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BJP का नया हेडक्वार्टर मोदी-शाह की 'नई बीजेपी' का नमूना है

बदलाव को लेकर बीजेपी के नेताओं का रुख कभी नकारात्मक नहीं रहा है, लेकिन मोदी-शाह की जोड़ी आने के बाद इसने पूरी तरह नया स्तर हासिल कर लिया है

Sanjay Singh Updated On: Feb 20, 2018 11:37 AM IST

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BJP का नया हेडक्वार्टर मोदी-शाह की 'नई बीजेपी' का नमूना है

भारतीय जनता पार्टी ने अपना मुख्यालय नई दिल्ली में 11 अशोक रोड से छह, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर शिफ्ट कर लिया है.

यह केवल संयोग है कि अब तक बीजेपी का मुख्यालय अशोक रोड पर था, जिसका नामकरण प्राचीन भारत के महान शासक पर किया गया है. अब पार्टी का मुख्यालय दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर है, जिसका नामकरण भारत के शीर्ष राजनीतिक विचारकों में एक पर हुआ है. दीनदयाल उपाध्याय पार्टी के सबसे बड़े नेता भी हैं. लेकिन प्रतीकात्मक राजनीति में यह पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए बहुत संतुष्टि का विषय होगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1.70 लाख वर्ग फुट में फैले बीजेपी मुख्यालय का उद्घाटन किया, जो कि संघ परिवार द्वारा पैदा किए गए नेताओं में सबसे शक्तिशाली हैं, जो बदलते समय, बदलते विचारों और बदलती आकांक्षाओं के लिए शक्तिशाली वक्तव्य है, जिसका मकसद राजनीतिक साथियों और बाकी देश को मजबूत संदेश देना है.

इमारत का आकार, स्टाइल, डिजाइन, सजावट, भव्यता, आधुनिक संचार सुविधाओं की मौजूदगी और जिस रफ्तार से सात माला मुख्य इमारत और हर तरफ दो तीन इमारत समेत तीन खंड वाले इस बड़े परिसर का निर्माण और उद्घाटन हुआ है, वह बीजेपी की सोच में आए बड़े बदलाव का प्रतीक है.

अमित शाह कर रहे हैं भरपूर प्रचार

पूर्व की बीजेपी मितव्ययिता पर गर्व करती थी. पार्टी का वैचारिक संगठन आरएसएस अब भी कम खर्च में रहने और काम करने को महान मानता है. यह दूसरे राजनीतिक दलों के लिए भी सही था. समाजवाद के विचार से प्रेरित सभी दल केंद्र या राज्य सरकार से मिले बंगले या इमारत से ही काम करेंगे और नेता खादी कुर्ता और पायजामा में ही सार्वजनिक रूप से नजर आएंगे. बीजेपी का नया मुख्यालय इसका प्रतीक है कि भारत और उसका राजनीतिक नेतृत्व घिसी-पिटी समाजवादी विचारधारा से बाहर आ रहा है. एक तरह से यह मोदी के न्यू इंडिया और नए विश्वास और क्षमताओं का प्रतीक है.

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नरेंद्र मोदी-अमित शाह के अंदर काम करने वाली बीजेपी बड़े बयान देने से डरती नहीं है. मोदी ने जन सभा और राजनीतिक सम्मेलनों के आयोजनों का पूरा चेहरा बदल दिया है. 2014 का उनका चुनाव प्रचार अभियान बड़ा और स्टाइलिश था. इसमें संचार की आधुनिक तकनीकों का भरपूर उपयोग किया गया था. भारत में ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया था. अब कांग्रेस समेत दूसरे दल भी इसका अनुसरण कर रहे हैं.

दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर भव्य बीजेपी मुख्यालय मोदी-शाह का एक ऐसा काम है, जिसका दूसरे दल भी उचित समय पर अनुसरण करेंगे. शाह को ये दावा करने में डर नहीं लगा कि बीजेपी का मुख्यालय दुनिया के किसी भी राजनीतिक दल का सबसे बड़ा मुख्यालय है. वास्तव में उन्होंने धरती पर सबसे बड़ी पार्टी और सबसे बड़ा मुख्यालय होने का श्रेय लिया. वो आलोचकों और विरोधियों की प्रतिक्रियाओं को लेकर चिंतित नहीं हुए - क्यों गरीब देश में एक राजनीतिक दल धन और शक्ति का भोंडा प्रदर्शन कर रहा है.

