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कैबिनेट फेरबदल: 2 सितंबर को पत्ते खोल सकते हैं पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी संगठन में भी बदलाव कर सकते हैं, कुछ मंत्रियों को संगठन के काम में लगाया जा सकता है

Sanjay Singh Updated On: Sep 01, 2017 11:04 AM IST

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कैबिनेट फेरबदल: 2 सितंबर को पत्ते खोल सकते हैं पीएम मोदी

केंद्रीय कैबिनेट के विस्तार और फेरबदल पर महीनों से चल रही कयासबाजी शनिवार शाम यानी दो सितंबर को खत्म हो सकती है. कम से कम ये संभावना प्रबल दिखती है कि अगर प्रधानमंत्री को ये काम प्राथमिकता के आधार पर करना है तो सिर्फ यही समय है जब इसे अंजाम दिया जा सकता है.

रेल मंत्रालय से सुरेश प्रभु का जाना और नए रक्षा मंत्री का आना उस दिन की बड़ी खबर हो सकती है. एक पखवाड़े तक चलने वाले अशुभ ' पितृ पक्ष' (दिवंगत बुजुर्गों के लिए धार्मिक अनुष्ठान का समय) के शुरू होने से पहले के कुछ दिनों में शनिवार शाम ही ऐसा वक्त है जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह दिल्ली में होंगे. सत्ताधारी बीजेपी और सरकार के राजनीतिक नेतृत्व में मोदी सरकार के इस आखिरी कैबिनेट फेरबदल को लेकर दो राय नहीं है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल समय का है. किसी भी वरिष्ठ नेता को ये पता नहीं है कि वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी (अमित शाह से परामर्श कर) इसे कब अंजाम देंगे.

पिछले कुछ दिन की घटनाओं ने इन कयासबाजियों को और बल दिया है. पार्टी और सरकार के वरिष्ठ नेताओं से फर्स्टपोस्ट को मिली जानकारी के अनुसार अगले कुछ दिनों में कैबिनेट में बदलाव अवश्यंभावी है.

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एक सितंबर को दिल्ली से बाहर होंगे. वो तिरुपति जा रहे हैं. वहां वो तिरुमला में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करेंगे. राष्ट्रपति आंध्र सरकार के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. इनमें अनुसूचित जाति के कल्याण से जुड़ा कार्यक्रम भी है. राष्ट्रपति शनिवार दोपहर को दिल्ली लौटेंगे.

इस दौरान अमित शाह भी दिल्ली से बाहर होंगे. वो वृंदावन में बीजेपी के वैचारिक संगठन आरएसएस के सम्मेलन में शामिल होंगे. उनके साथ बीजेपी के संगठन महासचिव रामलाल भी होंगे. गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी बैठक में शामिल हो सकते हैं.

ये सभी नेता दो सितंबर की दोपहर तक दिल्ली लौटेंगे. यह तारीख और समय इसलिए अहम है कि प्रधानमंत्री ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तीन सितंबर को चीन रवाना हो जाएंगे. ब्रिक्स सम्मेलन तीन से पांच सितंबर तक चलना है. चीन से प्रधानमंत्री म्यांमार जाएंगे और सात सितंबर को दिल्ली लौटेंगे.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी तीन सितंबर को दो दिन के गुजरात दौरे के लिए दिल्ली से रवाना होंगे. प्रधानमंत्री जब चीन और म्यांमार के दौरे से वापस लौटेंगे तब तक 'पितृ पक्ष' शुरू हो जाएगा. ऐसा माना जा रहा है कि कैबिनेट में फेरबदल जैसा काम इस दौरान अंजाम नहीं दिया जाएगा. तो फिर इसका मतलब ये हुआ कि कैबिनेट में बदलाव को करीब एक महीने के लिए दशहरा और मुहर्रम के खत्म होने तक टालना होगा.

इसलिए बीजेपी नेताओं का एक वर्ग दो सितंबर को लेकर आशावान है. इसके लिए उनके पास वजहें भी हैं- कैबिनेट का विस्तार और प्रधानमंत्री मोदी का विदेश दौरा. प्रधानमंत्री ने पिछली बार कैबिनेट विस्तार और फेरबदल पांच जुलाई, 2016 को किया था. इसके बाद वो मोजाम्बिक, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया और केन्या के पांच दिन के दौरे पर रवाना हो गए थे.

