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उपचुनावों में लगातार मिल रही हार के बाद बहुमत खोने की दहलीज पर खड़ी BJP

मोदी सरकार के इन 4 साल में जहां भी लोकसभा उपचुनाव हुए वहां बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा है

FP Staff Updated On: Jun 01, 2018 01:39 PM IST

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उपचुनावों में लगातार मिल रही हार के बाद बहुमत खोने की दहलीज पर खड़ी BJP

साल 2014 में केंद्र में सरकार बनाने के बाद बीजेपी को लगातार उपचुनावों में हार का सामना करना पड़ रहा है. गुरुवार को लोकसभा और विधानसभा के 14 सीटों के रिजल्ट आए जिनमें पार्टी को 11 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा. बीते महीने संपन्न लोकसभा उपचुनावों की बात करें तो बीजेपी को 4 में से दो सीटें खोनी पड़ी जबकि एक पर खुद और दूसरी जीत में सहयोगी पार्टी का सहारा लेना पड़ा.

नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 2014 में 282 सीटें झटकने वाली बीजेपी 1984 के बाद के 30 साल में अपने बूते संसद में बहुमत जुटा लाई थी. उसके बाद पार्टी ने कई राज्यों में जीत दर्ज की. पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह गाहे-बगाहे अपनी सभाओं में इस जीत का श्रेय लेते भी दिखते हैं. पर अब हालात बदल रहे हैं.

साल 2014 के बाद परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी हैं कि मोदी सरकार के इन 4 साल में जहां भी लोकसभा उपचुनाव हुए वहां बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा है.

केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद कुल 27 सीटों पर उपचुनाव हुए हैं, जिनमें से 14 सीटें बीजेपी के कब्जे में थीं लेकिन अब इनमें से महज 5 सीटें ही बच पाई हैं. आंकड़ों पर गौर करें तो बीजेपी ने 9 सीटें गंवा दी हैं. यही वजह है कि लोकसभा में उसकी सीटों का आंकड़ा 282 से घटकर 273 रह गया है.

गुरुवार को आए नतीजों में विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा और विधानसभा की 14 सीटों में 11 सीटें जीतीं जबकि भगवा पार्टी और उसके सहयोगियों को केवल तीन सीटों पर सिमटना पड़ा. विपक्षी एकजुटता के कारण बीजेपी ने यूपी की चर्चित कैराना लोकसभा सीट को भी गंवा दिया.

गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार के बाद कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीट पर हार ने साफ कर दिया है कि अगले आम चुनावों में विपक्ष अगर एकजुट हो जाए तो यूपी में बीजेपी की चुनावी राह बड़ी मुश्किल हो जाएगी.

साल 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को यूपी की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 71 जबकि इसके सहयोगी अपना दल को दो सीटें हासिल मिली थीं लेकिन अगले लोकसभा चुनाव में ऐसा प्रदर्शन दोहराने के लिए बीजेपी को फिर से वोटों को एकजुट करने के प्रयास करने होंगे.

2018: 10 सीटों पर उपचुनाव

अलवर- बीजेपी की सीट, कांग्रेस की जीत

अजमेर- बीजेपी की सीट, कांग्रेस जीती

उलबेरिया- टीएमसी की सीट, बरकरार

कैराना- बीजेपी की सीट, आरएलडी की जीत

पालघर- बीजेपी की सीट, बरकरार

गोंदिया- भंडारा- बीजेपी की सीट, एनसीपी ने जीती

नगालैंड- एनडीपीपी की सीट, बरकरार

अररिया- आरजेडी की सीट, बरकरार

फूलपुर- बीजेपी की सीट, एसपी ने छीनी

गोरखपुर- बीजेपी की सीट, एसपी जीती

 

2017: चार सीटों पर उपचुनाव

अमृतसर- कांग्रेस जीती, बरकरार

गुरदासपुर- बीजेपी की जीत, कांग्रेस जीती

श्रीनगर- पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस की जीत

मलप्पुरम- आईयूएमएल की सीट, पार्टी ने बरकरार रखी

 

2016: पांच सीटों पर उपचुनाव

कूचबिहार- तृणमूल की जीत, बरकरार

तुरा- एनपीपी जीती, बरकरार

शहडोल- बीजेपी जीती, बरकरार

तमलुक- तृणमूल जीती, बरकरार

लखीमपुर- बीजेपी की सीट, बरकरार

 

2015: तीन सीटों पर उपचुनाव

रतलाम- बीजेपी की सीट, कांग्रेस ने छीनी

बनगांव- टीएमसी की सीट, पार्टी ने बरकरार रखी

वारंगल- टीआरएस की सीट, पार्टी ने बरकरार रखी

 

2014: पांच सीटों पर उपचुनाव

वडोदरा- बीजेपी जीती, बरकरार

बीड- बीजेपी जीती, बरकरार

मैनपुरी- एसपी जीती, बरकरार

मेंडक- टीआरएस जीती, बरकरार

कंधमाल- बीजेडी की सीट, बरकरार

आगे कैसा होगा असर?

लोकसभा उपचुनावों में अपनी तीन में से एक सीट बरकरार रखने वाली बीजेपी के पास संसद के 539 सदस्यीय लोकसभा में 272 सीटों का बहुमत रह गया है.

लोकसभा में 543 निर्वाचित सदस्य हैं किंतु इसकी चार सीटों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. कर्नाटक के तीन सदस्य त्यागपत्र दे चुके हैं, जबकि कश्मीर की अनंतनाग सीट खाली पड़ी है. अनंतनाग सीट के लिए पिछले साल मई में होने जा रहे उपचुनाव को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया गया था. इसके कारण बहुमत के लिए संख्याबल घटकर 270 रह गया है.

बहरहाल यदि व्यावहारिक रूप से देखें तो बीजेपी के पास 274 सदस्यों का संख्या बल है क्योंकि दोनों मनोनीत सदस्य भी उसी से जुड़े हैं. बीजेपी ने 2014 लोकसभा चुनाव में 282 सीटें जीती थीं पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित कई उपचुनावों के बाद इसकी सीटों में कमी आई है.

इससे सरकार पर बहुत मामूली असर पड़ेगा क्योंकि बीजेपी वाली एनडीए के पास करीब 315 सीटें हैं. चार लोकसभा सीटों के लिए 28 मई को उप चुनाव हुए थे. आम चुनाव में बीजेपी ने इनमें से तीन जीती थीं लेकिन उप चुनाव में वह अपनी एक ही सीट बरकरार रख पाई और उसे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में एक-एक सीट गंवानी पड़ी.

(इनपुट भाषा से)

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