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तुष्टीकरण की दो नावों पर ममता सवार, कभी बांटी गीता कभी बैन की दुर्गा पूजा

मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोपों से घिरी ममता अब हिंदुत्व की छांव तले सियासत की जमीन तलाश रही हैं

Updated On: Jan 09, 2018 10:38 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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तुष्टीकरण की दो नावों पर ममता सवार, कभी बांटी गीता कभी बैन की दुर्गा पूजा
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बीजेपी की रणनीति की ये खासियत है कि वो विरोधी दलों की ताकत को ही उसकी कमजोरी भी बना देती है. यही पश्चिम बंगाल में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के साथ दिखाई दे रहा है. मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोपों से घिरी ममता अब हिंदुत्व की छांव तले सियासत की जमीन तलाश रही हैं. ममता बनर्जी का 'नरम हिंदुत्व' का चेहरा उनके हालिया क्रियाकलापों से दिखाई दिया. बीरभूम में ममता बनर्जी की इजाजत से टीएमसी ने ब्राह्मण सम्मेलन बुलाया. इस सम्मेलन में 8 हजार ब्राह्मणों को ममता बनर्जी की तरफ से भगवद्गीता भेंट की गई. इससे पहले ममता गंगासागर के दौरे पर जब गईं तो एक घंटा कपिलमुनि आश्रम में भी रुकी थीं. इसी तरह पुरी की यात्रा के दौरान जगन्नाथ मंदिर भी गई थीं.

mamta and mohan bhagwat

पंचायत चुनावों ने दिलाई हिंदू वोटों की याद

ममता का ये 'नरम हिंदुत्व' दरअसल हिंदुओं को खुद के सहिष्णु होने का संदेश देना माना जा रहा है. इसकी बड़ी वजह बीजेपी को ही माना जा सकता है. जिस बीजेपी पर ममता सांप्रदायिक होने का आरोप लगाती हैं उसी बीजेपी की बढ़ती ताकत से ममता खुद का झुकाव हिंदुत्व की तरफ दिखा रही हैं. दरअसल विधानसभा सीटों के उपचुनाव में बीजेपी भले ही हारी लेकिन उसके बढ़ते वोटों ने टीएमसी की नींद उड़ा दी है. अब पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में ममता बनर्जी की कोशिश है कि गांवों में बीजेपी को हिंदुत्व के नाम पर कमल खिलाने की जमीन न मिले.

तभी ममता ने ‘गाय कार्ड’ भी खेला. ममता ने ऐलान किया कि राज्य सरकार गांवों में गाय बांटेगी. गाय बांटने के पीछे लोगों को दूध के व्यवसाय से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दलील है. लेकिन इस तरीके से हिंदू वोटरों के घर में अपना संदेश देने की भी रणनीति है. ममता ये जानती हैं कि मुस्लिम वोट बैंक उनसे अलग नहीं जा सकता है. लेकिन यूपी और गुजरात विधानसभा चुनावों के नतीजे देखने के बाद वो पश्चिम बंगाल में बीजेपी की रणनीति को लेकर कोई रिस्क भी नहीं लेना चाहतीं. ऐसे में वो हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण करने की कोशिश में दिखाई देती हैं.

उसी कवायद में ब्राह्मण सम्मेलन बुलाकर 8 हजार ब्राह्मणों को गीता भी भेंट की गई है. जबकि इसके बाद मुस्लिम सम्मेलन और आदिवासी सम्मेलन भी आयोजित कराए जाएंगे.

Mamta_Modi

रणनीति बदलने पर क्यों मजबूर हुईं ममता?

ममता बनर्जी की बदलती रणनीति की असली वजह ग्रामीण इलाकों में बीजेपी का बढ़ता प्रभाव है जिसने टीएमसी की बेचैनी बढ़ा दी है. विधानसभा चुनाव, निकाय चुनाव और उपचुनावों के नतीजे पश्चिम बंगाल में बीजेपी के बढ़ते जनाधार का संकेत हैं. इसी तरह बीजेपी अगर अपना जनाधार बढ़ाती रही तो एक दिन वो भी पश्चिम बंगाल की जनता के लिए ठीक उसी तरह विकल्प बन सकती है जैसे वामदलों के बाद जनता ने टीएमसी पर भरोसा जताया.

लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में लोकसभा की दो सीटें जीती थीं जबकि विधानसभा चुनाव में तीन सीटें जीतकर खाता भी खोला. बीजेपी के लिए बड़ी बात ये थी कि उसका वोट प्रतिशत 4 फीसदी से बढ़कर 10 प्रतिशत हो गया. इस बार इस बार सबांग की सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को भले ही हार मिली लेकिन वो 37 हजार 476 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही.

निकाय चुनाव में भी बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहा. वो भले ही सत्ता में नहीं आई लेकिन सात नगरपालिकाओं की 148 सीटों में से 77 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही. यानी बीजेपी ने कांग्रेस और वामदल को पीछे छोड़ दिया.

Kolkata: Actress turned West Bengal BJP Mahila Morcha president Locket Chatterjee (L) with party workers celebrates the party's victory in Gujarat and Himachal Pradesh Assembly elections, outside the state party headquarters in Kolkata on Monday. PTI Photo (PTI12_18_2017_000090B)

ऐसे में पश्चिम बंगाल में धीरे धीरे बीजेपी तीसरे नंबर से दूसरे नंबर पर आने की जुगत में है. बीजेपी का सबसे बड़ा हथियार विकास के साथ हिंदुत्व भी है जबकि ममता बनर्जी पर मुस्लिम तुष्टीकरण के तमाम आरोप लगे हुए हैं.

दुर्गा पूजा पर ममता सरकार के फरमान से मचा बवाल

पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े त्यौहार दुर्गा पूजा के वक्त ममता सरकार के फरमान ने स्थानीय हिंदुओं में असंतोष पैदा करने का काम किया था. ममता सरकार ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए फरमान जारी किया था कि नवरात्र में रात दस बजे के बाद पंडालों में दुर्गा पूजा नहीं होगी. बात सिर्फ यहां तक नहीं रुकी. ममता सरकार ने कहा कि मुहर्रम के अगले दिन ही दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन होगा. जिस पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता सरकार को फटकार लगाई और पूछा था कि कानून व्यवस्था का बहाना बना कर दोनों समुदायों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है?

गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी के सोमनाथ मंदिर दर्शन की तस्वीर

गुजरात चुनाव में कांग्रेस की रणनीति के 'धर्मपरिवर्तन' को देखने के बाद अब ममता बनर्जी भी खुद को हिंदूवादी साबित करना चाहती हैं. तभी उनकी सरकार ने तारापीठ, तारकेश्वर और कालीघाट मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बोर्ड का गठन किया है. बहरहाल सारी कवायद चुनावों पर ही जा कर टिकती है. पश्चिम बंगाल में होने वाले पंचायत चुनावों से साल 2019 के लोकसभा चुनाव का मिज़ाज समझा जा सकेगा. यही बड़ी वजह है कि ममता बनर्जी पंचायत चुनाव में अब मंदिर-मस्जिद की परिक्रमा एक साथ करने के लिए तैयार हैं.

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