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अमित शाह: राहुल को बेटा होता और वो कांग्रेस अध्यक्ष बनता, ये है परिवारवाद

यूपी में सरकार बनाकर बीजेपी राज्य को पिछड़ेपन से हटाकर विकास के रास्ते पर ले जाएगी

FP Staff Updated On: Jan 29, 2017 09:34 PM IST

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अमित शाह: राहुल को बेटा होता और वो कांग्रेस अध्यक्ष बनता, ये है परिवारवाद

यूपी चुनाव से पहले परिवारवाद के मसले पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि परिवारवाद बीजेपी में नहीं है. उन्होंने कहा, 'परिवारवाद की व्याख्या में कोई कन्‍फ्यूजन नहीं है. राहुल गांधी को अगर बेटा होता है या बेटी होती है तो इसमें कोई कन्‍फ्यूजन नहीं है कि अगला कांग्रेस अध्यक्ष कौन होगा. क्‍या आप बता सकते हैं कि बीजेपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा? ये अंतर है बीजेपी और बाकी परिवारवादी पार्टियों के बीच में'.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में यूपी सहित पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव पर खुलकर बातचीत की. उन्होंने विधानसभा चुनावों में बीजेपी की रणनीति, नोटबंदी का चुनावों पर असर, आरक्षण पर बीजेपी का पक्ष और राजनीतिक भविष्य जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी.

अमित शाह ने चुनावों से पहले संघ प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य के दिए आरक्षण पर बयान पर अमित शाह ने कहा कि मनमोहन वैद्य के बयान को तोड़ मरोड़कर दिखाया गया और ऐसा ही बिहार चुनावों के वक्त मोहन भागवत के बयान के साथ हुआ था. उन्होंने कहा कि आरक्षण पर फिलहाल कोई भी पुनर्विचार की जरूरत नहीं है.

अमित शाह ने चुनाव नतीजों को नोटबंदी पर रायशुमारी मानने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि हर राज्य के अपने कई मुद्दे हैं. लेकिन इसके बाद भी विरोधी नोटबंदी पर रायशुमारी चाहते हैं तो बीजेपी तैयार है और यूपी के चुनाव में जनता इसका जवाब देगी. नोटबंदी से कालेधन पर लगाम के बारे में उन्होंने कहा कि सिर्फ तीन महीने में इतने बड़े कदम का विश्लेषण करना सही नहीं होगा.

बीजेपी के हिंदुत्व के मुद्दे की ओर लौटने के सवाल पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि गौ हत्या पर रोक के मुद्दे को इस नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, रुहेलखंड या बुंदेलखंड में कत्लखानों की वजह से दूध देने वाले पशु समाप्त हो गए हैं. किसानों के लिए मुश्किल हालात होते जा रहे हैं.

राम मंदिर के मसले पर अमित शाह ने कहा है कि इस मसले पर बीजेपी का रुख स्पष्ट है. बीजेपी संवैधानिक तरीके से राम मंदिर निर्माण का रास्ता तलाशेगी. यूपी चुनाव पर जारी बीजेपी के लोकलुभावन घोषणापत्र के बारे में अमित शाह ने कहा है कि पिछले 15 साल में उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा की सरकारें बनने से यह राज्य काफी पिछड़ गया है. अगर हमारी सरकार बनती है तो हम 5 साल में यूपी में इतना विकास करेंगे कि यह बाकी राज्यों के साथ खड़ा हो सके.

यूपी चुनाव में बीजेपी कितने सीट जीतेंगी, इस सवाल पर अमित शाह ने कहा कि पार्टी पहले और दूसरे चरण के चुनाव में कुल 135 सीटों में बीजेपी 90 सीटें जीतेगी.

पंजाब चुनाव पर अमित शाह ने कहा है कि वहां त्रिकोणीय मुकाबला है और प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में बीजेपी पूरे दमखम से मैदान में खड़ी है.

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पढ़िए नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी के साथ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का पूरा इंटरव्यू

सवाल: आपके घोषणापत्र में ऐसा क्या है जो दूसरों में नहीं है?

जवाब: घोषणापत्र की प्रस्तावना में हमने ये समझाने की कोशिश की है कि पिछले 15 साल में उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा की सरकारें बनने से यह राज्य काफी पिछड़ गया है. 15 साल में दूसरे राज्यों ने जितना विकास किया है उसकी तुलना में यूपी में संभावनाएं होने के बावजूद विकास नहीं हो पाया. गवर्नेंस, लॉ एंड ऑर्डर, एडमिनिस्ट्रेशन और विशेषकर कृषि और औद्योगिक क्षेत्र में काफी पिछड़ गया है.

हमने ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने की कोशिश की है, जिसकी बुनियाद पर बुलंद इमारत बनाई जा सके. हमारा प्रयास है कि अगर हमारी सरकार बनती है तो हम 5 साल में यूपी में इतना विकास करें कि यह बाकी राज्यों के साथ खड़ा हो सके.

