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समरसता खिचड़ी के जरिए जातीय गणित कितना फिट कर पाएगी बीजेपी?

दिल्ली बीजेपी अपने सभी मोर्चों के बैनर तले राज्य की जनता से जुड़े रहने की कोशिश में लगातार प्रयासरत है.

Updated On: Jan 03, 2019 09:06 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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समरसता खिचड़ी के जरिए जातीय गणित कितना फिट कर पाएगी बीजेपी?

दिल्ली बीजेपी अपने सभी मोर्चों के बैनर तले राज्य की जनता से जुड़े रहने की कोशिश में लगातार प्रयासरत है. लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी दिल्ली में रैलियों का आयोजन कर रही है. इसी कड़ी में अगले रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चे की एक रैली आयोजित करने जा रही है. पार्टी ने इसे भीम महासंगम विजय संकल्प-2019 का नाम दिया है. इस मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं के द्वारा समरसता खिचड़ी बनाई जाएगी और सभी कार्यकर्ताओं के बीच खिचड़ी बांटी जाएगी. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि इस रैली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी शिरकत कर सकते हैं.

दिल्ली बीजेपी नेताओं का कहना है कि इन रैलियों का उद्देश्य विभिन्न मुद्दों पर समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करना है. दिल्ली बीजेपी की तरफ से पिछले कई दिनों से ही दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘भीम महासंगम’ की तैयारी चल रही है.

समरसता खिचड़ी के लिए डोर टू डोर कैंपेन चलाने और चावल-दाल मांगने के लिए पार्टी के लगभग 28 हजार एससी मोर्चा के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है. दिल्ली में बीजेपी के 280 मंडल हैं और हर मंडल स्तर पर 100 कार्यकर्ताओं की टीम बनाई गई है. पार्टी की तरफ से समरसता खिचड़ी के लिए पांच हजार किलोग्राम चावल और दाल जुटाने का लक्ष्य रखा गया, जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड होगा. पार्टी के प्लान के मुताबिक, अगले रविवार को यानी 6 जनवरी को दिल्ली के रामलीला मैदान में भीम महासंगम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लगभग एक लाख एससी समुदाय के लोगों के पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है.

खिचड़ी में लगने वाले चावल और दाल के लिए दिल्ली बीजेपी ने एक पखवाड़े तक विशेष अभियान चला कर चावल और दाल लोगों के घरों से इकठ्ठा किया जा रहा है. पार्टी नेताओं का मानना है कि 80 प्रतिशत चावल-दाल मांगने का काम पूरा हो गया है. एक से दो दिनों में बचे हुए घरों से भी चावल और दाल मांगने का काम पूरा हो जाएगा.

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दिल्ली में खासकर एससी समुदाय की जातियों में खटीक, सांसी, सिकलीगर, गिहारा समेत 9 जातियां शामिल हैं. पार्टी नेताओं का मानना है कि दिल्ली में 21 लाख एससी समुदाय के मतदाता हैं, जिनमें से 14 लाख लोगों से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए बीजेपी की तरफ से विजय संकल्प पत्र और पैंफलेट भी तैयार किया गया है. पैंफलेट में मोदी सरकार के कार्यकाल में एससी समुदाय के लिए किए गए कामों का जिक्र किया गया है.

दरअसल, बीजेपी की तरफ से यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में एससी समुदाय के लिए क्या-क्या काम हुए हैं. जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ सालों से एससी समुदाय का वोट बैंक का बड़ा हिस्सा आम आदमी पार्टी के पाले में चला गया है, जिसे बीजेपी के द्वारा अपने पाले में लाने का प्रयास किया जा रहा है. पिछले लोकसभा चुनाव के समय दूसरे दलों के कई एससी नेताओं ने बीजेपी का दामन थामा था, लेकिन दिल्ली के पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के पास दलित वोट बैंक खिसक गया था. यही वजह है कि इस बार बीजेपी मोदी सरकार में किए गए काम के आधार पर दलितों को साधने में लग गई है.

