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केरल में संघ के लोगों की हो रही हत्याओं पर अब बीजेपी मौन नहीं रहेगी !

वित्त मंत्री अरुण जेटली आगामी 6 अगस्त को राज्य में दौरा करने जा रहे हैं

Amitesh Amitesh Updated On: Aug 04, 2017 08:43 PM IST

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केरल में संघ के लोगों की हो रही हत्याओं पर अब बीजेपी मौन नहीं रहेगी !

दक्षिण भारत के आखिरी छोर पर छोटा सा राज्य केरल आजकल लगातार चर्चाओं में है. लेकिन, ये चर्चा केरल में जारी सियासी हिंसा को लेकर हो रही है. केरल की कम्युनिस्ट सरकार के कार्यकाल में आरएसएस के कार्यकर्ताओं की लगातार हो रही हत्या को नहीं रोक पाने के कारण राज्य की पी विजयन सरकार सवालों के घेरे में है.

हाल ही में तिरुवनंतपुरम के नजदीक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजेश नाम की हत्या के बाद संघ तिलमिला गया है. 34 साल के राजेश की बर्बरता से हत्या की गई थी जिसमें उसके एक हाथ को काट दिया गया था.

आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने संघ कार्यकर्ता राजेश की हत्या के बाद केरल सरकार को घेरने की पूरी कोशिश है. होसबोले ने केरल की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर दी है. होसबोले ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग भी की है.

Dattatreya-Hosabale

दरअसल संघ पहले से ही केरल की हिंसा के मुद्दे को उठाता रहा है. संघ का आरोप रहा है कि उनके कार्यकर्ता राजनीतिक हिंसा के लगातार शिकार होते रहे हैं. लेकिन, केरल की सरकार उस पर ध्यान नहीं देती. खासतौर से केरल में विजयन सरकार आने के बाद तो मामला बेहद गंभीर हो गया है.

हालांकि लेफ्ट की तरफ से बीजेपी और संघ के आरोपों को खारिज किया जाता रहा है. लेकिन, अब बीजेपी और संघ दोनों की तरफ से इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी हो रही है. केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है. लिहाजा, सरकार के स्तर से भी दबाव बनाने की तैयारी हो रही है.

बीजेपी का आरोप है कि पिछले 17 महीने में संघ के 17 कार्यकर्ताओं की हत्या हो गई है. लेकिन, केरल की सरकार इस मुद्दे पर मौन है. बीजेपी महासचिव भूपेंद्र यादव ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि पिछले 25 सालों में केरल के अंदर आरएसएस के 85 कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है.

बीजेपी से संघ की अपेक्षा भी कुछ इसी तरह की है. संघ चाहता है कि केंद्र में बीजेपी सरकार रहते हुए अगर उसके कार्यकर्ताओं की हत्या पर रोक नहीं लग पाई तो फिर आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

उधर, बीजेपी को भी लगता है कि संघ कार्यकर्ताओं पर लगातार हो रहे हमले के मुद्दे को उठाकर दक्षिण भारत के इस राज्य में अपनी जड़ें मजबूत की जा सकती हैं. लिहाजा लगातार वामपंथ और वामपंथी सरकार को निशाने पर लिया जा रहा है.

Arun Jaitley at India Today conclave in ND

संघ कार्यकर्ता राजेश की हत्या के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली का 6 अगस्त को केरल का दौरा होने वाला है. जेटली जैसे बडे कद्दावर नेता के केरल जाने से ही मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

बीजेपी की रणनीति के तहत अरुण जेटली कन्नूर में हिंसा प्रभावित लोगों के परिवार वालों से भी मिलने वाले हैं. केंद्र सरकार की तरफ से लगातार सरकार के स्तर पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है.

लेकिन, पार्टी की इस कोशिश में संघ-बीजेपी के विस्तार और संगठन को मजबूत करने की वो रणनीति भी छिपी है जिसके तहत वो केरल की हिंसा के मुद्दे को अब राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की इतनी बड़ी तैयारी की है.

बीजेपी की कोशिश इस मुद्दे को संसद से सड़क तक उठाने की है. लोकसभा में कर्नाटक से सांसद प्रहलाद जोशी ने इस मुद्दे को उठाया था जिसके बाद लेफ्ट के सासंदों के साथ बीजेपी सांसदों की बहस भी हुई.

उधर, एनएचआरसी की तरफ से इस मामले में नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा गया है.

केरल हिंसा पर हंगामा जारी है. हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा है. बीजेपी और संघ अब चाहता भी नहीं है कि इस मुद्दे पर हंगामा थमे. वरना एक बार फिर से केरल में संघ कार्यकर्ताओं पर जारी हिंसा का मुद्दा ठंढे बस्ते में चला जाएगा.

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