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अर्थव्यवस्था में सुस्ती: अपनों से घिरी मोदी सरकार, राजनीतिक नुकसान का खतरा!

यशवंत सिन्हा ने यह कहकर माहौल और गरमा दिया है कि बीजेपी के भीतर बहुत सारे नेता उन्हीं की तरह सोच रहे हैं, लेकिन, डर से जुबान नहीं खोल पा रहे

Updated On: Sep 27, 2017 02:29 PM IST

Amitesh Amitesh

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अर्थव्यवस्था में सुस्ती: अपनों से घिरी मोदी सरकार, राजनीतिक नुकसान का खतरा!

अर्थव्यवस्था में गिरावट और मंदी को लेकर विपक्ष पहले से ही मोदी सरकार पर हमलावर था. लेकिन, अब अपनों के वार ने सरकार को काफी परेशान कर दिया है. अब ताजा हमला हुआ है बीजेपी के वरिष्ठ नेता और वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्रालय का काम संभालने वाले यशवंत सिन्हा की तरफ से.

यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार की अर्थनीति और वित्त मंत्री अरुण जेटली पर सीधा हमला बोला है. इंडियन एक्सप्रेस में अपने लेख में यशवंत सिन्हा ने लिखा है कि ‘निजी निवेश में आज जितनी गिरावट है उतनी दो दशक में नहीं हुई, औद्योगिक उत्पादन का बुरा हाल है, कृषि क्षेत्र परेशानी में है, बड़ी संख्या में रोजगार देने वाला निर्माण उद्योग भी इस वक्त संकट में है.’

उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी पर भी सवाल उठाया है. यशवंत सिन्हा के मुताबिक, ‘नोटबंदी फेल रही है, गलत तरीके से जीएसटी लागू करने से आज कारोबारियों के बीच खौफ का माहौल बन गया है. लाखों लोग इस वक्त बेरोजगार हो गए हैं.’

विकास दर 5.7% पर पहुंच गई जो 3 साल में सबसे कम है

दूसरी तरफ जीडीपी गिरने से भी अर्थव्यवस्था की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है. यशवंत सिन्हा का कहना है कि ‘पहली तिमाही में विकास दर 5.7 फीसदी पर पहुंच गई जो कि तीन साल में सबसे कम है.’

सरकार के प्रवक्ता कहते हैं कि नोटबंदी की वजह से मंदी नहीं आई. यह सही बात है क्योंकि मंदी की शुरुआत तो नोटबंदी के पहले से ही हो गई थी. नोटबंदी ने सिर्फ आग में घी डालने का काम किया है.

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नवंबर, 2016 में लागू हुई नोटबंदी के कारण देश की जनता को अपने ही पैसे से वंचित होना पड़ा है

यशवंत सिन्हा ने अरुण जेटली पर हमला बोलते हुए अपने लेख में कहा है कि ‘प्रधानमंत्री ये दावा करते हैं कि उन्होंने काफी करीब से गरीबी देखी है. उनके वित्त मंत्री इस बात के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं कि देश का हर नागरिक भी गरीबी को करीब से देखे.’

यशवंत सिन्हा के बयान ने बीजेपी और पूरी सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है. अलग-अलग मंचों पर प्रधानमंत्री से लेकर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह तक लगातार नोटबंदी पर सरकार के फैसले को काले धन की सफाई के लिए बड़ा कदम बताते रहे हैं.

नोटबंदी को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में बड़े हथियार के तौर पर दिखाने की कोशिश भी होती रही है. लेकिन, अपनी ही पार्टी के नेता ने सरकार के इस कदम की बखिया उधेड़ दी है.

यशवंत सिन्हा ने यह कहकर माहौल और गरमा दिया है कि बीजेपी के भीतर भी बहुत सारे नेता उन्हीं की तरह सोच रहे हैं, लेकिन, डर से जुबान नहीं खोल पा रहे.

मोदी सरकार बनने के बाद से यशवंत सिन्हा पार्टी में हाशिए पर

यशवंत सिन्हा इसके पहले भी लगातार सरकार पर हमलावर रहे हैं. बीजेपी में 75 की उम्र पार कर चुके नेताओं को सक्रिय राजनीति से अलग करने के सुझाव पर उन्होंने तल्ख टिप्पणी की थी. सिन्हा ने अपने आप को ब्रेन डेड बताया था. उनका इशारा बीजेपी में 75 की उम्र पार कर रहे सभी नेताओं की तरफ था. मोदी सरकार बनने के बाद से ही यशवंत सिन्हा पार्टी के भीतर हाशिए पर हैं. लिहाजा उनकी तरफ से रह-रह कर उनका दर्द छलक पड़ता है.

इसके बाद बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त भी जब बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा तो पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और शांता कुमार के साथ यशवंत सिन्हा ने पार्टी की नीतियों और काम करने के तरीके पर सवाल उठाए थे.