सवाल: आपने घोषणापत्र में किसान कर्ज माफी, आसान ऋण, स्वास्थ्य सुरक्षा और शिक्षा की बात की है. आपने लैपटॉप बांटने और लॉ एंड ऑर्डर पर विशेष जोर दिया है. इसपर आपकी क्या राय है?

जवाब: हमने कर्ज माफी, आसान ऋण के अलावा किसान के धान की खरीदी के इंतजाम का भी वादा किया है. किसानों को फल, सब्जी और अनाज का उचित दाम दिलाने के लिए सभी मंडियों का कंप्यूटरीकरण करने का वादा किया है. हमने हर किसान को तीन साल के अंदर एक हेल्थ सॉइल (मिट्टी) कार्ड देने की भी बात की है. जिससे किसान जान पाएंगे कि उनके खेत को कितना खाद और पानी चाहिए. वह क्या उपजाए कि उसे ज्यादा मुनाफा हो. इन सारे इंतजाम से किसान अपनी पैदावार बढ़ा पाएगा और उत्तर प्रदेश कृषि विकास दर में आगे आ पाएगा. यूपी के किसान गड्ढे में हैं, उन्हें बाहर निकालने के लिए शून्य ब्याज पर लोन और कर्ज माफी की बात हमने घोषणापत्र में की है.

सवाल: आपने राम मंदिर, कैराना और गौ हत्या पर रोक की बात की है. साथ ही आपने जिन जगहों पर हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने का वादा किया है, वह हिंदू धार्मिक स्थल ही हैं. तो क्या माना जाए कि आप एक बार फिर से हिंदुत्व के मुद्दे पर लौट आए हैं?

जवाब: कत्लखाने पर रोक की बात को इस नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. आप पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश, रुहेलखंड या बुंदेलखंड कहीं भी जाएं, वहां आप देखेंगे कि कत्लखाने के चलते दूध देने वाले सारे पशु खत्म हो गए हैं. कभी भी अकाल पड़ता है या सूखा होता है तो गरीब किसान मुश्किल में पड़ जाते हैं. किसान दिन-ब-दिन गरीब होते जा रहे हैं. अगर उनके पास दूध देने वाले दो-तीन पशु होंगे तो वह अपनी आजीविका आसानी से चला पाएंगे.

उत्तर प्रदेश में दूध उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं. मैं ऐसे प्रदेश से आता हूं जहां यूपी की तुलना में बारिश कम होती है. साथ ही पानी की भी कमी होती है. इसके बावजूद वहां डेयरियों के माध्यम से दूध उत्पादन के रिकॉर्ड कायम हुए हैं. ऐसे में हम चाहते हैं कि पशुधन को बचाया जाए.

फिलहाल, आलम यह है कि पशुधन को अवैध तरीके से उठा लिया जाता है और वो कत्लखानों में काट दिए जाते हैं. इसके बाद किसानों की प्राथमिकी भी दर्ज नहीं होती है. हमारे प्रयास से जो पशुधन बचेंगे उनसे किसानों को लाभ पहुंचेगा. इसके लिए हम हर चार जिले पर एक डेयरी बनाने का प्रावधान करेंगे जहां किसानों को दूध का उचित दाम मिल पाएगा. इस वैल्यू एडिशन से किसान अपनी गरीबी को दूर कर पाएंगे.

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सवाल: चुनाव में आप बीजेपी को कितनी सीट देते हैं?

जवाब: अभी पूरे उत्तर प्रदेश का आकलन करना जल्दबाजी है. मैं इतना जरूर कहूंगा कि पहले और दूसरे चरण के चुनाव में कुल 135 सीटों में से बीजेपी 90 सीटें जीतेगी.

सवाल: आपकी मुख्य लड़ाई किससे है, समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन से या मायावती से?

जवाब: सपा-कांग्रेस गठबंधन से.

सवाल: क्या आपको नहीं लगता है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन को मुस्लिम, यादव और कुछ ऊंची जातियों का समर्थन मिलने से आपको कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा?

जवाब: कागज पर इस प्रकार की गिणती करना बहुत आसान है. जब मैं लॉ एंड ऑर्डर की बात करता हूं तो इसका मतलब यूपी में हर कोई परेशान है. चाहे वह यादव हो या किसी और जाति का. गरीबों पर प्रताड़ना ज्यादा होती है. यह वास्तविकता है. पिछड़े, अति-पिछड़े ज्यादा परेशान हैं, शहरों में ज्यादा परेशानी है मगर पलायन सभी करते हैं. कानून व्यवस्था ठीक नहीं होने से सबको परेशानी होती है.

बुलंदशहर हाईवे पर अगर मां-बेटी से रेप होता है, तो यह सबकी परेशानी है. मथुरा के बीचों-बीच रामवृक्ष यादव तीन साल से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किए हुए था. जब पुलिस जाती है तो सामने से गोली चलाकर जवानों को मार दिया जाता है. ये स्थिति किसी भी यूपी वालों को पसंद नहीं है. मेरा मानना है कि बहुमत इन्हीं मुद्दों पर आने वाला है. अगर अखिलेश समझते हैं कि वो फैमिली ड्रामा कर या गठबंधन कर के इन चुनावी मुद्दों को हटा देंगे तो जान लीजिए ऐसा नहीं होने वाला है. आज भी कानून व्यवस्था, पश्चिमी यूपी से पलायन, अवैध तरीके पशुओं को उठाकर मारना, महिलाओं की सुरक्षा और अवैध तरीके से जमीन पर कब्जा आज भी मुद्दे हैं. अखिलेश चाहे जो कर लें ये मुद्दे नहीं खत्म होंगे.

