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भारत के लिए म्यांमार से दोस्ताना संबंध बनाना कितना जरूरी?

द्विपक्षीय मामलों पर केंद्रित प्रधानमंत्री मोदी का म्यांमार का पहला राजकीय दौरा होगा

shubha singh Updated On: Aug 31, 2017 10:17 AM IST

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भारत के लिए म्यांमार से दोस्ताना संबंध बनाना कितना जरूरी?

बीते तीन सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सभी पड़ोसी देशों का दौरा किया है, सिवाय मालदीव के. 5 से 7 सितंबर के बीच प्रधानमंत्री म्यांमार के दौरे पर होंगे. द्विपक्षीय मामलों पर केंद्रित यह उनका म्यांमार का पहला राजकीय दौरा होगा. इससे पहले 2014 में वो ईस्ट एशिया समिट (सम्मेलन) में शिरकत करने के लिए ‘ने पई डॉव’ गए थे. प्रधानमंत्री चीन के शियामेन में 3-5 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में भागीदारी करके म्यांमार जाएंगे.

मोदी का यह दौरा खास अहमियत रखता है क्योंकि म्यांमार दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों में मेल-जोल बढ़ाने की एक्ट एशिया नीति के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है. हालांकि, नई दिल्ली की ओर से म्यांमार के दौरे ज्यादा नहीं हुए हैं लेकिन म्यांमार में हुए चुनावों के बाद पिछले साल भारत ने वहां के शीर्ष के नेताओं की मेजबानी की थी. म्यांमार की प्रसिद्ध नेता और स्टेट काउंसलर आंग सान सू की बिमस्टेक सम्मेलन में शिरकत करने के लिए 2016 के अक्टूबर में भारत आई थीं. उनकी भारत यात्रा से पहले 2016 के अगस्त में म्यांमार के राष्ट्रपति यू तिन क्वा भारत के राजकीय दौर पर आए थे.

म्यांमार के राजकाज में अब भी सेना का है दबदबा

म्यांमार से भारत के दौरे पर आने वाले अन्य वरिष्ठ नेताओं में वहां के सेना प्रमुख सीनियर जेनरल मिन आंग लैंग शामिल हैं. लैंग जुलाई, 2017 में आठ दिन के भारत दौरे पर आए थे. हालांकि म्यांमार धीरे-धीरे चुनावी लोकतंत्र होने की तरफ कदम बढ़ा रहा है लेकिन वहां के राजकाज में अब भी सेना का दबदबा जारी है. म्यांमार के सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री मोदी, रक्षा मंत्री अरुण जेटली और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की.

Myanmar

म्यांमार में लोकतंत्र मजबूत हुआ है लेकिन अब भी वहां के राजकाज में सेना का दखल है

म्यांमार के सेना प्रमुख के साथ भारत में हुई बातचीत के दौरान दोनों पक्ष व्यापार और देश-विरोधी तत्वों की गतिविधियों पर रोक लगाने के उपायों के मामले में आपसी सहयोग बढ़ाने पर राजी हुए. भारत ने वादा किया कि वह म्यांमार की सेना को आधुनिक बनाने में मदद देगा. भारत म्यांमार के रक्षा-विभाग के अधिकारियों को प्रशिक्षण दे रहा है. साथ ही रक्षा संबंधी कुछ सामानों की म्यांमार को आपूर्ति की जा रही है.

भारत ने रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर म्यांमार का पुरजोर समर्थन किया है. इस मुद्दे पर मानवाधिकार समूह और पश्चिमी देशों की सरकारों ने म्यांमार की आलोचना की है. रखाइन सूबे में पिछले हफ्ते हुई हिंसा और हमले की घटना से संबंधित खबरों पर भारत ने गंभीर चिंता जताई है. हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए म्यामांर सरकार से एक आधिकारिक बयान में कहा गया- 'हमें उम्मीद है कि इन अपराधों के दोषियों को सजा मिलेगी. चुनौती की इस घड़ी में हमें अपने साथ समझें.'