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नरेंद्र मोदी राज में 75 वर्ष की आयु से ऊपर के नेता बीजेपी के भीतर हाशिए पर चले गए हैं

हालांकि सियासी हल्कों में माना जाता रहा है कि यशवंत सिन्हा के बेटे और बीजेपी सांसद जयंत सिन्हा को मोदी कैबिनेट में जगह देकर यशवंत सिन्हा की नाराजगी को शांत करने की कोशिश भी की गई थी. लेकिन, लगता है उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. यशवंत सिन्हा इस वक्त पार्टी और सरकार दोनों के लिए मुसीबत बन कर खड़े हो गए हैं. इस पर जवाब देना पार्टी के लिए मुश्किल हो रहा है.

यशवंत सिन्हा के निशाने पर सरकार की नीतियों के अलावा वित्त मंत्री अरुण जेटली भी हैं. पूर्व वित्त मंत्री की तरफ से मौजूदा वित्त मंत्री की काबिलियत पर भी वार हुआ है और कैबिनेट में उनकी एंट्री को लेकर भी तंज कसा गया है.

लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद अरुण जेटली को जिस तरह वित्त मंत्रालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई उस पर सवाल खड़ा करते हुए यशवंत सिन्हा ने वाजपेयी सरकार की याद दिलाई है. यशवंत सिन्हा ने कहा है कि ‘1998 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद जसवंत सिंह और प्रमोद महाजन जैसे कद्दावर नेताओं को तात्कालिक तौर पर कैबिनेट में जगह नहीं दी गई थी.’

यशवंत सिन्हा के अलावा भी बीजेपी में उठ रही और आवाजें

लेकिन, यशवंत सिन्हा के अलावा भी पार्टी के भीतर से और आवाजें उठनी शुरू हो गई हैं. बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यण

स्वामी ने भी खराब अर्थव्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा किया था. हाल ही में स्वामी ने सीएनएन न्यूज़ 18 को दिए इंटरव्यू में कहा था कि 'आज अर्थव्यवस्था में अनियंत्रित गिरावट है. ये क्रैश हो सकती है. अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए हमें बहुत सी अच्छी चीजें करनी होंगी. अगर कुछ नहीं किया जाता है, तो हमारी अर्थव्यवस्था कमजोर होती चली जाएगी. बैंक बर्बाद हो सकते हैं, फैक्ट्रियां बंद होनी शुरू हो सकती हैं.’

पीएम नरेंद्र मोदी, अरुण जेटली

अर्थव्यवस्था में आ रही गिरावट के लिए यशवंत सिन्हा ने देश के प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को जिम्मेदार ठहराया है

सुब्रमण्यण स्वामी का कहना था कि उन्होंने इस बारे में प्रधानमंत्री को डेढ़ साल पहले बता दिया था. उन्होंने कहा, 'पिछले साल मई में मैंने प्रधानमंत्री को उन्हीं के विभाग से निकाले गए आंकड़ों के साथ 16 पन्नों का एक खत लिखा था और उन्हें गिरती अर्थव्यवस्था की चेतावनी दी थी.’

सुब्रमण्यण स्वामी भी वित्त मंत्री अरुण जेटली के काम करने के तरीके पर पहले से ही सवाल खड़े करते रहे हैं.

उधर, आरएसएस विचारक एस गुरुमूर्ति ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं. बकौल गुरुमूर्ति सरकार को इस मोर्चे पर तुरंत कुछ करने की जरूरत है. द हिंदू के मुताबिक गुरुमूर्ति ने कहा कि अब यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं चल सकती. गुरुमूर्ति मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में आयोजित एक कार्यक्रम में नोटबंदी के विषय पर बोल रहे थे.

इस दौरान उनका कहना था, ‘मुझे लग रहा है कि हम नीचे जा रहे हैं. चाहे फंसे हुए कर्ज यानी एनपीए की बात हो या फिर 'मुद्रा' यानी माइक्रो यूनिट्स डिवेलपमेंट एंड रिफाइनैंस एजेंसी बैंक के संबंध में बात हो, सरकार को जल्द कोई फैसला लेना होगा.’

कांग्रेस के लिए हमलावर होने का इससे बेहतर मौका और क्या हो सकता है

कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर सवाल खड़ा किया है. कांग्रेस पहले से ही नोटबंदी, जीएसटी और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार पर हमलावर है. अब जबकि बीजेपी और संघ परिवार के भीतर से ही इन तीनों मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी होने लगी है तो फिर कांग्रेस के लिए हमलावर होने का इससे बेहतर मौका और क्या हो सकता है.

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अर्थव्यवस्था में सुस्ती के कारण इस साल लाखों लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं

आने वाले दिनों में बीजेपी के भीतर के असंतुष्ट नेताओं की तरफ से अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाजी और तेज हो सकती है. यह वक्त मोदी सरकार और बीजेपी के लिए मुश्किलों भरा हो सकता है, क्योंकि भले ही इससे सरकार के स्थायित्व पर कोई फर्क ना पड़े लेकिन, इससे सरकार की छवि पर बड़ा फर्क पड़ सकता है.

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