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गांधी परिवार को ‘मिशेल नाम के मिसाइल’ से सीबीआई कितना डरा पाएगी?

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी डील में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को 5 दिनों की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है.

Updated On: Dec 05, 2018 08:13 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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गांधी परिवार को ‘मिशेल नाम के मिसाइल’ से सीबीआई कितना डरा पाएगी?

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी डील में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को 5 दिनों की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है. मिशेल को बुधवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया. पटियाला हाउस के कोर्ट न. 6 की विशेष सीबीआई अदालत ने सीबीआई की आपील पर क्रिश्चियन मिशेल को पांच दिनों की रिमांड पर भेजा है. बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी से पहले बीती रात से ही क्रिश्चियन मिशेल से सीबीआई मुख्यालय में लंबी पूछताछ चल रही थी.

मिशेल बीती रात को ही दुबई से दिल्ली लाया गया था. जानकारों का मानना है कि मिशेल को भारत लाना सीबीआई के लिए बड़ी कामयाबी है. भारत आने से पहले दुबई अथॉरिटी के समक्ष क्रिश्चियन मिशेल ने बताया था, 'मैं जांच में दिए गए अपने पिछले बयान पर जोर देता हूं और कंफर्म है कि मेरे ऊपर लगे आरोपों के पीछे कारण है कि मैंने इस डील में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के साथ काम किया था. अब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने मुझे पिछली सरकार पर प्रेशर डालने के लिए इस केस में घसीट रही है. इस डील में कोई भी फ्रॉड नहीं हुआ था और न ही मैंने रिश्वत ली थी. मैं कंपनी की भारत स्थित ब्रांच में काम नहीं कर रहा था. मैं कंपनी की यूके स्थित ब्रांच में काम कर रहा था. विशेष रूप से उस समय जब ऊंचाई में बदलाव कर 6000 मीटर से 4000 मीटर किया गया.'

मिशेल ने कहा 'मैंने यह भी उल्लेख किया था कि मेरे खिलाफ पहले भी केस भारत सरकार के द्वारा दर्ज कराया गया था और इटैलियन जज के निधन के बाद आरोप इतालवी अधिकारियों द्वारा लगाया गया था.'

बता दें कि 8 फरवरी, 2010 को रक्षा मंत्रालय ने अगस्ता वेस्टलैंड इंटरनेशनल लिमिटेड के साथ इस समझौते की मंजूरी दी थी. इसका ठेका 55.62 करोड़ यूरो में दिया गया था. मिशेल के अलावा इस मामले में कई भारतीय अधिकारी भी आरोपी हैं. इनमें तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी और उनके परिवारिक सदस्य प्रमुख हैं.

इस सौदे के तीन बिचौलिए में से एक मिशेल पर आरोप है कि षड्यंत्र के तहत उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की उड़ान भरने की ऊंचाई की सीमा को 6,000 मीटर से घटाकर 4,500 करवा दिया था.

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इस साल की शुरुआत में ही सीबीआई ने 3 हजार 767 करोड़ रुपए के वीवीआईपी हेलिकॉप्टर डील मामले में वायुसेना के पूर्व प्रमुख एस.पी. त्यागी सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया था. तीनों इस समय जमानत पर बाहर हैं. ऐसे में यह कयास लगाया जा रहा है कि सीबीआई एक बार फिर से वायु सेना के पूर्व प्रमुख एस.पी. त्यागी सहित तीनों लोगों को दोबारा से पूछताछ करेगी. सीबीआई सूत्रों का कहना है कि सीबीआई बहुत जल्द ही एस.पी. त्यागी और मिशेल से आमने सामने बैठा कर पूछताछ करने वाली है.

बता दें कि इसी साल सितंबर महीने में इस सौदे से जुड़े तीन यूरोपीय बिचौलियों में से एक कार्लोस गेरोसा को भी इंटरपोल ने इटली से गिरफ्तार किया था. यह गिरफ्तारी भारतीय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अपील पर हुई थी. आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि गेरोसा के प्रत्यर्पण को लेकर भी भारत के कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं. ऐसा माना जा रहा है बहुत जल्द ही गेरोसा का भी प्रत्यार्पण हो जाएगा.

इसी साल जनवरी महीने में देश के इतिहास में पहली बार कोई पूर्व वायुसेना प्रमुख को गिरफ्तार किया गया था. अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले के मामले में इटली के मिलान शहर की अदालत ने कंपनी के दो अधिकारियों को घूस देने का दोषी पाया था. इटली की अदालत के फैसले के बाद ही भारत में सीबीआई ने यूपीए सरकार के समय केस दर्ज कर इस केस की जांच शुरू की थी.

इटली की अदालत में सबूतों के आधार पर यह साबित हुआ था कि भारत को बेचे गए 12 अगस्ता हेलिकॉप्टर सौदे में 7 करोड़ यूरो की राशि (लगभग 3 हजार 767 करोड़) घूस दी गई है. ब्रिटेन की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से 3 हजार 767 करोड़ रुपए की लागत से खरीदे गए 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टर रिश्वतकांड में भारतीय जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी थी.