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सवाल: गन्ना किसानों के बारे में आप क्या कहेंगे?

जवाब: इस देश में लंबे समय से गन्ना किसानों की समस्या को नहीं उठाया गया. नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद इनके हितों के लिए काम शुरू हुआ है. सबसे पहले एथेनॉल की खपत बढ़ा दी, जिसके कारण उन्हें गन्ने का दाम ठीक मिला. गन्ना का आयात बंद कर दिया, जिसके कारण उन्हें इसकी अच्छी कीमत मिलने लगी. निर्यात पर सब्सिडी दिए जाने से किसानों को फायदा हुआ. हमने गन्ना किसानों का बहुत सारा बकाया भुगतान किया. हमने अपने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया है कि 120 दिन के भीतर यूपी के गन्ना किसानों को छह हजार करोड़ रुपए का बकाया चुका दिया जाएगा. साथ ही हम ऐसी व्यवस्था बनाने जा रहे हैं कि जिस दिन किसान अपने गन्ने को लेकर मिल में जाएगा, उसके 14 दिनों के बाद की तारीख का चेक उसी वक्त मिल जाएगा.

सवाल: आप उत्तर प्रदेश में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए क्या करेंगे?

जवाब: उत्तर प्रदेश में ईस्ट, वेस्ट, नॉर्थ और साउथ कॉरिडोर को पूरा किया जाएगा. हर गांव को तहसील मुख्यालय से बस सेवा से जोड़ने का वादा किया है. इसके साथ हमने स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने का भी वादा किया है. 108 नंबर पर कॉल करने पर आज भी डेढ़ घंटे तक गांव में एंबुलेंस नहीं पहुंचती. हम इसे घटाकर 15 मिनट तक लाएंगे. हम 25 नए मेडिकल कॉलेज खोलेंगे और एम्स के समान 6 अस्पताल खोलकर अस्पतालों का जाल बिछाएंगे.

सवाल: उत्तर प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था सुधारने के लिए क्या करेंगे?

जवाब: अगर रॉबर्ट्सगंज और बुंदेलखंड के खदानों में बड़े पैमाने पर होने वाली चोरी और नोएडा में टैक्स चोरी पर रोक लगा दिया जाए तो उत्तर प्रदेश का बजट दोगुना हो जाएगा. ये प्रयोग हमने दूसरे राज्यों में भी किया है.

सवाल: क्या सपा का फैमिली ड्रामा 'स्टेज फैमिली ड्रामा' था?

जवाब: ये कौन सा ड्रामा था ये उनपर ही छोड़ दीजिए. अगर कोई सोचता है कि वह फैमिली ड्रामा के चलते सारे आरोपों से बच जाएंगे तो ये उनकी गलतफहमी है. वोटिंग के दिन जनता पूरे पांच साल के अत्याचार को याद करके वोट डालेगी.

सवाल: कहा जा रहा है कि आने वाले चुनाव पीएम मोदी की नोटबंदी पर एक रायशुमारी है. क्या आप इस बात से समहत हैं?

जवाब: ये कहना ठीक नहीं होगा कि रायशुमारी नोटबंदी पर होगा, क्योंकि यूपी में सरकार के विरोध में कई मुद्दे हैं. खनन माफिया बेखौफ होकर भ्रष्टाचार किए जा रहा है. सड़क निर्माण में नेशनल हाइवे (केंद्र सरकार) प्रति किलोमीटर 18 करोड़ रुपए खर्च करती है. वहीं यूपी में 31 करोड़ का टेंडर निकाला जाता है. जनता जानना चाहती है कि ये 13 करोड़ रुपए कहां जाते हैं. चार धाम (उत्तराखंड) से ज्यादा खर्च पर अगर आप यूपी में कंक्रीट सड़क बनाते हैं तो ये पैसा कहां जाता है. इसके बाद भी अगर विरोधी नोटबंदी पर रायशुमारी चाहते हैं तो बीजेपी तैयार है. हम जानते हैं कि यूपी की जनता नोटबंदी और बीजेपी के साथ है और वह कमल निशान पर ही मुहर लगाएगी.

सवाल: तो क्या आपको लगता है कि नोटबंदी से यूपी चुनाव में आपको फायदा होगा?

जवाब: निश्चित रूप से होगा.

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सवाल: क्या आपको लगता है कि नोटबंदी कालेधन को रोकने में कामयाब रहा है?

जवाब: अगर कोई इतने बड़े कदम का विश्लेषण तीन महीने में करना चाहता है तो मैं इसे जल्दबाजी मानता हूं. ये बहुत बड़ी रणनीति का एक हिस्सा है. हमारी सरकार ने जिस दिन शपथ लिया था, उसी दिन से कालेधन के खिलाफ हमारी लड़ाई शुरू हो गई थी.

