S M L

डेटा चोरी विवाद: कांग्रेस पर निशाना साधने की इच्छा ने ही बीजेपी को फंसा दिया

बीजेपी ने इस मामले में हाथ डाल कर खुद ही मुसीवत मोल ले ली है. कई खुलासों में इस बात की ओर इशारा किया गया है कि उस विवादास्पद कंपनी के साथ बीजेपी का ही संबंध रहा है

Updated On: Mar 24, 2018 09:21 AM IST

Sandipan Sharma Sandipan Sharma

0
डेटा चोरी विवाद: कांग्रेस पर निशाना साधने की इच्छा ने ही बीजेपी को फंसा दिया

कैंब्रिज एनालिटिका के द्वारा डेटा चोरी को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है. यह सारा विवाद बीजेपी की तरफ से खड़ा किया गया है. जिसने बिना किसी ठोस वजह के इसको लेकर विवाद का विषय बना दिया है. इस विवाद से उसे कोई फायदा तो हुआ नहीं है देर सवेर घाटा जरूर हो जाएगा. डेटा चोरी विवाद को हवा देकर एक तरह से बीजेपी ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है.

ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि अधिकतर भारतीयों ने इसके बारे में कभी सुना नहीं था और न ही उन्हें विवादित डेटा चोरी के बारे में कुछ खास जानकारी थी. कुछ जागरूक लोगों को अगर जानकारी थी भी तो वो केवल इतनी की 2016 के अमेरिका चुनावों में इसकी मदद से डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव जीतने में सहायता की गई थी. डेटा चोरी का विवाद वैसे तो यूरोप और अमेरिका के बाजारों में चल रहा था लेकिन इस विवाद को केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भारत में हवा देकर लोगों के मन में संशय पैदा कर दिया है.

रविशंकर प्रसाद के आरोप-

पहले तो रविशंकर प्रसाद ने कैंब्रिज एनालिटिका जैसी विवादित कंपनी का नाम कांग्रेस से जोड़ा. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में लोगों का व्यक्तिगत डेटा चोरी करने की आरोपी कंपनी की सेवाएं कांग्रेस ने लेकर आगामी चुनावों को प्रभावित करने की योजना बनाई है. मजेदार बात ये है कि केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिना किसी ठोस सुबूत के कांग्रेस को दोषी ठहरा दिया. इतना ही नहीं उन्होंने फेसबुक के मार्क जकरबर्ग को भारतीय चुनावों से दूर रहने की भी चेतावनी दे डाली.

New Delhi: Law Minister Ravi Shanker Prasad with Labour minister Santosh Kumar Gangwar at a press conference at Parliament House during the Budget Session of Parliament in New Delhi on Thursday. PTI Photo by Subhav Shukla (PTI3_22_2018_000052B)

लेकिन ये करके रविशंकर प्रसाद ने अपरिपक्वता का परिचय दिया है. कहा जाता है कि शीशे के घर में रहने वाले दूसरों के घरों में पत्थर नहीं फेंकते लेकिन लगता नहीं है कि बीजेपी इस कहावत से कुछ सीख लेने के मूड में है. बीजेपी ने इस मामले में हाथ डाल कर खुद ही मुसीवत मोल ले ली है. कई खुलासों में इस बात की ओर इशारा किया गया है कि उस विवादास्पद कंपनी के साथ बीजेपी का ही संबंध रहा है ऐसे में बिना सोचे समझे बीजेपी का कांग्रेस की ओर साधा गया निशाना खुद उसको ही घायल कर रहा है.

एनडीटीवी की मानें तो सही मायनों में बीजेपी डेटा चोरी के मामले में फायदे में रही है. यूके स्थित कैंब्रिज एनालिटिका के भारतीय पार्टनर स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशंस लेबोरेट्रीज के साथ बीजेपी का संबंध रहा है. एनडीटीवी के मुताबिक उन्हें इस कंपनी के भारतीय फर्म के को-फाउंडर अवनीश राय ने बताया है कि कैंब्रिज एनालिटिका के बदनाम सीईओ एलेक्जेंडर निक्स ने 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को चुनाव में हराने की साजिश रची थी. अवनीश का दावा है कि निक्स ने कांग्रेस को हराने के लिए अपने एक क्लाइंट के लिए डेटा से छेड़छाड़ की, लेकिन उसने अपने क्लाइंट के नाम का खुलासा नहीं किया.

यह भी पढ़ें: जकरबर्ग को धमकी दे रहे कानून मंत्री पहले डेटा प्रोटेक्शन कानून क्यों नहीं बनाते?

राय ने एक और खुलासा करते हुए कहा कि कैंब्रिज एनालिटिका से जुड़ी एक और कंपनी ओबीआई ने 2012 में बीजेपी के लिए यूपी चुनावों में काम किया. कंपनी ने बीजेपी को बूथवार तरीके से मतदाताओं की उम्र और जाति की जानकारी पार्टी को उपलब्ध कराई थी. मजेदार बात ये है कि ओबीआई अपनी सूची में बीजेपी और कांग्रेस के अलावा जेडीयू को भी अपना बड़ा क्लाइंट बताने का दावा किया है. आरोप है कि केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ट्विटर पर कैंब्रिज एनालिटिका को फॉलो करती है. बीजेपी के मीडिया सेल के हेड अमित मालवीय भी कैंब्रिज एनालिटिका को एक महत्वपूर्ण हथियार मानते रहे हैं.