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बीजेपी करती रही है बदलाव

यह ध्यान रखना चाहिए कि बदलाव को लेकर बीजेपी के नेताओं का रुख कभी नकारात्मक नहीं रहा है, लेकिन मोदी-शाह की जोड़ी आने के बाद इसने पूरी तरह नया स्तर हासिल कर लिया है. लालकृष्ण आडवाणी देश में डिजिटल डायरी और स्मार्ट फोन का उपयोग करने वालों पहले लोगों में शुमार हैं. वो हमेशा नई तकनीक को सीखने और चीजों को बेहतर ढंग से संगठित करने के लिए तैयार रहते थे. अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में यह सुनिश्चित किया कि भारत में हवाई अड्डों का रंग-रूप बदलकर इसे विश्वस्तरीय बनाया जाए. उन्होंने राजमार्गों और एक्सप्रेसवे का निर्माण इस तरह से किया कि उस पर वाहन चलाकर आनंद आने लगा. उन्होंने देश को चार-छह लेन वाले सुपर हाईवे से जोड़ने का काम शुरू किया. वाजपेयी ने ही 7 रेस कोर्स (अब लोक कल्याण मार्ग) पर प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास में कुछ नवीन बदलाव करवाए.

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लेकिन वाजपेयी-आडवाणी युग के दौरान, अशोक रोड पर पार्टी का मुख्यालय रूप और रंग के मामले में सबसे सामान्य था. मुख्यालय दिखने में आरएसएस स्वयंसेवक की तरह लगता था. 2009 में नितिन गडकरी के अध्यक्ष बनने पर बीजेपी मुख्यालय में चीजें बदलनी शुरू हुई. नेताओं के धोती-कुर्ता या कुर्ता-पायजामा पहनने के विपरीत गडकरी पतलून और आधी बांह की शर्ट पहनते थे. वो देर रात तक काम करते थे और बैठकें लेते थे. उन्होंने वो सफेद एंबेसडर कार भी छोड़ दी, जो कि अब तक पार्टी अध्यक्ष इस्तेमाल करते आए थे.

गडकरी ने पुराने मुख्यालय की आंतरिक संचरना में बदलाव शुरू किया. हालांकि बाहरी आवरण पहले जैसा ही रहा लेकिन, कांफ्रेंस रूम, अध्यक्ष और दूसरे पदाधिकारियों के कार्यालयों को आधुनिक बनाया गया. यह प्रक्रिया शाह के जमाने में भी जारी रही. आंतरिक सज्जा से मुख्यालय पार्टी कार्यालय की बजाए कॉरपोरेट ऑफिस की तरह दिखने लगा.

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लेकिन मोदी-शाह ने दी नई ऊंचाई

मोदी-शाह अब इसे पूरी तरह से नई ऊंचाई तक ले आए हैं. नया बीजेपी कार्यालय एक शीर्ष स्तर का कॉर्पोरेट हाउस या फिर आधुनिक सरकारी इमारत की तरह दिखता है. यह कुछ-कुछ संसद भवन परिसर के अंदर लाइब्रेरी बिल्डिंग की तरह दिखता है. कुल मिलाकर नया पार्टी मुख्यालय संसद में और देश में बदल रहे समीकरणों को दर्शाता है.

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विडंबना है कि लोकसभा में स्पष्ट बहुमत और राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को यूपीए सरकार द्वारा 2006 में तैयार भूमि आवंटन नियमों के तहत आवंटित भूमि के आकार के हिसाब से लाभ हुआ है. यह आवंटन लुटियंस दिल्ली में बंगला खाली करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुआ था.

दुर्भाग्य से, कांग्रेस 11 साल पहले उसके शासन में तैयार किए गए नियमों से बीजेपी को हुए फायदे का श्रेय नहीं ले सकती. कांग्रेस पर अब मध्य दिल्ली में चार सरकारी बंगलों को खाली करने का दबाव है- वर्तमान में कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड, सेवा दल का कार्यालय 26 अकबर रोड, यूथ कांग्रेस का कार्यालय- 5 रायसीना रोड और चाणक्यपुरी में सी-II/109 जहां फिलहाल सोनिया गांधी के करीबी सहयोगी विन्सेन्ट जॉर्ज रहते हैं.

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