हमने कैबिनेट की पहली बैठक के पहले ही प्रस्तावना में एसआईटी की उस रिपोर्ट को लागू करवाया, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी यूपीए सरकार डेढ़ साल से लटकाए हुए थी. तब से नोटबंदी तक हमारी सरकार कालेधन के खिलाफ 29 से ज्यादा कदम उठा चुकी है. इसके जरिए हमने देश और विदेश दोनों जगहों के कालेधन पर कड़ा प्रहार किया है. मगर, अगर कोई पूछता है कि नोटबंदी से तीन महीने में कालाधन समाप्त हो गया है. तो मैं उससे कहूंगा कि उसे थोड़ा अर्थशास्त्र का अध्ययन करना चाहिए.

सवाल: नोटबंदी के बाद भी काफी सारा पैसा सिस्टम में आ गया है. कहा जा रहा है कि पूंजीपति इस बार भी धूल झोंककर आगे निकल गए. तो क्या आने वाले समय में आप इनपर छापेमारी करवाकर या दूसरे तरीकों से कड़ी कार्रवाई करेंगे?

जवाब: देखिए, ये भ्रांति फैलाई जा रही है कि बैंक में जो पैसा आया है वह सफेद हो गया है. ढाई लाख से ज्यादा जिसने भी पुराने नोट बैंकों में जमा कराए हैं, उनकी एक सूची बनी है. उनपर बहुत सारी एजेंसियां काम कर रही हैं. सरकार कठोर कानून लेकर भी आई है. साथ ही कालेधन वालों को एक मौका और देने का कानून लेकर भी आई है.

मैं इतना जरूर कहना चाहूंगा कि किसी का भी कालाधन बैंक में डालने से सफेद नहीं होगा. ये जरूर है कि जो पैसा सिस्टम में आया है उसे गरीबों के कल्याण में लगाया जाएगा.

ये दो जून की रोटी नहीं जुटा पाने वालों पर, जिनके घर नहीं हैं, जिनके घर में लाइट नहीं है, जिसके घर में शुद्ध पीने का पानी नहीं है उसके कल्याण के लिए ही ये पैसा खर्च किया जाएगा. अब तक ये पैसा नेताओं, पूंजीपतियों के तहखाने में बंद था. आज कम से कम बैंक में आ गया.

सवाल: तो आप इसे गरीबों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे?

जवाब: इसकी योजनाएं भी बनी हैं और कैबिनेट इसके लिए प्रस्ताव भी पारित कर रही है.

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सवाल: मोदी सरकार का एक और बड़ा कदम था, पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक. क्या भारत का रवैया पाकिस्तान के प्रति कठोर होगा और आने वाले समय में इसी तरीके से मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा?

जवाब: भारत का रवैया पाकिस्तान के प्रति कैसा रहेगा ये पाकिस्तान पर निर्भर रहेगा. हम चाहते हैं कि सबसे अच्छे रिश्ते रहें. पड़ोसियों के साथ शांति हमारी प्राथमिकता है, लेकिन अगर कोई हमारी भावना को निर्बलता समझेगा तो ये भूल होगी. ये बीजेपी की सरकार है. इस सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. सीमाओं की सुरक्षा और जवानों की जान के साथ खिलवाड़ के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा. ये सबको समझना पड़ेगा. हमने जो एक कदम उठाया है यह दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और सेना के शौर्य का साझा प्रयास है. इसके कारण पूरे विश्व में भारत को देखने का नजरिया बदला है. मैं मानता हूं कि आने वाले समय में इसका फायदा ही होगा.

सवाल: आने वाले चुनाव में इसका असर दिखेगा, क्या इस मुद्दे पर जनता आपके साथ है?

जवाब: कुछ नेताओं को छोड़कर पूरे देश की जनता हमारे साथ है. आपने राहुल जी का बयान पढ़ा और सुना होगा कि जवानों की खून पर दलाली बंद होनी चाहिए. इस प्रकार का बयान देकर क्या कहना चाहते हैं, मेरी तो आज भी समझ में नहीं आ रहा है.

सवाल: केंद्र में आज आपकी पूर्ण बहुमत की सरकार है. अगर आप उत्तर प्रदेश में भी सरकार बनाएंगे तो राम मंदिर के प्रति आपका क्या रवैया रहेगा?

जवाब: राम मंदिर के बारे में हमारा स्पष्ट रुख है कि संवैधानिक तरीके से राम मंदिर निर्माण का मार्ग तलाशा जाएगा. मंदिर निर्माण या तो आपसी बातचीत से हो सकता है या कोर्ट के आदेश पर. कोर्ट में केस लंबित है और कुछ ही दिन पहले इसकी तारीख थी. जब भी अगली तारीख आएगी, सरकार अपना पक्ष रखेगी. बाकी पार्टियां भी अपना पक्ष रखेंगी.

सवाल: क्या आप और आपकी सरकार राम मंदिर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है?

