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कैराना, नूरपुर के अलावा इन जगहों पर 28 को उपचुनाव, जानिए पूरा सियासी समीकरण

सबकी निगाहें उपचुनाव पर टिकी हैं क्योंकि कर्नाटक चुनाव के बाद विपक्षी पार्टियों में एकजुटता देखी जा रही है

Updated On: May 25, 2018 05:12 PM IST

FP Staff

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कैराना, नूरपुर के अलावा इन जगहों पर 28 को उपचुनाव, जानिए पूरा सियासी समीकरण

देश के कई राज्यों में 28 मई को उपचुनाव है. चुनाव के नतीजे 31 मई को घोषित किए जाएंगे. जिन विधानसभा/लोकसभा सीटों पर उपचुनाव है उनमें कैराना, नूरपुर, पालघर, भंडारा-गोंदिया, जोकीहाट और थराली के नाम हैं.

कैराना/नूरपुर के वोटरों का बीजेपी से लगाव?

बात सबसे पहले कैराना सीट की. आंकड़ों पर गौर करें तो यहां 16 लाख 9 हजार 580 मतदाता हैं. कैराना लोकसभा सीट पर दलित, मुस्लिम, गुर्जर व जाट के साथ ही ओबीसी और ईबीसी के करीब पांच लाख वोट हैं. इनमें सैनी व कश्यप वोटरों की संख्या एक-एक लाख से अधिक है. वहीं, प्रजापति, लुहार, दर्जी, पाल, विश्वकर्मा समेत विभिन्न बिरादरी की अच्छी खासी वोट है. माना जाता है कि यह वोट बैंक बीजेपी की ओर रहता है.

इस बार बीजेपी प्रत्याशी मृगांका सिंह के सामने गठबंधन प्रत्याशी तबस्सुम हसन कांटे की टक्कर में हैं लेकिन मुस्लिम दलितों के साथ ही ओबीसी और ईबीसी वोट बैंक की चुप्पी भी चौंकाने वाले परिणाम दे सकती है. चुनाव में दंगा, पलायन व हिंदुत्व के बूते मैदान में डटी बीजेपी का टारगेट ओबीसी और ईबीसी वोट का मतदान प्रतिशत बढ़ाना है.

कैराना में आरएलडी प्रत्याशी तबस्सुम और दिवंगत सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह (बीजेपी प्रत्याशी) के बीच जहां सीधी टक्कर है, वहीं नूरपुर में एसपी ने नईमुलहसन को मैदान में उतारा तो बीजेपी ने अवनी सिंह पर भरोसा जताया है.

पालघर में उत्तर भारतीयों का मुद्दा

मुंबई के पालघर लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी और शिवसेना आमने सामने है. पालघर की 6 विधानसभाओं में से 3 पर बहुजन विकास पार्टी का कब्जा है. ऐसा कहा जाता है कि इलाके में उत्तर भारतीयों को बसाने में इनकी अहम भूमिका है और स्थानीय निकाय पर भी इसी पार्टी का कब्जा है. चुनाव प्रचार के दौरान उत्तर भारतीयों का मुद्दा जिस प्रकार उछला उससे तय है कि यही वोटर रिजल्ट की दिशा भी तय करेंगे.

भंडारा सीट पर कांग्रेस-एनसीपी एकसाथ

महाराष्ट्र के भंडारा गोंदिया सीट से बीजेपी के हेमंत पटले उम्मीदवार हैं. पालघर से शिवसेना ने श्रीनिवास वंगा को अपना उम्मीदवार बनाया है. पालघर सुरक्षित सीट है. वहीं भंडारा गोंदिया सीट नाना पटोले के इस्तीफे के बाद खाली पड़ी थी. बीते तीन मई को श्रीनिवास ने शिवसेना से जुड़ने का फैसला किया.

कांग्रेस और एनसीपी के बीच हुए चुनावी समझौते के अनुसार, कांग्रेस पालघर सीट पर और एनसीपी भंडारा-गोंदिया सीट पर अपने प्रत्याशी को खड़ा किया है.

चिंतामन वंगा का इस साल जनवरी में निधन होने की वजह से पालघर लोकसभा सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है. उपचुनाव के लिए मतदान 28 मई को होगा. मतगणना 30 मई को की जाएगी.

जोकीहाट में मुस्लिम बनाम मुस्लिम की लड़ाई

जोकीहाट विधानसभा उपचुनाव के लिए 28 मई को मतदान और 31 मई को काउटिंग है. जेडीयू से सरफराज आलम जोकीहाट से विधायक थे. आरजेडी के टिकट पर अररिया लोकसभा सीट जीतने के बाद ये सीट खाली हो गई है. जोकीहाट विधानसभा में कुल 2,70,415 मतदाता हैं. इनमें से 1,44,176 पुरुष और 1,26,225 महिला मतदाता हैं.

जोकीहाट सीट पर एनडीए की ओर से जदयू प्रत्याशी मो. मुर्शीद आलम हैं. मुर्शीद पहले भी दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. 2005 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर और 2010 में एनसीपी के टिकट पर सिकटी विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं. आरजेडी की ओर से सांसद सरफराज आलम के भाई शहनवाज चुनावी मैदान में हैं. इन दोनों के अलावा निर्दलीय उम्मदीवार शब्बीर अहमद और प्रसेनजीत कृष्णा ने नामांकन दाखिल किया है.

थराली में कांग्रेस-बीजेपी में टक्कर

28 मई को उत्तराखंड के थराली विधानसभा में उपचुनाव होना है. इसके लिए बीजेपी और कांग्रेस ने एड़ी चोटी का जोर लगाया हुआ है. थराली विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा था लेकिन मगन लाल शाह की मृत्यु के बाद अब ये सीट खाली है. बीजेपी ने इस सीट से दिवंगत विधायक की धर्मपत्नी को टिकट दिया है.

वहीं कांग्रेस ने प्रोफेसर जीत राम आर्य को अपना प्रत्याशी बनाया है. कांग्रेस उत्तराखंड में पहले लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव में करारी हार झेल चुकी है. उपचुनाव के जरिए कांग्रेस खुद को मनोवैज्ञानिक तरीके से मजबूत करने में भी लग गई है.

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