इराक में 39 भारतीयों की हत्या के मामले ने सरकार को परेशानी में डाला

सवाल ये है कि आखिर इस विवाद में खुद को उलझाने की बीजेपी को जरूरत क्या पड़ी थी? क्या रविशंकर प्रसाद को ये मालूम नहीं था कि जिस कपंनी पर वो आरोप लगाने जा रहे हैं उस कंपनी से खुद उनकी पार्टी का ही वास्ता रहा है? या कहीं ऐसा तो नहीं है बीजेपी ने चालाकी दिखाने में अपने विरोधी कांग्रेस पर पहले हमला कर दिया कि कहीं उससे पहले खुद बीजेपी पर विरोधी दल इस तरह का आरोप नहीं लगाने दें?

डेटा चोरी जैसे अंतरराष्ट्रीय विवाद का भारतीयकरण करने की बीजेपी की रणनीति दरअसल उसकी अधीरता और हताशा का परिचायक है. कुछ हफ्तों से बीजेपी केवल नकारात्मक खबरों से जूझ रही है और इसी वजहों से बैकफुट पर भी है. सबसे पहले तो कांग्रेस लोगों को ये समझाने में सफल रही कि नीरव मोदी घोटाला होने देने की आरोपी बीजेपी है. बीजेपी भले ही इस मसले पर लाख सफाई दे लेकिन लोग ये मान रहे हैं कि नीरव मोदी के भारतीय बैकों को लूट कर भाग जाने को सरकार आंखें बंद करके देखती रही, जबकि पीएम मोदी खुद को देश का चौंकीदार कहते रहते थे. इसके बाद इराक में 39 भारतीयों की हत्या के मामले ने सरकार को परेशानी में डाला.

भारतीयों की मौत का खुलासा सरकार के शुरुआती दावों के विपरीत हुआ है जिसमें वो लगातार भारतीयों के जिंदा होने का दावा करती रही थी. अब जबकि सच सामने आ रहा है कि उन 39 भारतीयों की हत्या शुरू में ही आईएस के आतंकवादियों ने कर दी थी, मृतकों के परिजन सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि सरकार ने उन्हें अंधेरे में रखकर उनके परिजनों के जिंदा होने का झूठ बोला.

राजनीतिक रूप से भी बीजेपी के पिछले कुछ दिन ठीक नहीं रहे हैं. उसके सबसे पुराने सहयोगियों में से एक टीडीपी ने उनसे किनारा कर लिया. उपचुनावों में भी पार्टी को बड़ा झटका लगा जब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की लोकसभा सीट रही गोरखपुर और फूलपुर पर पार्टी पराजित हो गई. बिहार के उपचुनावों में भी पार्टी को अपेक्षाकृत सफलता नहीं मिल सकी.

**FILE PHOTO** Families pray for Indians trapped in Iraq

इराक में मारे गए भारतीयों के परिजन (फोटो: PTI)

जल्दबाजी में अपना बचाव करना भूल गई बीजेपी

ऐसे में लग रहा है कि डेटा चोरी के आरोप के बहाने बीजेपी कांग्रेस पर निशाना साधना चाहती थी. लेकिन लगता है कि हड़बड़ी में गड़बड़ी हो गई. बीजेपी कांग्रेस पर आरोप लगा कर राजनीतिक बढ़त लेना चहती थी लेकिन खुद विवादित कंपनी से उसके संबंधों का खुलासा होने के बाद उसके लिए ये पूरा मामला ही उल्टा पड़ गया.

यह भी पढ़ें: फेसबुक डेटा लीक साल 2019 के चुनाव में बनेगा बड़ा सियासी मुद्दा?

बिना किसी तैयारी के विपक्षी दलों पर उंगली उठाना और हवा में ये सोच कर कीचड़ उछालना कि ये विपक्षी दलों के कपड़ों पर लग जाएगी एक घटिया रणनीति है. इस तरह की रणनीति इशारा कर रही है कि लगातार कई मोर्चों पर जूझ रही बीजेपी के अंदर बेचैनी का माहौल है. पार्टी ने हताशा में इस उम्मीद के साथ कांग्रेस पर हमला बोला है कि लगातार निशाने पर बने रहने से उन्हें राहत मिल जाएगी लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा और पार्टी खुद ही इस जाल में बुरी तरह से उलझ गई.

बीजेपी को ये समझना होगा कि वो अब विपक्ष में नहीं है बल्कि सरकार चला रही है. ऐसे में किसी पर केवल आरोप लगा देने से कुछ भी हासिल नहीं होगा. बीजेपी अगर डेटा चोरी के आरोपों पर गंभीर है और अगर उसके हाथ में इससे संबंधित थोड़े भी आरोपों के सुबूत हैं तो उसे इन आरोपों की पुख्ता तरीके से जांच करानी चाहिए.

अगर कैंब्रिज एनालिटिका ने चुनाव के दौरान कांग्रेस को फायदा पहुंचाने के लिए डेटा में हेरफेर की है तो उसके खिलाफ सरकार को जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए. लेकिन इसके साथ-साथ पार्टी को खुद भी उस विवादित कंपनी के भारतीय पार्टनर के खिलाफ अपने संबंधों को लेकर सफाई देनी चाहिए. अगर पार्टी ऐसा करने में विफल रहती है तो पार्टी के कंपनी के साथ संबंधों को लेकर सबके मन में हमेशा संदेह बना रहेगा और संभव है कि पार्टी को बाद में इसका मोल भी चुकाना पड़े.

(इस स्टोरी को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi