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शरीर लंदन में और दिल कर्नाटक में: भगवान बसवेश्वर के जरिए जातीय राजनीति तोड़ने का शंखनाद

लंदन से लिंगायतों के सबसे बड़े गुरु और समाज सुधारक बसवेस्वर गुरु के योगदान को सराह कर पीएम ने लंदन से ही लिंगायत को साधने की कोशिश कर दी.

Updated On: Apr 19, 2018 03:10 PM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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शरीर लंदन में और दिल कर्नाटक में: भगवान बसवेश्वर के जरिए जातीय राजनीति तोड़ने का शंखनाद

लंदन के वेस्टमिनिस्टर सेंट्रल हॉल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय समुदाय के साथ संवाद कर रहे थे. लेकिन, उनका एक-एक जवाब भारत के लोगों को ध्यान में रखकर दिया जा रहा था. मोदी की तरफ से दिए जा रहे हर जवाब में भारत के भीतर उठ रहे सवालों का जवाब छिपा था. इस पूरे अभियान को अगले लोकसभा चुनाव से पहले एक प्लेटफॉर्म बनाने की कोशिश के तौर पर देखा गया जिसमें खुद प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार के कामों को जनता के सामने रखने की पूरी कोशिश की.

लेकिन, इस संवाद में उन्होंने बड़ा संदेश दिया. यह संदेश कर्नाटक को लेकर था. भले ही प्रधानमंत्री ने औपचारिक तौर पर कर्नाटक विधानसभा चुनाव में प्रचार का आगाज नहीं किया है, लेकिन, लंदन से लिंगायतों के सबसे बड़े गुरु और समाज सुधारक बसवेस्वर गुरु के योगदान को सराह कर उन्होंने लंदन से ही लिंगायत को साधने की कोशिश कर दी. विदेशी धरती से मोदी का यह बयान कर्नाटक विधानसभा चुनाव में लिंगायत को लुभाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

प्रधानमंत्री ने टेम्स नदी के तट पर स्थित दार्शनिक और समाज सुधारक बसवेश्वर की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए और श्रद्धांजलि अर्पित की. इस मौके पर उन्होंने कहा कि बसवेश्वर के आदर्श दुनियाभर के लोगों को प्रेरित करते हैं. ट्विटर पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा, ‘यूके के दौरे में भगवान बसवेश्वर को श्रद्धांजलि देना सम्मान की बात है. भगवान बसवेश्वर के आदर्श दुनियाभर के लोगों को प्रेरित करते हैं.’ कार्यक्रम का आयोजन द बसवेश्वर फाउंडेशन ने किया था. यह ब्रिटेन का गैर सरकारी संगठन है, उसी ने बसवेश्वर की प्रतिमा की स्थापना की थी.

बाद में मोदी ने सेंट्रेल हॉल में उन्हें याद करते हुए महान समाज सुधारक बताया. मोदी ने गुरु बसवेश्वर को भगवान बसवेश्वर कहकर बार-बार उनके प्रति प्रेम और सम्मान के भाव को दिखाने की पूरी कोशिश की.

उन्होंने नाम लिए बगैर एक ही परिवार के लोगों को याद करने का जिक्र भी किया. उनका इशारा गांधी-नेहरू परिवार पर था. मोदी ने अपने संवाद के दौरान इस बात का जिक्र किया कि कैसे भगवान बसवेश्वर को लोग भूल गए हैं लेकिन, एक ही परिवार के लोगों को याद करते हैं. ऐसा कर प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को लिंगायत विरोधी बताने की कोशिश भी की.

12 वीं सदी के महापुरुष बसवेश्वर गुरु ने अपने समय में समाज सुधार के लिए बड़ा काम किया था. उस वक्त उन्होंने अनुभव मंडपम नाम की व्यवस्था की थी. इसमें उस जमाने में समाज के हर वर्ग के प्रतिनिधि हुआ करते थे. इसके अलावा महिला प्रतिनिधि भी इसमें रहती थी. अनुभव मंडपम के माध्यम से उस वक्त समाज में व्यापक बदलाव और सामाजिक बुराईयों को खत्म करने की कोशिश की गई थी.

लिंगायत धर्म के संस्थापक बसवेश्वर गुरु को लंदन के सेंट्रल हॉल में याद कर प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के उस दांव की हवा निकालने की कोशिश की, जिससे बीजेपी सबसे ज्यादा परेशान हो रही है. कर्नाटक में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. 12 मई को वोटिंग होनी है. बीजेपी ने लिंगायत समुदाय के कद्दावर नेता वी एस येदियुरप्पा को फिर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है. लेकिन, इस मजबूत नेता के चेहरे के सामने होने के बावजूद उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में कैबिनेट ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा है जिसमें लिंगायत और वीरशैव लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने का आग्रह किया गया है. इस कदम को बीजेपी के लिंगायत वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी की असल चिंता इसी बात को लेकर है. क्योंकि लिंगायत वोट खिसकने पर पार्टी को कर्नाटक में नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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