जवाब: हमारी सरकार संवैधानिक मर्यादा का ख्याल रखते हुए मंदिर निर्माण के लिए कटिबद्ध है.

सवाल: 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी में आपने 73 सीटें जीती थीं. लोग इसका दो कारण मान रहे थे. एक तो मोदी जी की लहर दूसरा आपकी रणनीति. तो क्या लगता है कि विधानसभा चुनाव में भी ये दोनों काम करेगा?

जवाब: 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पूरे देश की इच्छा थी कि कोई मजबूत नेता इस देश का नेतृत्व करे. बीजेपी ने उचित ही निर्णय किया था कि नरेंद्र मोदी को चुनाव से पहले ही प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया था. पूरे देशभर में जिस तरह से नरेंद्र मोदी की लहर थी वह यूपी में भी थी. मैं पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते आज भी यूपी में बीजेपी के करोड़ों कार्यकर्ताओं का आभारी हूं कि उन्होंने दिन-रात मेहनत कर इस लहर को वोट और सूनामी में तब्दील कराया और 80 में से 73 सीटों पर जीत दिलाई.

मैं ये भी कहूंगा कि यूपी की जनता के उसी फैसले के चलते हम केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार में हैं और देश को आगे ले जा रहे हैं. इस बार भी पूरे उत्तर प्रदेश में जिस तरह की अव्यवस्था है, सपा-बसपा, बसपा-सपा का जो क्रम चला है. जनता त्राहिमाम है, 15 साल से कहीं भी विकास नहीं हुआ, 15 साल से भ्रष्टाचार चल रहा है. 15 साल से कानून व्यवस्था ध्वस्त है. 15 साल से पलायन हो रहा है. बच्चे नौकरी के लिए मुंबई, गुड़गांव, बेंगलुरु, अहमदाबाद, दिल्ली में आते हैं और मां-बाप और पत्नी घर पर हैं. वहीं बेटा यहां पर नौकरी की तलाश में है. उत्तर प्रदेश के पास सबकुछ है. 50 फुट नीचे पानी है, कई किलोमीटर तक समतल भूमि है, मां गंगा और जमुना की कृपा है, पानी की कोई किल्लत नहीं है. मगर मेहनतकश, मेधावी और शिक्षित युवाओं के अव्यवस्थाओं का शिकार होने के चलते यूपी का विकास नहीं हो पा रहा है.

सवाल: प्रधानमंत्री जी की प्रसिद्धि के बाद भी आप बिहार और दिल्ली में चुनाव हारे. वहां की कुछ गलतियां जिससे आप सीखे हों, जो यहां नहीं करेंगे?

जवाब: देखिए, दोनों हारों के लिए हमारी पार्टी ने एक कमेटी बनाई थी, जिसकी रिपोर्ट भी आई है. लेकिन उसकी सार्वजनिक चर्चा करना ठीक नहीं है. मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि एक विशेष राजनीतिक परिस्थिति दोनों राज्यों में थी. उसके बाद हम असम का चुनाव भी जीते हैं. देशभर में जितने स्थानीय निकाय के चुनाव हुए, सब में जीते. उपचुनावों में हम मजबूत बनकर उभरे. केरल और बंगाल में भी हम बढ़े. हर जगह मोदी जी के नेतत्व को स्‍वीकृति मिली है.

सवाल: बीजेपी की रणनीति इस बार कुछ लोगों को जोड़ने की रही है तो कुछ दलों को तोड़ने की भी. इस बार आपने यूपी में नेता विपक्ष (स्‍वामी प्रसाद मौर्य) को तोड़कर अपनी पार्टीं में मिलाया. इसके क्या मायने निकाले जाएं?

जवाब: जोड़ना और तोड़ना दोनों शब्द इस घटना के लिए ठीक नहीं है, ये माइग्रेशन है. जिस प्रकार से परिवारवाद व जाति की राजनीति चल रही है और बसपा का लूट-खसोट का कारोबार चल रहा है. इससे त्रस्त होकर लोग बीजेपी की ओर माइग्रेट हो रहे हैं. मैं मानता हूं कि समाज की सज्जनशक्ति का एकत्रीकरण बीजेपी को करना चाहिए. अगर समाज की सज्जनशक्ति का एकत्रीकरण बीजेपी की ओर होता है तो यूपी और देश दोनों का भला होगा.

यूपी के चुनाव को आप इस राज्य से जोड़कर न देखें. अगर देश की विकास दर को दोहरे अंक में ले जाना है तो यूपी के विकास को भी हर हाल में दोहरे अंक में पहुंचाना होगा. (बात जारी रखते हुए... जहां पशुधन रोज मारा जाता हो, स्वास्थ्य सेवाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर खस्ताहाल हो, युवाओं के लिए रोजगार न हो, महिलाओं की सुरक्षा न हो, मुद्दों का सम्मान न हो, केवल जातिवाद, वोटबैंक, तुष्टिकरण की राजनीति और भ्रष्टाचार के आधार पर अपना रुतबा बनाए रखने की रणनीति चल रही हो उससे उत्तर प्रदेश का भला नहीं होगा.)

