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बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक: अबकी बार ओडिशा का होगा बेड़ापार

बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में होने जा रही है

Sanjay Singh Updated On: Apr 15, 2017 08:45 AM IST

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बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक: अबकी बार ओडिशा का होगा बेड़ापार

बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में होने जा रही है. पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के लिए इससे बेहतर जगह इस बैठक के लिए नहीं हो सकती थी.

'लुक ईस्ट' रणनीति का अगला कदम

बीजेपी ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया. अब अमित शाह अपनी 'लुक ईस्ट' यानी पूरब की तरफ विस्तार की रणनीति का अगला कदम बढ़ाने जा रहे हैं. पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है. वो नए इलाकों में अपना प्रसार करने के लिए तैयार है. ओडिशा में बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के लिए इससे बेहतर माहौल हो नहीं सकता था.

शनिवार को अमित शाह अपने भाषण के साथ पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की शुरुआत करेंगे. बैठक के अंत में रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी का समापन भाषण होगा.

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इस बैठक में दोनों ही नेताओं के पास अपनी उपलब्धियां गिनाने के लिए बहुत कुछ है. फिर चाहे वो संगठन की बात हो या सरकार की. राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पहुंचने वाले नेताओं को अपने साथ ले जाने के लिए मोदी-अमित शाह के दिए कई संदेश और सबक होंगे.

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बीजेपी इस वक्त देश के 14 राज्यों में अपने बूते सरकार चला रही है. वहीं तीन और राज्यों में ये दूसरे दलों के साथ सरकार में साझीदार है. यानी पार्टी ये दावा कर सकती है कि इस वक्त वो देश के 17 सूबों में राज कर रही है. पिछले महीने आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में बीजेपी को तीन चौथाई बहुमत मिला.

जब अरविंद केजरीवाल को झेलनी पड़ी शर्मिंदगी

सुर्खियां बटोरने वाली इन चुनावी जीतों के साथ ही पिछले हफ्ते हुए उप चुनावों में भी बीजेपी का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है. बीजेपी ने दिल्ली की राजौरी गार्डेन विधानसभा सीट आम आदमी पार्टी से छीन ली.

बीजेपी को इस सीट पर 51 फीसद वोट मिले. इस जीत की सबसे खास बात ये रही कि आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी की जमानत भी जब्त हो गई. और पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी. आम आदमी पार्टी इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रही.

Arvind Kejriwal

वो केजरीवाल जो खुद को 2019 के चुनाव के लिए मोदी के विकल्प के तौर पर पेश कर रहे थे, फिलहाल उनके हौसले पर पानी फिर गया है. पंजाब और गोवा में हार के बाद दिल्ली के उप चुनाव में शर्मनाक हार से केजरीवाल की महत्वाकांक्षा कुछ दिनों के लिए तो जरूर ठंडी पड़ेगी.

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अपनी मौजूदगी भी नहीं दर्ज करा सकी कांग्रेस

पश्चिम बंगाल में उप चुनाव के नतीजे भी बीजेपी के लिए तसल्लीबख्श रहे हैं. हालांकि ममता बनर्जी की पार्टी ने चुनाव में आसानी से जीत हासिल कर ली. मगर बीजेपी का वोट पिछले साल के 8.76 प्रतिशत से बढ़कर 30.97 फीसद हो गया.

बीजेपी को ये बढ़त लेफ्ट की कीमत पर मिली है. पिछले चुनाव में सीपीआई दूसरे नंबर पर रही थी. मगर इस बार तीसरे नंबर पर खिसक गई. कांग्रेस तो अपनी मौजूदगी भी नहीं दर्ज करा सकी.

बीजेपी इस बार भुवनेश्वर में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक इसलिए कर रही है ताकि दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर सके. राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से बीजेपी को चुनाव की तैयारी का माहौल बनने की उम्मीद है.

बीजेपी

इस वक्त बीजेपी के हौसले बुलंद हैं. प्रधानमंत्री मोदी का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है. इसीलिए पार्टी अब इसका फायदा उठाकर ओडिशा में सत्ता हासिल करना चाहती है. पिछले चुनाव में 147 सदस्यों की विधानसभा में बीजेपी के सिर्फ दस विधायक जीते थे.

ओडिशा से पार्टी का सिर्फ एक सांसद है. ऐसे में बीजेपी का 2019 के विधानसभा चुनाव जीतने का लक्ष्य बेहद महत्वाकांक्षी है. लेकिन बीजेपी को भरोसा है कि वो अगला चुनाव जीत सकती है. नवीन पटनायक के बीजू जनता दल से सत्ता छीन सकती है.

इसकी वजह हाल ही में हुए पंचायत चुनाव के नतीजे हैं. ओडिशा के पंचायत चुनाव में बीजेपी को पिछले बार के मुकाबले 850 फीसद की बढ़त हासिल हुई है.

बीजेपी के लिए ओडिशा क्यों है खास?

बीजेपी ने पंचायत चुनावों में कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेल दिया और बीजू जनता दल के गढ़ में सेंध लगाई है. 2012 में 851 पंचायत सीटों में बीजेपी सिर्फ 36 सीटें जीत सकी थी. इस बार पार्टी ने 306 सीटें जीती हैं. वहीं बीजू जनता दल की ताकत 651 से घटकर 460 रह गई. कांग्रेस पिछली बार की 126 सीटों के मुकाबले इस बार सिर्फ 66 सीटें जीत सकी.

मोदी और अमित शाह के एजेंडे में ओडिशा काफी अहम है. सूत्रों के मुताबिक अमित शाह अगले चुनाव तक हर महीने कम से कम तीन दिन राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बिताएंगे.

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संघ से आने वाले पार्टी के संगठन सचिव अरुण सिंह अपना ज्यादा से ज्यादा वक्त ओडिशा में बिताएंगे. ताकि पार्टी विधानसभा चुनाव के लिए संगठन का ढांचा खड़ा कर सके. तैयारी बूथ लेवल तक पहुंचाने के लिए ये जरूरी भी है.

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा में पार्टी का अघोषित चेहरा हैं. वो भी राज्य में काफी वक्त बिता रहे हैं. राज्य से पार्टी के इकलौते सांसद जुएल ओराम एक जाने-माने आदिवासी चेहरे हैं. वो मोदी कैबिनेट में मंत्री भी हैं.

भुवनेश्वर में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने का जश्न भी शुरू हो जाएगा.

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