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अयोध्या: राम मंदिर नहीं तो राम की मूर्ति ही बनवाएगी बीजेपी

अलग-अलग महापुरुषों की विरासत को अपनाने के लिए मूर्तियां बनवाना एक आसान तरीका है

Updated On: Oct 10, 2017 02:03 PM IST

Amitesh Amitesh

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अयोध्या: राम मंदिर नहीं तो राम की मूर्ति ही बनवाएगी बीजेपी

उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य मंत्री और प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो जाएगा. सिद्धार्थनाथ की तरफ से की गई यह भविष्यवाणी सरकार के फैसले पर आधारित नहीं थी, बल्कि स्वामी ब्रम्हयोगानंद की भविष्यवाणी पर ही आधारित थी जिसमें उन्होंने अगले लोकसभा चुनाव से पहले भव्य राम मंदिर बन जाने की बात कही है.

यूपी सरकार के एक मंत्री की तरफ से इस तरह की भविष्यवाणी को सरकार के किसी जिम्मेदार व्यक्ति का बयान मानने से ज्यादा एक आशावादी व्यक्ति की आस्था ज्यादा मानना होगा. क्योंकि ना ही केंद्र की सरकार और ना ही प्रदेश की सरकार इस दिशा में अपनी तरफ से कोई ठोस प्रयास करते दिख रहे हैं. वो तो बस सुप्रीम कोर्ट के आदेश के इंतजार में हैं.

लेकिन, राम मंदिर के नाम पर आंदोलन चला चुकी बीजेपी को अब इस मुद्दे पर जवाब देना पड़ रहा है. दोनों जगह सत्ता में आने के बावजूद बीजेपी इस मसले पर कुछ खास नहीं कर पा रही है क्योंकि यह मामला अदालत में चल रहा है.

बीजेपी राम की विरासत और राम पर अपने पहले अधिकार की कोशिश को छोड़ना भी नहीं चाहती, लिहाजा अब राम की प्रतिमा बनाने की तैयारी हो रही है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस दिशा में ठोस पहल की है. योगी सरकार में अयोध्या में सरयू नदी के तट पर राम की विशाल प्रतिमा बनाने की तैयारी में है. एनजीटी से मंजूरी मिलने के बाद राम की लगभग 100 मीटर ऊंची विशाल प्रतिमा का निर्माण शुरु हो जाएगा.

Ram Mandir Model Replica

अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर का मॉडल (फोटो: रॉयटर्स)

राम मंदिर आंदोलन की अगुआ रही बीजेपी के हर चुनावी घोषणा पत्र में अयोध्या में भव्य राम मंदिर की बात रहती है. लेकिन, जब इस पर अमल की बात आती है तो फिर अदालत के फैसले या सर्वसम्मति की बात कही जाने लगती है. इसमें कोई बुराई भी नहीं है, क्योंकि आपसी सहमति के आधार पर बिना किसी राग-द्वेष के अगर मंदिर बनाने का फॉर्मूला निकल आता है या फिर अदालत का आदेश इस मामले में आ जाता है तो फिर विवाद खत्म हो सकता है. इस फैसले को सभी पक्ष मान भी सकते हैं. मगर ऐसा होने में देरी से बीजेपी को अपने उन राम भक्तों को समझाने में मुश्किल हो जाती है जो अबतक इस आस में बीजेपी के साथ खड़े रहे हैं.

कुछ नहीं से कुछ करने की कवायद

राम जन्म भूमि के बजाए अयोध्या में ही सरयू तट पर राम की प्रतिमा बनाने की पहल कर बीजेपी राम की विरासत और राम भक्तों को अपने साथ लाने की कवायद में है. शायद इस उम्मीद में कि कहीं राम भक्तों को लगे कि राम के नाम पर आंदोलन चला रही पार्टी और सूबे के भगवाधारी मुख्यमंत्री योगी ने कुछ तो किया.

बीजेपी सरकार की तरफ से राम की नगरी अयोध्या को चर्चा के मुख्य केंद्र में लाने की कोशिश हो रही है. दीवाली के एक दिन पहले अयोध्या में दिवाली का त्योहार मनाया जाना इस बात का प्रतीक है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल समेत प्रदेश के कई मंत्री इस दिन अयोध्या में ही मौजूद रहेंगे.

इसके अलावा अयोध्या में सरयू नदी के ही तट पर राम कथा गैलरी भी बनाने की तैयारी है. कोशिश अयोध्या में राम के नाम पर कुछ करने की है.

बीजेपी की महापुरुषों की विरासत पर नजर

केवल राम ही नहीं, बीजेपी की सभी महापुरुषों की विरासत पर नजर है. राम तो आस्था के प्रतीक हैं. राम तो ईश्वर हैं और करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक हैं.

लेकिन, बीजेपी गांधी से लेकर अंबेडकर तक, सरदार पटेल से लेकर वीर शिवाजी तक इन सभी महापुरुषों की विरासत के असली दावेदार के तौर पर अपने-आप को उभारने की कोशिश कर रही है. संघ परिवार और बीजेपी की सोची समझी रणनीति के तहत ही लगातार इस तरह की प्रतिमाएं बनाकर इन महापुरुषों के विचार को अपनाने की बात कही जा रही है.

अरब सागर में प्रस्तावित शिवाजी मेमोरियल का कॉन्सेप्ट

अरब सागर में प्रस्तावित शिवाजी मेमोरियल का कॉन्सेप्ट

गुजरात में नर्मदा नदी में सरदार पटेल की 182 मीटर उंची प्रतिमा दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा होगी जिसे स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के नाम से जाना जाएगा. सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आजादी के बाद देश के अलग-अलग रियासतों के एकीकरण का सबसे बड़ा काम किया था. लेकिन, बीजेपी का दावा है कि सरदार पटेल को कांग्रेस ने वो स्थान नहीं दिया था जिसके वो हकदार थे. और बीजेपी की कोशिश सरदार पटेल की प्रतिमा बनाकर उन्हें वो सम्मान दिलाने की है साथ ही विरासत पर अपने दावे की भी है.

इसी तरह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के दिन स्वच्छता मिशन की शुरुआत कर बापू की विरासत और उनके पदचिन्हों पर चलने की बीजेपी की तरफ से कोशिश की गई थी. बाबा साहब के सम्मान में बीजेपी ने उनकी 125 वीं जयंती को विशेष तौर पर मनाया था. संघ परिवार भी बाबा साहब के विचारों से अपने विचारों और सिद्धांतों को जोड़ने की लगातार कोशिश कर रहा है. जबकि मुंबई के पास अरब सागर में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा बनाने की तैयारी हो रही है.

महापुरुषों की विरासत को हथियाने में लगी बीजेपी के लिए राम और राम की नगरी अयोध्या का महत्व तो काफी ज्यादा है. बीजेपी का उभार और पार्टी का विस्तार का इस नगरी से सीधा सरोकार रहा है. लगता है राम मंदिर ना बना सकने की कसक को बीजेपी सरयू नदी के तट पर राम की प्रतिमा लगा कर खत्म करना चाहती है.

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