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JDS के साथ कर्नाटक में गठजोड़ नहीं करेंगी मायावती

यूपी के फूलपुर और गोरखपुर सीटों पर जब से जीत तय हुई है तब से माया ने कर्नाटक चुनावों पर चुप्पी साध ली है

FP Staff Updated On: Apr 02, 2018 05:07 PM IST

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JDS के साथ कर्नाटक में गठजोड़ नहीं करेंगी मायावती

जनता दल सेकुलर (जेडीएस) हासन में एक बड़ी रैली करने जा रही है. हासन गौड़ा खानदान का गढ़ माना जाता है जहां से देवगौड़ा और एचडी कुमारस्वामी जैसे नेता आते हैं. रैली की खास बात यह है कि इसमें बीएसपी सुप्रीमो मायावती शामिल नहीं होंगी, जबकि पूर्व में जेडीएस और बीएसपी के बीच गठजोड़ की खबरें आ चुकी हैं.

पिछले हफ्ते राहुल गांधी की यहां रैली हुई थी जिसमें अच्छे खासे लोग जुटे थे. उसी के जवाब में जेडीएस भी रैली करने जा रही है जिसमें उसकी कोशिश 3-4 लाख लोगों को जुटाने की है.

यूपी चुनाव का रिजल्ट बना रोड़ा

रैली में मायावती नहीं आएंगी इसे लेकर कर्नाटक की राजनीति में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एलायंस की यूपी के फूलपुर और गोरखपुर सीटों पर जब से जीत तय हुई है तब से वे कर्नाटक चुनावों पर चुप्पी साध ली है. कुछ माह पहले मायावती ने कांग्रेस को यह कहकर चौंका दिया था कि उनकी पार्टी देवगौड़ा की जेडीएस पार्टी के साथ गठजोड़ करेगी. यह बड़ी घटना इसलिए भी होती क्योंकि 1996 के बाद पहली बार मायावती किसी पार्टी के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करने जा रही थीं.

गठजोड़ को लेकर काफी गदगद देवगौड़ा की पार्टी ने कुल 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा में मायावती को 20 सीटों पर लड़ाने की घोषणा कर दी थी. इस ऐलान के एक हफ्ते बाद मायावती और देवगौड़ा ने बंगलोर में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए सिद्धारमैया सरकार को उखाड़ फेंकने की उम्मीद जताई थी.

महंगा होगा कांग्रेस की खिलाफत

दूसरी ओर कांग्रेस ने इस रैली के बाद मायावती को कांग्रेस का एजेंट करार दिया था और कहा था कि देवगौड़ा के साथ मिलकर इनकी योजना बीजेपी को जिताने की है. लगभग एक महीने बाद बीएसपी-एसपी गठबंधन फूलपुर और गोरखपुर में जीत गया और इसी के साथ मायावती ने चुप्पी साध ली. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मायावती अब समझ गई हैं कि कर्नाटक में कांग्रेस की खिलाफत करना अंततः बीजेपी को फायदा पहुंचाएगा. अपने प्रदेश यूपी में जीत का लाभ बनाए रखने के लिए अब वे यूपी पर ही पूरी तरह से ध्यान देने लगी हैं.

उधर कर्नाटक की बीएसी यूनिट तब हैरत में पड़ गई थी जब देवगौड़ा ने बीएसपी से गठजोड़ का ऐलान किया था. बीएसपी के एक सीनियर नेता ने कहा, बहनजी ने हमसे बिना राय-मशविरा किए गठबंधन किया. ऐसे में हमें चुप ही रहना था. कर्नाटक और यूपी में हमारी सबसे बड़ी विरोधी पार्टी बीजेपी है न कि कांग्रेस. अगर विधानसभा का रिजल्ट त्रिशंकु बनता है तो वे (जेडीएस) के साथ चले जाएंगे.

अगड़ी जातियों की पार्टी है जेडीएस

कर्नाटक में जेडीएस को अगड़ी जातियों की पार्टी माना जाता है क्योंकि बड़े-बड़े खेतीहर और धनाढ्य इसे समर्थन देते हैं. ऐसे में बीएसपी के साथ गठबंधन उचित जान नहीं पड़ता क्योंकि इसे दलितों का समर्थन मिलता रहा है. दिलचस्प बात यह है कि गठबंधन के फैसले के एक महीने बाद भी बीएसपी ने अबतक उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं की है.

कर्नाटक के बीएसपी नेताओं का कहना है कि उन्हें कुछ नहीं पता कि आगे क्या होने वाला है क्योंकि सारे फैसले लखनऊ से लिए जाते हैं. अगर दोनों पार्टियों में गठबंधन होता है तो जेडीएस और बीएसपी दोनों के लिए फायदे का सौदा होगा. अगर नहीं होता है तो सत्तारूढ़ कांग्रेस को इससे थोड़ा घाटा उठाना पड़ सकता है.

(न्यूज18 के लिए डीपी सतीश की रिपोर्ट)

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