सवाल: अभी आपने परिवारवाद की बात की. मोदी जी ने भी बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से इस बार अपील की थी कि वे अपने रिश्तेदारों के लिए टिकट न मांगें. उसके बाद भी आप लोगों को काफी टिकट बांटने पड़े?

जवाब: हम जिस परिवारवाद की बात करते हैं उसकी व्याख्या भी स्पष्ट कर देता हूं. मुलायम सिंह यादव के बाद अखिलेश बाकी सारे नेताओं को दरकिनार कर मुख्यमंत्री बनते हैं, ये परिवारवाद है. फ़ारुख़ अब्दुल्ला जी के बाद उनके बेटे मुख्यमंत्री बनते हैं, ये परिवारवाद है. जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी ये परिवारवाद है. किसी नेता का बच्चा चुनाव लड़ता है वह एमएलए बनेगा, एमपी बनेगा, सालों तक काम करेगा मगर मुख्यमंत्री नहीं बन सकेगा, अगर उसमें काबलियत नहीं है. ये केवल बीजेपी में देखने को मिलता है.

आप परिवारवाद की व्याख्या इतनी सरल मत कर दीजिए. देश में कोई कन्‍फ्यूजन नहीं है.

राहुल गांधी को अगर बेटा होता है या बेटी होती है तो इसमें कोई कन्‍फ्यूजन नहीं है कि अगला कांग्रेस अध्यक्ष कौन होगा. क्‍या आप बता सकते हैं कि बीजेपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा? ये अंतर है बीजेपी और बाकी परिवारवादी पार्टियों के बीच में.

एक आदमी गरीब घर से उठकर देश का प्रधानमंत्री बन जाता है. मेरे जैसा बूथ कार्यकर्ता बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाए, ऐसी पार्टी में कभी भी परिवारवाद नहीं आ सकता.

सवाल: जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कुछ नेता सांप्रदायिक बयान देने लगे हैं, जिससे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की बू आती है. मोदी जी ने ऐसे नेताओं को पहले भी काफी चेतावनी दी, इस बार आपका इनके साथ क्या रवैया रहेगा?

जवाब: आप इस चीज को बीजेपी के साथ जोड़कर मत देखिए. यूपी के साथ एक विशेष प्रकार की परिस्थिति है. यहां बहुत बड़ा आक्रोश है, जिस तरह से वोटबैंक, तुष्टिकरण की राजनीति हुई, इसके खिलाफ अगर कोई कुछ बोलता है तो वह जनता की आवाज उठाता है. मगर, सांप्रदायिक प्रचार नहीं करना चाहिए, सांप्रदायिक चीजों को एजेंडा नहीं बनाना चाहिए. हम इस बात को मानते हैं लेकिन अगर कोई हमारी ओर से कत्लखाने पर उठाए गए कदम को सांप्रदायिक कहता है तो वो जान लें कि ये किसानों की भलाई के लिए उठाया गया कदम है.

पश्चिमी यूपी में जो पलायन होता है अगर हम उसके लिए टास्क फोर्स बनाते हैं. अगर कोई इसे सांप्रदायिक कहता है तो ये उन्हें जानना चाहिए कि ये उत्तर प्रदेश की जनता की भलाई के लिए है. कोई बच्चियों को प्रताड़ित करे, जिसके चलते वे स्कूल कॉलेज नहीं जा पाती हैं. इसके खिलाफ अगर बीजेपी एंटी रोमियो स्क्वॉयड बनाती है तो सांप्रदायिक बात नहीं है, ये छात्राओं का अधिकार है. छात्राएं अपनी पढ़ाई अपने गांव, शहर में रहकर पूरी करें ये उनका अधिकार है. इसलिए सांप्रदायिकता की परिभाषा में इन सारी बातों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए.

सवाल: पश्चिमी उत्तर प्रदेश आपके लिए काफी महत्वपूर्ण, वहां जो पलायन हुए हैं इसके लिए आप किसे जिम्मेदार मानते हैं?

जवाब: बेशक, सपा, बसपा के तुष्टीकरण और वोटबैंक की राजनीति को. अगर कानून का राज होता, संविधान के तहत थाने काम करते. संविधान के मार्गदर्शन में पुलिस काम करती तो ये कभी नहीं होता. जबकि पुलिस को कहा गया कि वे जाति-धर्म देखकर रिपोर्ट दर्ज करे. इसी वजह से पलायन की घटनाएं हुईं.

सवाल: आप सरकार बनाएंगे तो क्या कदम उठाएंगे?

जवाब: हमने पहले भी कदम उठाए हैं, जब यूपी में कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह की सरकार थी तो इस तरह की घटनाएं रुकी थी. देश भर में हमारी 14 सरकारें हैं, कहीं पलायन नहीं हो रहा है.

सवाल: बिहार चुनाव के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर-संघचालक मोहन भागवत ने आरक्षण के खिलाफ आवाज उठाई और इसका खामियाजा आपको भुगतना पड़ा. इस बार भी मनमोहन वैद्य जी ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में इसी तरह की बात की. हम आपसे जानना चाहते हैं कि आरक्षण के बारे में आपका क्या मत है?

