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राफेल: रक्षा मंत्रालय को CAG ने भेजी ड्राफ्ट रिपोर्ट, 4 दिन में सरकार को देना होगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने भारत और फ्रांस के बीच 23 सितंबर 2016 को हुए राफेल विमान सौदे के खिलाफ दायर जांच संबंधी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था

Updated On: Dec 17, 2018 05:22 PM IST

FP Staff

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राफेल: रक्षा मंत्रालय को CAG ने भेजी ड्राफ्ट रिपोर्ट, 4 दिन में सरकार को देना होगा जवाब

फ्रांस के साथ हुए राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर सियासी घमासान खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर बीजेपी को लगातार घेर रही है. कांग्रेस के अक्रामक रुख का ही नतीजा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को क्लीन चिट दिए जाने के बावजूद सरकार बैकफुट पर ही है.

इस बीच नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) ने रक्षा मंत्रालय को राफेल पर ड्राफ्ट रिपोर्ट भेज दी है. मंत्रालय को दो हफ्ते पहले ये रिपोर्ट भेजी गई है. CAG ने चार हफ्ते के अंदर इस ड्राफ्ट रिपोर्ट पर सरकार को जवाब देने को कहा है.

न्यूज 18 के मुताबिक जवाब देने के बाद CAG और सरकार के बीच एक एग्जिट कॉन्फ्रेंस होगी, जहां दोनों एक दूसरे से आमने-सामने सवाल-जवाब करेंगे. खास बात ये है कि ये ड्राफ्ट रिपोर्ट इस बार संसद के शीतकालीन सत्र में पेश नहीं होगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते राफेल सौदे पर मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी थी. कोर्ट ने भारत और फ्रांस के बीच 23 सितंबर 2016 को हुए राफेल विमान सौदे के खिलाफ दायर जांच संबंधी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था.

राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के फैसले में तथ्यात्मक सुधार करने वाली याचिका को लेकर हमला बोला है. कांग्रेस का कहना है कि केंद्र सरकार ने राफेल डील पर पहले तो जनता को गुमराह किया, फिर शीर्ष अदालत में भी गलत जानकारियां दी. लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को फैसला वापस लेना चाहिए.

राफेल क्या है ?

राफेल कई भूमिकाएं निभाने वाला और दोहरे इंजन से लैस फ्रांसीसी लड़ाकू विमान है और इसका निर्माण डसॉ एविएशन ने किया है. राफेल विमानों को वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक सक्षम लड़ाकू विमान माना जाता है.

कब हुआ था ये सौदा?

फ्रांस की अपनी यात्रा के दौरान, 10 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि सरकारों के स्तर पर समझौते के तहत भारत सरकार 36 राफेल विमान खरीदेगी. घोषणा के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री ने सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की मंजूरी के बिना कैसे इस सौदे को अंतिम रूप दिया.

मोदी और तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलोंद के बीच वार्ता के बाद 10 अप्रैल, 2015 को जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि वे 36 राफेल जेटों की आपूर्ति के लिए एक अंतर सरकारी समझौता करने पर सहमत हुए.

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