वर्मा की याचिका पर सुनवाई करेगा. भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी वर्मा ने भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनजर उन्हें सीबीआई निदेशक के अधिकारों से वंचित कर अवकाश पर भेजने के सरकार के निर्णय को चुनौती दी है.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ वर्मा के सील बंद लिफाफे में दिए गए जवाब पर विचार कर सकती है. केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने वर्मा के खिलाफ प्रारंभिक जांच करके अपनी रिपोर्ट दी थी और वर्मा का इसी पर जवाब दिया गया है.

पहले 20 नवंबर थी तारीख

पीठ को आलोक वर्मा के सीलबंद लिफाफे में न्यायालय को सौंपे गए जवाब पर 20 नवंबर को विचार करना था. किंतु उनके खिलाफ CVC रिपोर्ट कथित रूप से मीडिया में लीक होने और जांच एजेंसी के उपमहानिरीक्षक मनीष कुमार सिन्हा की तरफ से लगाए गए आरोपों की कॉपी मीडिया में प्रकाशित होने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी थी.

पीठ CBI के कार्यवाहक निदेशक एम नागेश्वर राव की रिपोर्ट पर भी विचार कर सकती है. नागेश्वर राव ने 23 से 26 अक्टूबर के दौरान जो फैसले लिए हैं सीलबंद लिफाफे में वो कोर्ट को सौंपा है. इसके अलावा, CBI अधिकारियों के खिलाफ निगरानी में स्वतंत्र जांच की अनुरोध वाली जनहित याचिकाओं पर भी सुनवाई हो सकती है. यह याचिका एक NGO कॉमन कॉज ने दाखिल की है.

क्या कहा था कोर्ट ने?

कोर्ट ने 20 नवंबर को साफ किया था कि वह किसी भी पक्षकार को नहीं सुनेगी और यह उसके द्वारा उठाए गए मुद्दों तक ही सीमित रहेगी. CVC की रिपोर्ट पर आलोक वर्मा का गोपनीय जवाब कथित रूप से लीक होने पर नाराज न्यायालय ने कहा था कि वह जांच एजेंसी की गरिमा बनाये रखने के लिए एजेंसी के निदेशक के जवाब को गोपनीय रखना चाहता था.

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