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झारखंड में फिर फहरा भगवा : रघुवर के लिए राहत तो विपक्ष के लिए नसीहत

अब मुख्यमंत्री रघुवर दास के लिए आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती मिलने वाली है. क्योंकि इस हार से अलग-अलग चुनाव लड़ चुका विपक्ष अब एक होकर उन्हें सबक सिखाने की तैयारी में है.

Amitesh Amitesh Updated On: Apr 23, 2018 05:25 PM IST

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झारखंड में फिर फहरा भगवा : रघुवर के लिए राहत तो विपक्ष के लिए नसीहत

झारखंड में हुए स्थानीय निकाय के चुनाव नतीजों ने जनता के मूड का एहसास करा दिया. बीजेपी के लिए चुनाव नतीजे अच्छे दिन के संकेत दे रहे हैं. खासतौर से मुख्यमंत्री रघुवर दास के लिए तो और भी शुभ संकेत हैं, क्योंकि इन नतीजों ने उनके खिलाफ पार्टी के बाहर और पार्टी के भीतर से हो रहे विरोध को फिलहाल कुछ दिनों के लिए टाल दिया है.

हालांकि नगर निगम के चुनाव में तो काफी हद तक शहरी क्षेत्रों में ही मतदान किया गया था, लेकिन, इन मतदान के चुनाव परिणाम आने के बाद बीजेपी राहत की सांस ले रही है. अगले साल लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं. फिर कुछ ही महीने के बाद राज्य में विधानसभा का भी कार्यकाल समाप्त हो रहा है. ऐसे में इन स्थानीय निकाय के चुनाव परिणाम के बाद बीजेपी अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेगी.

राज्य में पहली बार पार्टी लाइन पर चुनाव हुए हैं, जिसमें बीजेपी को बड़ी सफलता मिली है. 16 अप्रैल को नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के लिए चुनाव कराया गया था. इनमें बीजेपी ने सभी पांच नगर निगम में बाजी मार ली है. पांचों नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर के पद पर बीजेपी का कब्जा हुआ है.

रांची नगर निगम में बीजेपी की आशा लाकरा मेयर पद के लिए चुनी गई हैं. लाकरा ने जेएमएम की वर्षा गाडी को हराया जबकि डिप्टी मेयर पद के लिए बीजेपी के संजीव विजयवर्गीय ने कांग्रेस के राजेश कुमार गुप्ता को पटखनी दी.

इसके अलावा हजारीबाग से रोशन टर्की ने मेयर पद के लिए कांग्रेस की गुंजा देवी को हराया. यहां डिप्टी मेयर के लिए बीजेपी के राजकुमार लाल ने कांग्रेस के आनंद देव को हरा दिया.

गिरीडीह नगर निगम में मेयर के लिए बीजेपी के सुनील कुमार पासवान ने कांग्रेस के समीर राज चौधरी को हराया. यहां, डिप्टी मेयर के लिए प्रकाश राम ने कांग्रेस के मोहम्मद इश्तियाक को हराया.

आदित्यपुर नगर निगम में भी जीत बीजेपी की ही हुई. मेयर पद के लिए अरुणा शंकर ने निर्दलीय पूनम सिंह को और डिप्टी मेयर पद के लिए राकेश कुमार सिंह ने कांग्रेस के मनोज सिंह को हराया.

मेदिनीनगर नगर निगम में भी मेयर पद के लिए बीजेपी की अरुणा शंकर ने निर्दलीय पूनम सिंह को हराया.

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पांचों नगर निगम में बीजेपी की जीत का परचम लहराने के बाद मुख्यमंत्री रघुवर दास के लिए अपने विरोधियों पर वार करने का इससे बेहतर मौका नहीं हो सकता था. उन्होंने जीत का सेहरा अपने माथे लेके के बजाए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूरा श्रेय दे दिया.