दिलचस्प बात यह है कि इटली में रिश्वत देनेवाले को तो सजा मिल गई. लेकिन भारत में रिश्वत लेने वालों की पहचान करने में सीबीआई को इतने साल तक खाक छाननी पड़ रही है. सीबीआई पिछले कई सालों से इस केस की जांच कर रही है.

इस हेलिकॉप्टर घोटाले के तार वाजपेयी सरकार से लेकर मनमोहन सरकार तक जुड़े हैं. सौदे को अंतिम रूप मनमोहन सरकार के दौरान दिया गया था. जबकि इसकी शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय ही हो गई थी.

इटली की अदालत से सीबीआई को डेढ़ लाख पेज के दस्तावेज मिले हैं. इन कागजातों से साफ होता है कि इस घोटाले के तहत भारत में नेताओं, सेना और रक्षा मंत्रालय के अफसरों और पूर्व वायुसेना प्रमुख एस.पी. त्यागी के परिवारवालों को घूस दी गई थी. सीबीआई को एक डायरी भी हाथ लगी है, जिसमें अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी की ओर से दी गई रिश्वत का पूरा ब्योरा है. डायरी में कथित तौर से कांग्रेस के कुछ नेताओं के नाम लिखे गए हैं.

सीबीआई को जो दस्तावेज मिले हैं उसमें पैसों का लेन-देन कोर्ड वर्ड के जरिए होने की बात सामने आई है. सौदे में शामिल विदेशी दलालों से मिले कागजात में एम, एफएएम, पीओएल और बीयूआर कोड वर्ड लिखे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए ये बात आती रही है कि सीबीआई इन कोड वर्ड्स को अहमद पटेल, त्यागी परिवार, दूसरे राजनेताओं और नौकरशाहों की तरफ इशारा मान रही है.

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अहमद पटेल

इस मुद्दे पर अहमद पटेल ने कुछ महीने पहले बयान भी दिया था कि यदि उनके खिलाफ कोई आरोप साबित हो जाए, तो वह राज्यसभा और सार्वजनिक जीवन छोड़ देंगे. सीबीआई की कार्यप्रणाली को करीब से जानने वाले कहते हैं कि इस डायरी का हाल भी जैन हवाला डायरी जैसा ही होने वाला है. सीबीआई में पब्लिक प्रोसिक्यूटर रह चुके वरिष्ठ वकील एमपी सिंह कहते हैं, 'जैन हवाला डायरी मामला देश के लिए और सीबीआई के लिए एक नजीर है'.

वो आगे कहते हैं कि 'हवाला मुकदमे में भी एक डायरी सामने आई थी. जिसमें लालकृष्ण आडवाणी, मदन लाल खुराना, शरद यादव और चौधरी देवीलाल के नाम शामिल थे. नतीजा यह हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सभी नेताओं को हवाला मामले से बरी कर दिया.'

एमपी सिंह के मुताबिक सीबीआई के पास एक डायरी है. जिसमें वो सीधे-सीधे किसी का नाम और उसका पूरा पता लिखे होने की बात का जिक्र करते हैं. लेकिन अदालत में ये कैसे साबित किया जाएगा कि किसी आदमी को 25 लाख या 50 लाख रुपए दिए गए हैं. जब हमारे पास लेन-देन की डिटेल नहीं हैं. जबकि मिशेल साफ मना कर रहा है कि वह उसकी डयरी नहीं है. अगस्ता वेस्टलैंड केस की डायरी में तो कोर्ड वर्ड में नाम लिखे हैं. जबकि जैन हवाला डायरी में तो पूरा नाम और रकम लिखी हुई थी. डायरी में नाम या रकम लिखते समय उस आदमी की मानसिक स्थिति क्या थी? कोर्ट इस पहलू पर भी ध्यान देती है.’

भारत की दो एजेंसियां ईडी और सीबीआई मिल कर अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे की जांच कर रही हैं. मिशेल की गिरफ्तारी से उस राज से पर्दा उठेगा जो पिछले कई सालों से राजनेताओं और अफसरशाही के गठजोड़ में दफन है. अगस्ता वेस्टलैंड मामले में तीन भगौड़े बिचौलियों में से एक कार्लोस गेरोसा भी अब भारत सरकार के निशाने पर है.

Narendra Modi

दूसरी तरफ मिशेल की गिरफ्तारी को मोदी सरकार पूरी तरह से भुनाने में लग गई है. इस चुनावी माहौल में मिशेल के मामले ने अब सियासी रंग लेना शुरू कर दिया है. सत्ता पक्ष के नेताओं का साफ कहना है कि मिशेल की गिरफ्तारी से गांधी परिवार का चेहरा और बेनकाब हो सकता है. देश के प्रधानमंत्री तक ने इसे बड़ी कामयाबी मानते हुए कहा है कि अब सभी राज से पर्दा उठेगा वहीं दूसरी तरफ कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि मिशेल के बहाने सीबीआई उनके बड़े नेताओं को फंसाने का काम करेगी.

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