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6 राज्यों में लोकसभा-विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिए मतदान

लोकसभा की 4 और विधानसभा की 8 सीटों पर हो रहा है मतदान

Updated On: Nov 20, 2016 06:17 PM IST

FP Staff

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6 राज्यों में लोकसभा-विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिए मतदान

नोटबंदी के फैसले के बाद आज देश के 6 राज्यों में लोकसभा और विधानसभा सीटों के उपचुनाव हो रहे हैं. लोकसभा की 4 और विधानसभा की 8 सीटों पर मतदान हो रहा है. सुबह 7 बजे से ही मतदान शुरू हो गया है. मध्य प्रदेश ,पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, असम, त्रिपुरा और तमिलनाडु की लोकसभा-विधानसभा सीटों पर उपचुनाव है.

ये उपचुनाव मोदी सरकार के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं क्योंकि इनमें दो लोकसभा सीटें अभी बीजेपी के पास हैं. चुनाव प्रचार में नोटबंदी का असर देखा जा सकता है. मध्य प्रदेश की शहडोल लोकसभा सीट और नेपानगर की विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है. पश्चिम बंगाल के कूचबिहार और तमलुक लोकसभा सीटों के अलावा छह विधानसभा सीटों पर चुनाव हैं.

नतीजों पर सबकी नजर

नोटबंदी के ऐलान के बाद इन दो राज्यों के नतीजों पर सबकी नजर रहेगी. पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी की सुप्रीमो और स्टार प्रचारक ममता बनर्जी दिल्ली में नोटबंदी के खिलाफ घेराबंदी में जुटी हुई हैं. कूचबिहार में टीएमसी सांसद रेणुका सिन्हा की मौत की वजह से उपचुनाव हो रहा है.

वहीं मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है, जिस पर आरक्षित सीट जीतने का दबाव होगा. हालांकि बीजेपी अपनी जीत को पक्का मान रही है. लेकिन कांग्रेस का दावा है कि नोटबंदी के फैसले से मतदाताओं पर असर पड़ेगा. आम आदमी और किसान बैंकों की लाइन में एक फैसले की वजह से खड़ा हुआ है. वहीं पुडुचेरी में कांग्रेस अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है. चीफ मिनिस्टर वी नारायणस्वामी खुद यहां चुनाव मैदान में हैं. कांग्रेस ने पुडुचेरी में बहुमत हासिल करने के बाद सरकार बनाई थी.

नोटबंदी पर जनमत संग्रह 

उपचुनाव के नतीजे 22 नवंबर को आएंगे. राजनीतिक दल इन नतीजों को नोटबंदी के फैसले पर जनमत संग्रह के रूप में भी देख सकते हैं. लेकिन उपचुनाव के अलावा सबकी नजर चुनाव आयोग पर है.

माना जा रहा है कि चुनाव आयोग जल्द ही पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकता है. यूपी, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही इन राज्यों में सियासत अपने चरम पर होगी और नोटबंदी के मुद्दे को राजनीतिक दल अपनी-अपनी तरह से हथियार बनाएंगे.

नोट बदलने को लेकर स्याही के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग पहले ही अपनी नाराजगी जता चुका है. उसका मानना है कि स्याही के इस्तेमाल से वोटर का अधिकार चुनाव में प्रभावित हो सकता है. ऐसे में चुनाव में नोटबंदी का कलर अभी से चढ़ना शुरू हो चुका है.

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