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सांसदों-विधायकों की वकालत प्रैक्टिस पर रोक के लिए BCI, SC को अर्जी

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने चिट्ठी लिखकर पर सांसदों-विधायकों के अदालत में प्रैक्टिस पर रोक के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है

Updated On: Dec 19, 2017 08:01 PM IST

FP Staff

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सांसदों-विधायकों की वकालत प्रैक्टिस पर रोक के लिए BCI, SC को अर्जी

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को चिट्ठी लिखकर सांसदों और विधायकों के वकील के तौर पर अदालतों में प्रैक्टिस करने से रोक लगाने की गुहार लगाई है.

उन्होंने अपनी मांग के समर्थन में बीसीआई नियमों और डॉ. हनीराज एल चुलानी बनाम बार काउंसिल महाराष्ट्र और गोवा केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया है.

बार काउंसिल के नियम संख्या 49 के तहत, एक वकील को किसी भी व्यक्ति, सरकार या फर्म के पूर्णकालिक वेतनभोगी कर्मचारी (फुल टाइम सैलरिड एंप्लाई) होने की इजाजत नहीं है, जब तक वो अपना प्रैक्टिस जारी रखता है. लेकिन यदि वो ऐसा करता है तो उसे तब तक एक वकील के रूप में उन्हें अपनी प्रैक्टिस बंद करनी होगी जब तक वो कहीं और या किसी के लिए काम करना जारी रखता है.

जनप्रतिनिधियों के वकालत प्रैक्टिस से कई बार बेवजह के विवाद भी खड़े हो जाते हैं. पिछले दिनों बाबरी मस्जिद मामले में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सुनवाई के दौरान बतौर वकील पेश होकर सुप्रीम कोर्ट से इसे मुद्दे की सुनवाई 2019 के आम चुनाव तक टालने की अपील की थी. बाद में इसको लेकर देश भर में काफी हंगामा और हल्ला मचा था.

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