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क्या इस बार भी मोदी वहीं पुराना कार्यक्रम दोहराएंगे- कैबिनेट में फेरबदल के बाद वो विदेश यात्रा के लिए निकल पड़ेंगे? इसका उत्तर अगले दो दिन में मिल जाएगा.

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक जब पत्रकारों ने वित्त मंत्री से पूछा कि वो कितने समय तक तक रक्षा मंत्री रहेंगे. उन्होंने जवाब दिया, 'उम्मीद है कि बहुत दिनों तक नहीं.'

सरकार में कुछ पद खाली पड़े हैं – वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार है. विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन वन और पर्यावरण मंत्रालय भी देख रहे हैं. ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर शहरी मामलों का मंत्रालय भी संभाल रहे हैं. कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के पास सूचना और प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार है.

सबकी नजरें इस पर होंगी कि मोदी रक्षा मंत्रालय के लिए किसका चयन करते हैं. पार्टी के पास अनुभवी नेताओं की कमी है. ऐसा साल 2014 के आखिरी वक्त में भी दिखा था, जब मोदी ने गोवा से मनोहर पर्रिकर को रक्षा मंत्री बनाया था. वहीं बीजेपी से ताल्लुक नहीं रखने वाले सुरेश प्रभु को रेल मंत्री बनाया गया था.

सुरेश प्रभु की रेल मंत्रालय से छुट्टी लगभग तय है. सवाल ये है कि मोदी के सपने को पूरा करने के लिए रेल मंत्रालय किसे सौंपा जाएगा? ये हास्यास्पद भी है कि पर्रिकर और प्रभु के विकल्पों को इस आखिरी कैबिनेट विस्तार में जगह दी जाएगी, जबकि नवंबर, 2014 के पहले कैबिनेट विस्तार में दोनों को मंत्री बनाया गया था.

2019 के आम चुनाव की घोषणा से पहले मोदी सरकार के पास वादों को पूरा करने के लिए 18 महीने का वक्त है. इसलिए वो निकम्मे लोगों को सरकार से बाहर करेंगे और ऊर्जावान नेताओं को मंत्री बनाएंगे. प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंत्रियो के प्रदर्शन की समीक्षा की है. कैबिनेट में फेरबदल मोदी के लिए देश को ये संदेश देने का अवसर होगा कि वो प्रदर्शन और काम को तवज्जो देते हैं.

सत्ता के गलियारों में ये कानाफूसी भी है कि दो शीर्ष नेताओं ने मंत्रियों के निजी व्यवहार के बारे में विभिन्न स्त्रोतों से जानकारी जुटाई है. इनमें ऑफिस और ऑफिस से बाहर का व्यवहार शामिल है. यह कुछ लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है. हाल ही में मोदी ने मंत्रियो को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि वो आधिकारिक दौरों के दौरान पांच सितारा होटलों में रुकने की बढ़ती प्रवृत्ति से बाज आएं और पीएसयू की ओर से दी जाने वाली सुविधाएं लेने से बचें.

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नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी का मतलब है कि सरकार में जेडीयू को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा. जेडीयू के राज्य सभा सांसद आरसीपी सिन्हा को कैबिनेट में लिया जाना लगभग तय है. वो नीतीश के खास माने जाते हैं. एआईएडीएमके भी मोदी सरकार का हिस्सा बन सकती है.

अमित शाह ने देशभर में अपनी सौ दिन का दौरा पूरा कर लिया है. अब उनके पास मुख्यमंत्रियों और राज्यों से केंद्र में मंत्री बनाए गए नेताओं के समर्थन या विरोध में लहर का पूरा अंदाजा है. पिछले कुछ दिनों में उन्होंने दिल्ली स्थित अपने घर पर आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों से मुलाकात की है. जिन मंत्रियों को आमने-सामने की बैठक के लिए बुलाया गया, उनको लेकर कयासबाजी भी जोरों पर है.

वो संगठन में भी बदलाव कर सकते हैं. कुछ मंत्रियों को संगठन के काम में लगाया जा सकता है ताकि 2019 में लोक सभा की 350 सीटें जीतने के लक्ष्य पर काम किया जा सके.

इसके अलावा राजभवनों में भी सात नियुक्तियां की जानी हैं. इन्हें भरे जाने की जरूरत है और कई वरिष्ठ नेता इस पद की आस लगाए बैठे हैं.

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