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हनुमान चालीसा: सब राम भरोसे है तो फिर सरकार की क्या जरूरत!

बीजेपी के नेताओं को यह भूलना नहीं चाहिए कि अगर किसान भी उनके अंदाज में ही जवाब देने लगें तो सत्ता में वापसी करना उनके लिए कभी ना पूरा होने वाला सपना बन जाएगा

Pratima Sharma Pratima Sharma Updated On: Feb 13, 2018 02:56 PM IST

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हनुमान चालीसा: सब राम भरोसे है तो फिर सरकार की क्या जरूरत!

एमपी अजब है, एमपी गजब है. मध्यप्रदेश अपनी यही पहचान बताता रहा है. अब ऐसा लग रहा है कि बीजेपी के नेता अपने बयान से यह बात साबित करना चाहते हैं कि एमपी अजब है और वहां के नेता गजब हैं. एक तरफ नरेंद्र मोदी न्यू इंडिया का सपना दिखा रहे हैं, दूसरी तरफ उनकी अपनी पार्टी के नेता यह साबित करने में लगे हैं कि सब भगवान भरोसे है.

मध्यप्रदेश में किसानों की बद्तर स्थिति किसी से छिपी नहीं है. किसानों का प्रदर्शन पिछले साल मंदसौर में खूब देखने को मिला था. सैकड़ों किसान सड़कों पर उतर आए थे, जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई थी. किसानों की नाराजगी का असर गुजरात के चुनाव में भी देखने को मिला था. इसके बाद भी एमपी के नेता कोई सबक नहीं लेना चाहते हैं. बीजेपी नेता का ताजा बयान इसी की बानगी कर रहा है.

बीजेपी नेता का कमाल का आइडिया

मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटों में लगातर बारिश हुई और ओले पड़े. इतना ही नहीं, बिजली गिरने से छह लोगों की मौत भी हो चुकी है. किसानों की परेशानी दूर करने बजाय बीजेपी के एक नेता ने ऐसा आइडिया दिया है, जिसके बाद किसानों के पास शिकायत करने का कोई मौका नहीं रहेगा.

बीजेपी के पूर्व विधायक रमेश सक्सेना ने कहा, ‘किसानों के पास प्राकृतिक आपदा से बचने का एक ही उपाय है. उन्हें हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए.’ सक्सेना ने किसानों के साथ हमदर्दी व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को हर रोज एक घंटा सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘हनुमानजी साक्षात वायु पुत्र हैं. फिर ना हवा चलेगी और ना पानी गिरेगा.’

किसानों का मजाक नहीं तो क्या! 

किसानों की रोजी रोटी उनकी खेती पर ही निर्भर करती है. प्राकृतिक आपदा को कोई सरकार नहीं रोक सकती लेकिन कम से कम उनसे पैदा हुई मुश्किलों को कम करने में मदद जरूर कर सकती है. बारिश और ओले की वजह से पहले ही अपनी फसल गंवा चुके किसानों की बीमा से मदद की जा सकती है. साल भर की मेहनत के बाद फसल गंवाने का दर्द बीजेपी के नेता शायद विधानसभा चुनाव हारने के बाद समझ पाएं.

इस साल बजट में  वित्त मंत्री अरुण जेटली का फोकस किसानों पर ही रहा. बजट भाषण शुरू होते ही उन्होंने सबसे पहले किसानों के लिए अपनी योजनाओं का ऐलान किया. उन्होंने कहा था कि किसानों को अब लागत का ढाई गुना एमएसपी मिलेगा.

एक तरफ केंद्र सरकार अपनी योजनाओं के जरिए किसानों का गुस्सा शांत करने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ उसकी पार्टी के ही नेता यह कहकर मजाक उड़ा रहे हैं कि किसानों को बारिश और ओले से बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए.

बीजेपी के कई सितारे 

मध्यप्रदेश के रमेश सक्सेना बीजेपी के अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जो किस्मत और भाग्य पर इस कदर भरोसा करते हैं. कुछ महीने पहले असम के हेल्थ मिनिस्टर हेमंत बिस्व शर्मा ने भी कैंसर की बीमारी को लेकर ऐसा ही बयान दिया था. उन्होंने कहा था, 'पिछले जन्म के गुनाहों की वजह से लोगों को कैंसर जैसी बीमारियां झेलनी पड़ती हैं.' यानी अगर किसी को कैंसर है तो यह उसकी शारीरिक स्थिति नहीं बल्कि पिछले जन्म का पाप है. बिस्व शर्मा ने इसे दैवीय न्याय बताया था.

असम की बीजेपी सरकार ने बिस्व शर्मा को लोगों की सेहत का ख्याल रखने का जिम्मा सौंपा है. किसी राज्य के हेल्थ मिनिस्टर अगर हर बीमारी या दुर्घटना को पिछले जन्म का पाप मानेंगे तो भला इस मंत्रालय की ही क्या जरूरत रह जाएगी.

दिलचस्प है कि ऐसा अजीबोगरीब बयान देने के बाद बिस्व शर्मा उसकी वकालत भी करते हैं. तब उन्होंने कहा था, 'जब हम पाप करते हैं तो भगवान हमें हमारी पापों की सजा देते हैं.'

अपनी बात को पुख्ता करते हुए तब बिस्व शर्मा ने कहा था, 'यह जरूरी नहीं है कि यह पाप हमने ही किया हो. मुमकिन है कि मां-बाप ने कोई गलती की होगी. कोई भी गलती करके दैवीय न्याय से नहीं बच सकता है.' पहले असम और अब एमपी के नेता के ऐसे बयान से लग रहा है कि इन्हें खुद के काम से ज्यादा भगवान पर भरोसा है.

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