जवाब: उस वक्त भी मोहन जी ने ऐसी कोई बात नहीं कही थी, न इस बार मनमोहन जी ने इस तरह का कुछ भी कहा है. मनमोहन जी से धार्मिक आरक्षण पर सवाल पूछा गया था. मगर किसी ने सवाल निकाल दिया और जवाब दिखा दिया. अगले दिन मनमोहन जी के जवाब का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें सच सामने आ चुका है. वीडियो में साफ तौर से कहा गया है कि सवाल सच्चर कमेटी के अंदर धार्मिक आरक्षण पर था. संघ भी स्पष्ट कर चुका है कि आज ऐसी स्थिति नहीं है कि आरक्षण की स्थिति को बदला जा सके. आरक्षण पर फिलहाल कोई पुनर्विचार करने की जरूरत नहीं है. बीजेपी का स्पष्ट मत है कि भारतीय संविधान के तहत देश में एससी, एसटी और ओबीसी के लिए जो आरक्षण की व्यवस्था चल रही है, वह जारी रहेगी.

मैं सपा, कांग्रेस और बसपा से पूछना चाहता हूं कि वो लोग अल्पसंख्यकों के लिए जो आरक्षण की बात करते हैं, वह कहां से लाएंगे? सुप्रीम कोर्ट ने 50 फीसदी का एक कैप बना दिया है इसके बाद आप आरक्षण बढ़ा नहीं सकते हैं. कुछ राज्यों में 50 फीसदी पूरा का पूरा बंट चुका है. एससी, एसटी और ओबीसी के तहत अगर आप अल्पसंख्यक को आरक्षण देना चाहते हैं तो आप इन लोगों का हक काटेंगे. बीजेपी दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के आरक्षण का विरोध नहीं करती. जबकि धर्म के नाम पर आरक्षण मांगने वाले दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के आरक्षण में कटौती करने की बात कह रही ही. मैं चाहता हूं कि सपा, बसपा और कांग्रेस इस बार के चुनाव में जनता को बता दें कि वह दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों में से किसका आरक्षण काटेंगे.

हमारा मत स्पष्ट है कि हम धार्मिक आरक्षण के पक्ष में नहीं हैं. आरक्षण का आधार धार्मिक नहीं हो सकता. संविधान इसकी अनुमति नहीं देता. ऐसे में वर्तमान व्यवस्था ही लागू रहनी चाहिए.

सवाल: आपने कई राज्यों के चुनाव लड़े जहां आपका मुख्यमंत्री का कोई चेहरा नहीं था. असम में था, जिसका आपको लाभ भी मिला. यूपी में आपने कोई चेहरा क्यों नहीं आगे किया है?

जवाब: ये बीजेपी के संसदीय दल का फैसला है. साथ ही मैं आपको ये भी बता दूं कि महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा चुनाव में भी हमने मुख्यमंत्री चेहरा नहीं दिया था, फिर भी हम जीते. हां, इतना जरूर कहूंगा कि हमारा जो चेहरा होगा वह इन चेहरों (अखिलेश, मायावती) से अच्छा होगा.

सवाल: प्रधानमंत्री जी ने ट्रिपल तलाक का विरोध किया था, आपके घोषणापत्र में भी इसका जिक्र है, इसपर क्या कहेंगे?

जवाब: हम बहुत स्पष्टता से मानते हैं, संविधान के तहत इस देश की हर महिला को उसका अधिकार मिलना चाहिए. अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में रिव्यू कर रही है तो मैं मानता हूं कि देश की दूसरी महिलाओं की तरह मुस्लिम महिलाओं को भी संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए. ट्रिपल तलाक मुस्लिम महिलाओं के अधिकार का हनन करती है.

सवाल: उत्तराखंड में बीजेपी के जीतने की क्या संभावना है?

जवाब: निश्चित रूप से उत्तराखंड में बीजेपी अच्छे अंतर से सरकार बनाने जा रही है.

सवाल: आप लोगों ने उत्तराखंड में भी कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को अपने साथ मिलाया, क्या आपको इसका फायदा होगा?

जवाब: ये एक प्रक्रिया है. एक पार्टी टूट रही है और अच्छे काम करने वाले लोग उससे निकलकर दूसरी पार्टी में आ रहे हैं. इस प्रक्रिया को दल-बदल के तहत न देखा जाए. ये चुनाव के पहले हो रही है. सरकार बनाने के लिए आया राम, गया राम नहीं हो रही है. जो आए उनको लेकर हम जनता के सामने जाएंगे, जनता अपना फैसला सुनाएगी.

सवाल: कहते हैं, गोवा में कांटे की टक्कर है. साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अमित शाह को मनोहर पर्रिकर को दोबारा यहां बुलाना पड़ा, क्या आप इस बात को मानते हैं?

