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जनरक्षा यात्रा: केरल में जारी हिंसा के विरोध में अमित शाह की नई रणनीति

बीजेपी केरल में अपनी जड़े मजबूत करके खुद को विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश में है

Amitesh Amitesh Updated On: Oct 02, 2017 03:57 PM IST

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जनरक्षा यात्रा: केरल में जारी हिंसा के विरोध में अमित शाह की नई रणनीति

केरल में जारी हिंसा के विरोध में बीजेपी पदयात्रा कर रही है. बीजेपी की तरफ से शुरू हो रही इस यात्रा का नाम जनरक्षा यात्रा रखा गया है. जनरक्षा यात्रा 3 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक चलेगी. इसमें पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से लेकर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कई केंद्रीय मंत्री शिरकत करेंगे.

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर 14 अक्टूबर को इस यात्रा में भाग लेंगे. इसके अलावा अनंत कुमार से लेकर गिरिराज सिंह भी बीजेपी की यात्रा में एक-एक दिन शामिल होंगे.

कहां से कहां तक चलेगी यात्रा 

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह तीन अक्टूबर को कन्नूर जिले के पायनुरू से पदयात्रा की शुरुआत करेंगे. 17 अक्टूबर को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में यात्रा का समापन होगा. बीजेपी अध्यक्ष तिरुवनंतपुरम में समापन के दिन भी मौजूद  रहेंगे. इसके अलावा 5 अक्टूबर को मावलम में भी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह जनरक्षा यात्रा में भाग लेंगे और रैली को भी संबोधित करेंगे.

New Delhi: Union Minister of State for Environment, Forest and Climate Change (Independent Charge) Prakash Javadekar briefs the media on air pollution, in New Delhi on Dec 30, 2015. (Photo: IANS/PIB)

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने बताया कि ‘सीपीएम ने केरल में हिंसा का सत्र चला रखा है. इस हिंसा में संघ परिवार और बीजेपी के लोगों को निशाना बनाया जाता है, यहां तक कि कुछ जगहों पर तो कांग्रेस और सीपीआई के कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाया जा रहा है.’

जावडे़कर के मुताबिक, ‘पिछले 15 सालों में केरल में सीपीएम की तरफ से चलाए जा रहे हिंसा में 84 लोगों की हत्या हुई है. जबकि पी विजयन के नेतृत्व में नई सरकार आने के बाद तो अबतक मुख्यमंत्री पी विजयन के गृह जिले कन्नूर में ही 14 लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है.’

शांतिपूर्वक यात्रा का वादा

बीजेपी ने साफ कर दिया है कि केरल की यात्रा लोकतांत्रिक तरीके से और शांतिपूर्वक की जाएगी. कोशिश हिंसा को अहिंसा के रास्ते से परास्त करने की है. प्रकाश जावडे़कर ने आरोप लगाया कि केरल में बीजेपी की बढ़ती ताकत से सीपीएम परेशान है. जावडे़कर ने कहा कि हम 15 फीसदी तक पहुंच गए हैं. अगले चुनाव में हमें 30 फीसदी और फिर उससे ज्यादा भी वोट मिलेगा. इसी से परेशान होकर सीपीएम हत्या की राजनीति कर रही है.

दरअसल, बीजेपी लोकसभा चुनाव 2014 के बाद लगातार केरल में अपने पांव जमाने के लिए जोर-शोर से लगी हुई है. बीजेपी कार्यकर्ता लगातार सक्रिय हो रहे हैं और उन्हें संघ की तरफ से मजबूती भी मिल रही है. लेकिन, संघ परिवार की सक्रियता उनके सियासी विरोधियों को रास नहीं आ रही है. यही वजह है कि वहां सियासी संघर्ष हिंसा में तब्दील होती गई.

क्या है बीजेपी का आरोप?

बीजेपी लगातार सीपीएम कैडर्स पर हिंसा का आरोप लगाती रही है. लेकिन, बीजेपी की शिकायत के बावजूद हिंसा पर रोक नहीं लग पा रही है. कुछ दिन पहले ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने केरल का दौरा कर वहां कार्यकर्ताओं से राज्य के हालात का जायजा लिया और आगे की रणनीति को अंतिम रूप भी दिया था. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली का भी हिंसा के शिकार परिवार के लोगों से मुलाकात करना केरल की कम्युनिस्ट सरकार पर दबाव बनाने की ही कोशिश थी.

अब बीजेपी ने इसे और आगे बढ़ाने का फैसला किया है. बीजेपी इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी में है. बीजेपी के रणनीतिकार केरल में सीधे केंद्र सरकार की दखल के बजाए वहां के स्थानीय लोगों के समर्थन और सहानुभूति को ही हथियार बनाकर राज्य में अपनी जड़े जमाना चाहते हैं. संघ का भी पूरा समर्थन हासिल है.

बीजेपी के एजेंडे में केरल काफी उपर है. बीजेपी को लगता है कि यह सही वक्त है जब केरल में अपनी जड़े मजबूत कर अपने-आप को विकल्प के तौर पर पेश किया जा सकता है. जनरक्षा यात्रा बीजेपी की इसी रणनीति का हिस्सा है.

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