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पश्चिम बंगाल: गुंडागर्दी राजनीतिक विरोध का तरीका नहीं

ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका में आना चाहती हैं तो उन्हें बंगाल की चौहद्दी से बाहर निकलना होगा.

Sreemoy Talukdar Updated On: Jan 04, 2017 08:19 AM IST

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पश्चिम बंगाल: गुंडागर्दी राजनीतिक विरोध का तरीका नहीं

रोज वैली चिट फंड घोटाले से जुड़े मामले में लोकसभा में टीएमसी के नेता सुदीप बंदोपाध्याय को मंगलवार को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद पश्चिम बंगाल का राजनीतिक पारा तेजी से चढ़ गया. इस गिरफ्तारी के बाद हाथापाई की घटनाएं हुईं.

मंगलवार की शाम को पत्थरों और ईंटों से लैस तथाकथित टीएमसी से गुंडों ने कोलकाता में बीजेपी के दफ्तर पर हमला कर दिया. आईएएनएस के मुताबिक सैकड़ों की संख्या में जमा टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने बाहर खड़ी कारों को तोड़फोड़ दिया.

करीब 15 से 17 बीजेपी के कार्यकर्ताओं के घायल होने की खबर है. कइयों के सिर फट गए और वे खून से लथपथ थे. बाद में स्थानीय टीवी चैनलों में इस हंगामे के जो फुटेज दिखाए गए, उनमें यह साफ-साफ दिख रहा है कि वहां पर मौजूद पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने हुए थे या वे इन प्रदर्शनकारियों से मिन्नतें कर रहे थे.

गिरफ्तारी को ममता ने राजनीतिक बदले प्रेरित कारवाई कहा 

हालात तब से ही खराब होने लगे, जब गुस्से में दिख रही ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी पर बदले की राजनीति से प्रेरित होकर काम करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि उनके शीर्ष सहयोगी की गिरफ्तारी का भ्रष्टाचार से कोई लेना-देना नहीं है. यह इसलिए किया जा रहा है क्योंकि टीएमसी नोटबंदी के खिलाफ आवाज उठाई.

अपने फेसबुक पोस्ट में बंगाल की मुख्यमंत्री ने लिखा, ‘हम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की इस राजनीतिक बदले की कारवाई की निंदा करते हैं. उन्होंने हमारे संसद के पार्टी नेता सुदीप बंदोपाध्याय को गिरफ्तार किया है. वह एक दिग्गज राजनेता हैं और हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं.’

‘ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि हम नोटबंदी के खिलाफ लड़ रहे हैं. हम लोगों के साथ खड़े हैं और आगे भी रहेंगे. हमें लोगों के साथ खड़े होने से कोई नहीं रोक सकता है और नोटबंदी के खिलाफ हमारा विरोध जारी रहेगा.’

‘स्थिति आर्थिक आपातकाल से अधिक आगे निकल गई है- यह आर्थिक से राजनीतिक आपातकाल में बदल गई है. हम इसकी कठोर से कठोर शब्दों में निंदा करते हैं.’

उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया और आज से ही अनिश्चितकाल तक के लिए पूरे देश में धरना-प्रदर्शन करने के लिए तैयार रहने को कहा.

ममता बनर्जी ने आईएएनएस से कहा, ‘मैं पीएम को चुनौती देती हूं कि वे हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे. वे जनता की आवाज को दबा नहीं सकते. वे जनता को बर्बाद नहीं कर सकते. बहुत सी राजनीतिक पार्टियां डरी हुई हैं. वे कुछ नहीं बोल रहे हैं. आपातकाल जैसी स्थिति है. जनता नोटबंदी के खिलाफ सड़क पर उतरेगी और जनता उन्हें सबक सिखाएगी.’

शारदा स्कैम से बहुत बड़ा है रोज वैली चिट फंड घोटाला 

सीबीआई ने चार घंटे लंबी चली पूछताछ के बंदोपाध्याय को कोलकाता के सीबीआई के दफ्तर में गिरफ्तार कर लिया. इससे पहले टीएमसी के एक और बड़े नेता तापस पाल को सीबीआई पिछले शुक्रवार को गिरफ्तार किया था.

अभिनेता से राजनेता बने पाल पर 60,000 करोड़ रुपए के घोटाले में शामिल होने का आरोप है. रोज वैली चिट फंड में गरीब लोगों ने अपने जीवनभर की बचत जमा की थी.

इस ग्रुप को बाहर से संचालित करने वाले गौतम कुंडू फिलहाल जेल में हैं. इनका बिजनेस कई राज्यों में फैला हुआ था. कुंडू का रियल एस्टेट, मीडिया, रिसोर्ट और फिल्मों में भी कारोबार फैला था. पोंजी स्कीम बहु-प्रचारित शारदा घोटले से 7 गुना बड़ा घोटाला बताया जा रहा है.

न्यूज़18 की खबर के मुताबिक सीबीआई और इस मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले साल पाल के घर पर छापा मारकर देशभर के 2600 बैंक खातों को सील किया है. सेबी इस कंपनी की जांच 2013 से कर रही है.

विरोध की लोकतंत्र में जगह, गुंडागर्दी की नहीं  

गिरफ्तारियों में हमेशा राजनीतिक उठापठक की जगह होती है. ‘राजनीति बदले की भावना’ से प्रेरित होकर काम करने का आरोप भारतीय राजनीति में नया नहीं है.

हालांकि इस पर बहस हो सकती है कि करोड़ों रुपए के पोंजी घोटाले में टीएमसी के दो बड़े नेताओं की गिरफ्तारी ‘राजनीतिक बदले की भावना’ से प्रेरित है या नहीं. लेकिन राजनीतिक दलों खासकर सत्ताधारी दलों को इस तरह के विरोध प्रदर्शनों में संयम दिखाना चाहिए.

विरोध लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है. पार्टियों को भी यह अधिकार है कि वह राजनीतिक रूप से खास और लाभकारी मुद्दों पर विरोध दर्ज करे. संविधान और देश के कानून के अनुसार राजनीतिक दलों को कई तरीके से विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है. अगर टीएमसी को यह लगता है कि उनके नेताओं को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है तो उनके पास कानूनी रास्ता भी है.

साथ ही साथ सीबीआई अभी इस मामले की जांच ही कर रही है. कोर्ट में अभी इसे साबित किया जाना बाकी है और सीबीआई भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है.

राजनीतिक अवसर गंवा सकती हैं ममता 

मंगलवार को कोलकाता में जो कुछ हुआ उससे कुछ सवाल खड़े होते हैं. खासकर टीएमसी की सुप्रीमों ने अपनी ताकत का जिस तरह से इजहार किया है. बंदोपाध्याय की गिरफ्तारी इस बात का बहाना नहीं हो सकती कि आप कानून को बेलगाम लोगों के हवाले कर दें.

जिस तरह से तथाकथित टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के कार्यकर्ताओं पर हमला किया और इस बीच पुलिस की जो बेचारगी दिखी, उससे बंगाल में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

सीबीआई द्वारा की गई गिरफ्तारी चाहे राजनीति से प्रेरित हो या न हो लेकिन इससे गुंडागर्दी को उचित नहीं ठहराया जा सकता है.

अगर ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका में आना चाहती हैं तो उन्हें बंगाल की चौहद्दी से बाहर निकलना होगा. ममता बनर्जी को यह सोचना होगा कि जिस तेवर के कारण उन्हें यह राजनीतिक अवसर मिला है, उसे वे यूं ही न जाने दें.

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