बहुत संभावना है, म्यांमार अपने इस वादे को फिर दोहराए कि वह अपनी सरजमीं का इस्तेमाल बागियों को भारत-विरोधी गतिविधियों में नहीं करने देगा. साल 2015 के जून में भारत के विशेष सुरक्षाबलों ने सीमा से लगते इलाके में बागियों के एक शिविर को नष्ट किया था. हालांकि म्यांमार की सरकार ने बागियों से निपटने में भारत का सहयोग किया था लेकिन उसे भारतीय राजनेताओं के एक बर्ताव पर बड़े संकोच का सामना करना पड़ा. दरअसल भारतीय राजनेताओं ने सार्वजनिक रुप से कहा कि भारत की सेना ने म्यांमार की सीमा में घुसकर बागियों के ठिकानों को निशाना बनाया. यह मुद्दा आंग सान सू की के पिछले दौरे के वक्त उठा था और दोनों देशों ने बगावती कारस्तानियों और आतंकवाद के चंगुल से लड़ने के अपने साझे संकल्प का इजहार किया.

EDS PLS TAKE A NOTE OF THIS PTI PICK OF THE DAY:::::::::: Hamburg : Prime Minister Narendra Modi and Chinese President Xi Jinping exchange greetings at the BRICS leaders' informal gathering, in Hamburg, Germany on Friday. PTI Photo / Twitter (PTI7_7_2017_000125B)(PTI7_7_2017_000236B) *** Local Caption ***

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3-5 सितंबर तक होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन जाएंगे

भारत म्यांमार के साथ व्यापार करने वाले टॉप 5 देशों में से एक

भारत और म्यामांर के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ते हुए 2015-16 में 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है. भारत म्यांमार के साथ व्यापार करने वाले शीर्ष के पांच देशों में एक है. म्यांमार से भारत मुख्य रुप से दाल और इमारती लकड़ियों का आयात करता है. भारत म्यांमार से सबसे ज्यादा आयात करने वाले शीर्ष के सात देशों में एक है. लेकिन भारत म्यांमार के दो अन्य पड़ोसी देश चीन और थाइलैंड से इस मामले में पीछे है. म्यांमार के बाजार में अपनी मौजूदगी जताने के लिहाज से ऑस्ट्रेलिया, ग्रेट ब्रिटेन और नार्वे जैसे देशों जितनी कामयाबी उसे नहीं मिली है. बुनियादी ढांचे की कमी सीमा-क्षेत्र से होने वाले व्यापार में एक बड़ी बाधा है. म्यांमांर की अर्थव्यवस्था विदेशी निवेश के लिए खुल चुकी है लेकिन भारत का निजी क्षेत्र वहां नई संभावनाएं ढूंढ़ने के मामले में अभी पीछे है.

साथ ही, एक जरुरत यह भी है कि भारत की आधिकारिक नीति पड़ोसी देशों के प्रति संवेदनशील हो. सरकार ने इस साल म्यांमार से होने वाले दालों के आयात को सीमित कर दिया है क्योंकि दालों का रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन हुआ था. इससे म्यांमार के दाल-उत्पादकों पर असर पड़ा. इस महीने की शुरुआत में सरकार ने निर्देश जारी किए कि म्यांमार से तुअर दाल 2 लाख टन से ज्यादा आयात नहीं किया जायेगा. मूंग और काला चना के आयात का कोटा भी कम किया गया है. पिछले साल भारत ने म्यांमार से 7 लाख टन तुअर दाल आयात किया था. म्यांमार से निर्यात की जाने वाली चीजों में दाल अहम है. भारत परंपरागत रुप से म्यांमार के दाल-निर्यात का मुख्य बाजार रहा है. आयात पर लगी बाधा से म्यांमार के दाल-बाजार पर गहरा असर हुआ है.

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रोहिंग्या मुस्लिमों के मुद्दे पर भारत ने म्यांमार का पुरजोर तरीके से साथ दिया है

म्यांमार को 2 अरब डॉलर की मदद देने का वादा

भारत ने म्यांमार को विकास-कार्यों में मदद के लिए 2 अरब डॉलर देने का वादा किया है लेकिन परियोजनाओं के अमल में देरी हो रही है. भारत सरकार की ओर से म्यांमार में चलाई जा रही पहली बड़ी परियोजना का नाम कलादन मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट है. इस परियोजना का एक हिस्सा सिट्टवे डीप वाटर पोर्ट (बंदरगाह) है जिसे अब जल्दी ही पूरा कर लिया जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 सितंबर को ‘ने पइ ताव’ पहुंचेंगे और आंग सान सू की से बातचीत करेंगे. वो राष्ट्रपति यू तिन क्याव से भी भेंट करेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री यागोन और बागान जाएंगे. द्विपक्षीय यात्रा से रणनीतिक रूप से अहम पूर्वी एशिया के इस पड़ोसी देश से राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों में मजबूती आनी चाहिए.

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