रघुवर दास ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों का भरोसा बताया. इस वक्त केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर बीजेपी की ही सरकार है. ऐसें में राज्य में विकास को लेकर लोगों के मन में अपेक्षाएं बहुत ज्यादा रही हैं. लेकिन, कई दिग्गजों को दरकिनार कर मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद से ही पार्टी के भीतर भी कश्मकश होती रही है. वक्त-वक्त पर पार्टी यह अंदरूनी खींचतान सामने भी आती रही है. लेकिन, बीजेपी आलाकमान की पसंद के तौर पर उभरे रघुवर दास को हमेशा आलाकमान का आशीर्वाद मिलता रहा है, जिससे पार्टी के कई नाराज चल रहे नेताओं को नहीं चाहते हुए भी चुप्पी साधनी पड़ी है.

हालांकि मुख्यमंत्री रघुवर दास के कामकाज को लेकर चर्चाएं होती रही हैं. कई मौकों पर उन्हें अपने कदम पीछे भी खींचने पड़े हैं. सबसे ज्यादा बवाल सीएनटी-एसपीटी एक्ट को लेकर हुआ था. इस एक्ट में संशोधन के सरकार के प्रस्ताव पर खूब बवाल मचा था. विपक्ष ने लगातार इस मुद्दे पर विरोध करना जारी रखा था, हो-हंगामे के बाद जब राज्यपाल द्रौपदी मुर्मु ने इस एक्ट में संशोधन के रघुवर सरकार के प्रस्ताव को वापस कर दिया तो इसे मुख्यमंत्री रघुवर दास की भी काफी फजीहत हुई थी.

सीएनटी-एसपीटी एक्ट में दिए गए प्रावधान के मुताबिक, कोई भी गैर-आदिवासी व्यक्ति आदिवासी समुदाय के लोगों की जमीन को नहीं खरीद सकता है. लेकिन, मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस एक्ट में संशोधन करने की कोशिश की थी, जिससे उद्योग लगाने के लिए जमीन की खरीद की जा सके. लेकिन, उनके इस कदम का काफी विरोध भी हुआ और अंत में राज्यपाल की तरफ से संशोधन प्रस्ताव को बैरंग लौटाने के बाद तो उनके लिए मानो मुंह छुपाने लायक भी जगह नहीं बची हो.

लेकिन, अब वक्त ने फिर करवट ली है. आलाकमान के भरोसेमंद रघुवर दास के नेतृत्व में स्थानीय निकाय के चुनाव में मिली जीत ने फिर से पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को और मजबूत ही किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नमो ऐप पर अपनी पार्टी के सभी सांसदों और विधायकों को भी झारखंड के स्थानीय निकाय चुनाव की जीत को लेकर बधाई दी है. उन्होंने इसे विकास की जीत बताया.

हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि कुल 72 में से आधे से ज्यादा यानी 39 उम्मीदवार तो बीजेपी के ही जीते हैं. बीजेपी की सहयोगी आजसू को 4 सीटों पर जीत मिली है जबकि, विपक्ष को इस दौरान बड़ी हार का सामना करना पड़ा है. हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम को 7, कांग्रेस को 9 और बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम को 4 सीटों पर जीत मिली है.

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विपक्षी दलों के लिए यह ‘एलार्मिंग सीचुएशन’ है. उन्हें भी लगने लगा है कि अलग-अलग चुनाव लड़कर बीजेपी को हराना आसान नहीं है. लिहाजा अब तैयारी एक होने की हो रही है. जेएमएम और कांग्रेस के नेताओं की तरफ से नगर निगम चुनावों में हार के बाद जो बयान आ रहे हैं वो कुछ इसी तरह का इशारा कर रहे हैं.

अब मुख्यमंत्री रघुवर दास के लिए आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती मिलने वाली है. क्योंकि इस हार से अलग-अलग चुनाव लड़ चुका विपक्ष अब एक होकर उन्हें सबक सिखाने की तैयारी में है. लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी को मजबूत और एकजुट विपक्ष से दो-चार होना पड़ सकता है. लेकिन, उसके पहले की इस जीत ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रति बीजेपी के भीतर फिर से भरोसा जगा दिया है.

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