दिल्ली बीजेपी हाल ही में एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट कर मोदी सरकार द्वारा जो अध्यादेश लाई है उसको भी भुनाने की कोशिश कर रही है. ऐसा माना जा रहा है कि दिल्ली में पार्टी का यह प्रयोग अगर सफल होता है तो अन्य राज्यों में भी इसी तरह का आयोजन किया जाएगा. बीजेपी एससी मोर्चा के नेताओं का भी मानना है कि मोदी सरकार ने इस समुदाय के लिए जितना किया है, उसे बताने के मकसद से ही पार्टी की तरफ से भीम महासंगम का आयोजन किया जा रहा है.

अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल गिहारा फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘खिचड़ी को बनाने के लिए लगभग तीन लाख परिवारों से एक-एक मुट्ठी दाल-चावल इकट्ठा किया जा रहा है. तीन लाख घरों से चावल और दाल मांगने का काम लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है. हमलोग खिचड़ी के साथ-साथ एक संकल्प पत्र भी जारी कर रहे हैं, जिसके माध्यम से लगभग 14 लाख लोगों से संपर्क किया जा रहा है. 6 जनवरी को उम्मीद है कि रामलीला मैदान में लगभग एक लाख लोग जुटेंगे.

बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के जितने भी कार्यकर्ता और लोग इस सम्मेलन में पहुंचेंगे उन सभी को खिचड़ी बनाने, खिचड़ी खाने का अवसर मिलेगा. रामलीला मैदान में लगभग 5 हजार किलो की समरसता खिचड़ी बनाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया जाएगा. इस खिचड़ी को बनाने के लिए नागपुर के शेफ विष्णु मनोहर को बुलाया गया है, जिन्होंने पूर्व में 3 हजार किलो की खिचड़ी बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था.

मोहन लाल गिहारा आगे कहते हैं, ‘समरसता खिचड़ी के माध्यम से दलित समाज जो अलग-अलग जातियों में बटा हुआ है उन सभी को एक करने की ऐसी पहल मोर्चा द्वारा की जा रही है. समाज में समरसता का भाव और एकता लाने के लिए दिल्ली बीजेपी का कार्यकर्ता हर संभव प्रयास कर रहा है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए अनुसूचित जाति के लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में किए गए कार्य हो या शिक्षा के क्षेत्र में स्किल डिपार्टमेंट के क्षेत्र में और अपना व्यवसाय शुरू करने के क्षेत्र में किए गए कार्य हों, इस रैली के माध्यम से हम अनुसूचित जाति मोर्चा के लोगों को बताएंगे.’

बीते दिसंबर महीने से ही दिल्ली बीजेपी चुनावी मोड में आ गई है. लोकसभा चुनाव की तैयारियों के तहत पार्टी दिसंबर महीने से ही दिल्ली में हर रविवार को रैली कर रही है. अगले 1 फरवरी तक हर रविवार को पार्टी ऐसी ही रैलियां करने जा रही है. बता दें कि दिल्ली के रामलीला मैदान में बीते 16 दिसंबर को पहली हुंकार रैली आयोजित की गई थी. साल 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप की याद में लगभग 50 हजार महिलाएं इस रैली में शामिल हुई थीं.

23 दिसंबर को 'पंच परमेश्वर' रैली इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित की गई थी, जिसमें पूरी दिल्ली के 13 हजार 818 बूथों के लगभग 70 हजार कार्यकर्ता जुटे थे, इस रैली को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने संबोधित किया था. युवाओं को केंद्रबिंदु में रखकर बीते 30 दिसंबर को भी एक रैली आयोजित की गई थी. कुलमिलाकर दिल्ली बीजेपी समरसता के नाम पर खिचड़ी की राजनीति का दाव फेंक कर आम आदमी पार्टी कैंप में हड़कंप मचा दिया है. इस तबके के बड़े वोट बैंक ने शीला दीक्षित को तीन बार मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका अदा की थी.

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पिछले लोकसभा चुनाव में इस वर्ग का विश्वास पीएम मोदी जीतने में कामयाब हुए थे, लेकिन दिल्ली विधानसभा के पिछले चुनाव में इस वर्ग ने बीजेपी से नाता तोड़ कर आप का हाथ थाम लिया था. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वर्ग समय-समय पर पाला बदलता रहता है. अब देखना यह है कि आगामी लोकसभा चुनाव में इस वर्ग के वोट बैंक पर बीजेपी दोबारा से कितना अधिकार जमा पाती है?

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