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बंगाल में हार कर भी खुद को 'बाज़ीगर' क्यों मान रही है बीजेपी?

पश्चिम बंगाल में पिछले 7 साल से ममता बनर्जी की सरकार है. हालांकि अब ऐसा लग रहा है कि बीजेपी धीमी रफ्तार से ही सही, लेकिन राज्य में अपनी जमीन बनाती दिख रही है

FP Staff Updated On: Feb 01, 2018 05:14 PM IST

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बंगाल में हार कर भी खुद को 'बाज़ीगर' क्यों मान रही है बीजेपी?

पश्चिम बंगाल में उलूबेरिया लोकसभा और नवापाड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव के प्रदर्शन को लेकर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस में खुशी की लहर है. हालांकि ये नतीजें टीएमसी के साथ-साथ बीजेपी के लिए खुशखबरी की तरह है, जहां उसने सीपीएम को पीछे धकेल नंबर दो का स्थान हासिल किया.

बंगाल में 34 साल तक वांमपंथी पार्टियों का राज रहा है. साल 2011 में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने लंबे समय बाद सीपीएम को सत्ता से बेदखल किया था और उसके बाद पिछले 7 साल से वहां ममता बनर्जी की सरकार है. हालांकि अब ऐसा लग रहा है कि बीजेपी धीमी रफ्तार से ही सही, लेकिन राज्य में अपनी जमीन बनाती दिख रही है.

पश्चिम बंगाल से आए उपचुनाव के नतीजे इसी ओर इशारा करते हैं. नवापाड़ा सीट पर टीएमसी ने जहां भारी मतों से जीत हासिल की. हालांकि बीजेपी के उम्मीदवार संदीप बनर्जी का प्रदर्शन भी यहां अच्छा ही माना जाएगा. वह 38,711 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे हैं. वहीं उलूबेरिया लोकसभा सीट पर भी बीजेपी दूसरे नंबर पर रही है.

साल 2016 में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों पर गौर करें, तो बीजेपी को तब यहां 23000 वोट मिले थे. लेकिन इस बार नवापाड़ा में बीजेपी के खाते में वोटों का भारी इज़ाफा हुआ है.

बंगाल में दबे पैरों से धीरे-धीरे बढ़ रही है बीजेपी

पश्चिम बंगाल में बीजेपी लगातार आगे बढ़ रही है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के वोट शेयर में 2011 के मुकाबले 11 फीसदी का इज़ाफा हुआ था. ये बंगाल में बीजेपी के लिए बड़ी कामयाबी है. वो भी उस पार्टी के लिए जिसका इस प्रदेश में जनाधार लगभग ना के बराबर रहा है.

साल 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 10 फीसदी वोट शेयर के बावजूद सिर्फ 3 सीट जीत सकी थी. ये पार्टी के लिए निराशा के पल थे, लेकिन एक बार फिर से पश्चिम बंगाल में तस्वीर बदल रही है. वामपथियों का जनाधार लगभग खत्म होता दिख रहा है, जबकि बीजेपी तेजी से मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर उभरती दिख रही है.

पिछले साल अगस्त में नगर निगम के चुनाम में तृणमूल कांग्रेस की चारों ओर लहर थी, लेकिन तब भी ज्यादातर जगहों पर बीजेपी ही दूसरे नंबर पर रही थी. बंगाल में लगातार लेफ्ट और कांग्रेस को नुकसान हो रहा है और इसका फायदा तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी उठा रही है.

बीजेपी पश्चिम बंगाल में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रही है और उसे वहां कुछ बड़े चेहरों की तलाश है. पिछले साल नवंबर में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी रहे पूर्व रेलमंत्री मुकुल रॉय को पार्टी में शामिल किया. मुकुल रॉय को पार्टी में शामिल करने का बीजेपी को फिलहाल कितना फायदा हुआ है ये कहना मुश्किल है. लेकिन आने वाले दिनों में बंगाल के कुछ बड़े नेता बीजेपी के लिए तस्वीर जरूर बदल सकते हैं.

(साभार न्यूज18)

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