जवाब: नहीं, पार्टी ने अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं किया है. हां, ये जरूर है कि अगर गोवा की जनता चाहती है तो पार्टी ने दोनों रास्ते खुले रखे हैं. चुनाव परिणाम आने के बाद विजयी विधायकों की राय पर संसदीय दल इसपर अंतिम फैसला लेगा. ये भी कहूंगा कि गोवा में हमारी स्थिति काफी अच्छी है. पहली बार हमने पांच साल की सरकार दी है. पहले 10 साल में कांग्रेस ने 12 मुख्यमंत्री दिए थे.

सवाल: पंजाब चुनाव के बारे में आपका क्या ख्याल है. चर्चा है कि कांग्रेस और बीजेपी की वहां बढ़त दिख रही है?

जवाब: मेरे हिसाब से पंजाब में तीनों (शिअद+बीजेपी, कांग्रेस, आप) पार्टियों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है. शिरोमणी अकाली दल और बीजेपी प्रकाश सिंह बादल जैसे मजबूत और वरिष्ठ नेता के साथ मैदान में पूरे दमखम से खड़ी है.

सवाल: महाराष्ट्र में शिवसेना आपसे नाराज है. इस बार कॉरपोरेशन और जिला परिषद के चुनाव अकेले लड़ रही है. क्या आपको लगता है कि केंद्र और राज्य सरकार में इससे आपके रिश्तों में कोई फर्क पड़ेगा?

जवाब: ये हमारा फैसला नहीं है, ये शिवसेना पार्टी का फैसला है. हमारा मन खुला है, शिवसेना हमारा विश्वस्त साथी है. केंद्र और राज्य की सरकारों में वो हमारे साथ हैं. अब एक फ्रेंडली मैच हो रहा है, प्रदेश की जनता इसका रिजल्ट तय करेगी.

सवाल: तो आप कह रहे हैं कि शिवसेना के साथ छोटा-मोटा मनमुटाव है?

जवाब: नहीं, ये मनमुटाव नहीं है. दोनों पार्टियों का अपने बारे में जो आंतरिक आंकलन है उसमें अंतर है. दोनों दलों को अपनी ताकत पर भरोसा है. ये जरूर है कि इससे हमारे गठबंधन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

सवाल: आपके लिए अगला महत्वपूर्ण पड़ाव गुजरात विधानसभा चुनाव है, आपको क्या लगता है वहां बीजेपी कैसा करेगी?

जवाब: वहां हाल में जो स्थानीय निकाय चुनाव और उपचुनाव हुए उसमें बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया. वहां बीजेपी काफी अच्छी स्थिति में है. हम वहां 1990 के बाद कभी चुनाव नहीं हारे. एक बार फिर हम वहां दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाएंगे.

सवाल: इन परिस्थितियों को देखकर 2019 के बारे में आपका क्या अनुमान है?

जवाब: हाल ही में एक अखबार का सर्वे आया था कि अगर आज चुनाव होते हैं तो बीजेपी को 370 सीटें आएंगी. 2019 तक देश का विकास कर, देश की सुरक्षा बढ़ाकर, गरीबों का जीवन स्तर उठाकर हम और मजबूत होंगे. हमने गरीबों का जीवन स्तर बदलने का काम किया है. धुएं वाले घरों में गैस चूल्हा पहुंचने, बैंक खाते खुलने, शौचालय बनने से महिलाओं और गरीबों को कैसा सुकून हो रहा होगा ये तो वही जानते होंगे.

सवाल: बड़े अर्थशास्त्रियों का मानना है कि नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होगी, इसपर आपका क्या कहना है?

जवाब: अभी तक तो इसका ऐसा असर नहीं दिखा है लेकिन मान लीजिए एक-आध क्वार्टर में ऐसा होता भी है तो आप जरा अंदाजा लगाइए, आठ लाख करोड़ रुपए सिस्टम में आ जाने से कितना बड़ा बदलाव होगा. ये पैसा अब तक कालेधन के रूप में तहखानों, तिजोरियों में पड़ा था. आज सिस्टम के अंदर है. मैं मानता हूं कि इससे बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा.

सवाल: आप अक्सर चुनाव के पहले बेहद रिलैक्स रहते हैं, इसका कोई खास राज?

जवाब: हम चुनाव को लोकतंत्र का एक महोत्सव मानकर लड़ते हैं. हम विचारधारा, घोषणापत्र और कैडर के साथ मैदान में जाते हैं. हार-जीत हमारे लिए बहुत मायने नहीं रखती. हम परफॉर्मेंस की राजनीति करते हैं. हम जाति-धर्म की राजनीति नहीं करते.

सवाल: अमित शाह का अगला मुकाम क्या होगा? क्या आप 2019 के चुनाव में केंद्र की राजनीति में आना चाहेंगे या सरकार में आना चाहेंगे या गुजरात लौटना चाहेंगे या फिर किसी प्रदेश की राजनीति की बागडोर संभालना चाहेंगे?

जवाब: मेरा गुजरात वापस जाने का सवाल ही नहीं है. मैं केंद्र की राजनीति में ही हूं. मेरा पहला दायित्व है कि 2019 का लोकसभा चुनाव बीजेपी इस बार से भी ज्यादा बहुमत से जीते.

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