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कई तरीके अपना कर INX ग्रुप में विदेशी निवेश की प्रक्रिया को किया प्रभावित

सीबाआई का आरोप है कि गड़बड़ी वाला प्रपोजल वित्त मंत्रालय द्वारा स्वीकार कर उसको आगे बढ़ाया गया. उस पर तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने स्वीकृति प्रदान कर उस पर हस्ताक्षर भी किए

Updated On: Mar 01, 2018 02:17 PM IST

Yatish Yadav

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कई तरीके अपना कर INX ग्रुप में विदेशी निवेश की प्रक्रिया को किया प्रभावित

कार्ति के चेस मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की सफाई के अनुसार आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 26 जून 2006 को अपने द्वारा किए गए कार्यों को दोनों तरीकों से सही ठहराया था.

पहला ये कि अस्वीकृत और अनधिकृत निवेश के मामले में आइएनएक्स मीडिया ने झूठा दावा किया था कि ये नियमों के अंतर्गत और स्वीकृत है और दूसरा भारी मात्रा में नगद मिलने को सही ठहराते हुए बताया कि ये जारी किए गए शेयरों का प्रीमियम है.

सीबीआई का आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया की चिट्ठी के बाद फाइनांस मिनिस्ट्री के विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड यानि एफआईपीबी और वहां उससे जुड़े अधिकारियों ने कार्ति चिदंबरम के प्रभाव में प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया. यही नहीं न केवल कानूनी प्रक्रियाओं और सलाहों को नजरंदाज किया बल्कि उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए आइएनएक्स मीडिया को जानबूझ कर अनुचित तरीके से सहायता पहुंचाया.

अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आईएनएक्स न्यूज प्राइवेट लिमिटेड को सलाह दी कि वो डाउन स्ट्रीम निवेश के लिए फिर से आवेदन करें जो कि उन्होंने पहले ही आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कर रखी थी.

Photo Source: Twitter

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आईएनएक्स को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए राजस्व विभाग के अनुरोध को ठुकरा दिया 

सीबीआई का कहना है कि एफआईपीबी यूनिट के अधिकारियों ने आइएनएक्स ग्रुप को अनुचित लाभ पहुंचाने के प्रयास में राजस्व विभाग के अनुरोध को भी ठुकरा दिया था. जिसमें उन्हें कहा गया था कि वो देखें कि बिना एफआईपीबी की अनुमति के आइएनएक्स न्यूज प्राइवेट लिमिटेड में डाउन स्ट्रीम निवेश की अनुमति कैसे मिल गई.

उसी तरह से आइएनएक्स न्यूज प्राइवेट लिमिटेड ने जानबूझ कर ये तथ्य छिपाया कि उन्हें अप्रत्यक्ष निवेश समेत 26 फीसदी विदेशी निवेश प्राप्त हो गया है, इसके बावजूद भी वो विदेश मंत्रालय के विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड के सामने डाउन स्ट्रीम निवेश की अनुमति मांगने पहुंच गए.

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सीबाआई का आरोप है कि इस तरह की धांधली और गड़बड़ी वाला प्रपोजल न केवल वित्त मंत्रालय द्वारा स्वीकार कर उसको आगे बढ़ाया गया बल्कि उस पर उस समय के तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने स्वीकृति प्रदान कर उस पर हस्ताक्षर भी किए.

जांच ऐजेंसी का दावा है कि जिस तरह से आपसी सहमति से कंपनी को उस निवेश की अनुमति दे दी गई जिसको उसने बिना वित्त मंत्रालय की अनुमति के पहले ही प्राप्त कर लिया था, उससे ये साफ होता है कि मंत्रालय के अधिकारियों की मंशा गलत करने की थी.

अधिकारियों ने गैरकानूनी तरीके से काम कर रही कंपनी के खिलाफ कोई कोई कार्रवाई नहीं की. बजाए इसके उनके गलत कार्यों पर पर्दा डालने के उद्देश्य से अधिकारियों ने कंपनी से विदेशी निवेश की अनुमति वाले आवेदन मांग कर उस पर उन्हें स्वीकृति दे दी.

RPT with headline correction.... New Delhi: Former finance minister P Chidambaram, addresses the media at his residence after the Enforcement Directorate (ED) conducted raids at his son Karti Chidamabaram's Delhi and Chennai premises in connection with the probe in the Aircel Maxis money laundering case, at Jor Bagh in New Delhi on Saturday. PTI Photo(PTI1_13_2018_000036B)

वित्त मंत्रालय ने साजिश के तहत रचा पूरा खेल 

सीबीआई ने दावा किया कि वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने एकपक्षीय और दुर्भावनापूर्ण तरीके से कंपनी और उससे जुड़े लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए आपराधिक षडयंत्र रचा. अधिकारियों ने न केवल कंपनी को गैरकानूनी स्वीकृति दी बल्कि इस मामले की जांच कर रहे आयकर विभाग के जांच अधिकारियों को भी गलत जानकारी दी.

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सीबीआई एफआईआर के मुताबिक कार्ति चिदंबरम ने चेस मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से आइएनएक्स ग्रुप को जो सेवाएं दी वो वित्त मंत्रालय के विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड के अधिकारियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके दी. इसके एवज में उन्हें जो पेमेंट मिला वो एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग ( प्राइवेट ) लिमिटेड ( एएससीपीएल ) के नाम से आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से दिया गया.

सूत्रों के अनुसार चेस मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के सेवा देने के एवज में एएससीपीएल के नाम पर बिल बनाने का मकसद ये था कि इससे कार्ति चिदंबरम की पहचान उजागर न हो सके. कार्ति चिदंबरम चेस मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के प्रोमोटर और डायरेक्टर थे जबकि एएससीपीएल पर उनका अप्रत्यक्ष रुप से नियंत्रण था.

इसके अलावा ये भी पता चला है कि कार्ति चिदंबरम को 3.5 करोड़ रुपए उन कंपनियों के नाम पर और मिले जिसमें उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से हिस्सेदारी थी. मीडिया कंसल्टेंसी,मार्केट रिसर्च आदि के नाम पर भी कई फर्जी बिल बनाए गए. हालांकि आइएनएक्स ग्रुप ने अपने रिकार्ड में एएससीपीएल को मैनेजमेंट कंसल्टेंसी के नाम पर केवल 10 लाख रुपए देने की बात स्वीकार की है.

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