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बीजेपी पर कई बार भारी पड़ चुके हैं अश्विनी चौबे के बयान

सोनिया गांधी को पूतना बताते हुए इस नेता ने कहा था कि नीतीश-लालू इस पूतना के गोद में बैठकर जहर पीने के लिए बेचैन हैं

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari Updated On: Oct 13, 2017 11:14 AM IST

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बीजेपी पर कई बार भारी पड़ चुके हैं अश्विनी चौबे के बयान

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे बचपन में दिवाली की रात बीड़ी बम और चटाई बम छोड़कर अपने सहपाठियों को डराया करते थे. उनके एक घनिष्ठ मित्र का कहना है कि ‘लगता है बुढापे में भी दाढ़ी प्रेमी चौबे जी अपनी ‘डराने वाली आदत’ को सहेज कर रखे हैं. तभी तो कभी-कभी अपनी शाकाहारी जुबान से ऐसे-ऐसे ‘मांसाहारी’ बयान दे देते हैं कि पूरी पार्टी हिलने लगती है’.

बीते रविवार को ही योगाभ्यासी मंत्री ने पटना के एक सरकारी समारोह में ऐसा विवादित बयान दिया कि प्रदेश के सारे बीजेपी नेता व्याकुल होने लगे. चौबे जी के बयान का हैंगओवर अभी भी इन नेताओं के मगज में हिलकोरे मार रहा है.

मजे की बात ये है कि भगवान भोलेनाथ के पुजारी चौबे ने अभी तक अपने बयान का खंडन भी नहीं किया है जिससे इन नेताओं की परेशानी और बढ़ती जा रही है. विपक्ष बयान को मुद्दा बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंत्री की बर्खास्तगी की मांग कर रहा है.

अश्विनी कुमार चौबे ने टीकाकरण के लिए मिशन इन्द्रधनुष कार्यक्रम में कहा कि ‘बिहार के लोग छोटी बिमारी होने पर भी इलाज करवाने के लिए दिल्ली एम्स पहुंच जाते हैं, जिससे काफी भीड़ बढ़ जाती है. हमने एम्स के अधिकारियों से कहा है कि ऐसे लोगों को बिना इलाज किए फौरन वापस बिहार भेज दें’.

कहते हैं कि समारोह में शिरकत कर रहे बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने अपना माथा पकड़ लिया. लेकिन बेचारे कुछ कर भी नहीं सकते थे.

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संभावित डैमेज को कमजोर करने के लिए बीजपी के कुछ नेताओं ने पत्रकारों को लपेटे में लिया. आरोप लगाना शुरू किया कि मीडिया ने केंद्रीय राज्य मंत्री के बयान को तोड़-मरोड़ कर छापा है.

बीजेपी के एक विधायक का तर्क है कि ‘मंत्री ने बिहार के लोगों को सलाह दिया था कि सर्दी, खांसी और बुखार जैसी बिमारी होने पर दिल्ली न आएं क्योंकि इन रोगों का इलाज राज्य के हॉस्पीटल में भी संभव है’.

कभी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कहा था पूतना, राहुल को तोता 

जेडीयू के प्रवक्ता भी ऐसा ही तर्क परोसकर अपने सहयोगी दल के बड़बोले नेता का बचाव कर रहे हैं. वैसे जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार का सुझाव है कि ‘मंत्री को ऐसे विवादित बयान देने से बचना चाहिए था’. लेखक ने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल पर काफी प्रयास किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

बहरहाल, पूर्व में भी कई बार अश्विनी कुमार चौबे ने ‘अनाप-सनाप’ बयान देकर पटना से लेकर दिल्ली तक वास कर रहे बीजेपी नेताओं को परेशानी में डाला है. नवादा की एक सभा में इन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पूतना बताते हुए कहा था कि नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव इस पूतना के गोद में बैठकर जहर पीने के लिए बेचैन हैं. आगे कहा था ‘इटली की गुड़िया है, जहर की पुड़िया है’.

साथ ही मंत्री महोदय ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को विदेशी तोता की उपाधि दी थी. बिहार सरकार में बतौर स्वास्थ्य मंत्री चौबे ने कर्कश चेतावनी दते हुए कहा था कि जो डॉक्टर ठीक से अपना ड्यूटी नहीं करेगा उसका हाथ काट लिया जाएगा.

बेटे को टिकट दिलाने के लिए लगे थे रोने 

कभी वंशवाद का विरोध करने वाले चौबे अपने बड़े बेटे अर्जित शाश्वत चौबे को भागलपुर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी का कैंडीडेट बनाने के लिए बगावत पर उतारू हो गए थे. फूट-फूटकर रोने भी लगे थे.

आखिरकार नेतृत्व को झुकना पड़ा था. लेकिन जनता ने इनके बेटे को रिजेक्ट कर दिया. बीजेपी के एक सीनीयर नेता और बिहार सरकार में मंत्री बताते हैं कि ‘चौबे की हठधर्मिता के कारण हमलोग अंग प्रदेश में कई सीट लूज कर दिए. आधा दर्जन कर्मठ कार्यकर्ताओं ने रिवोल्ट करके पार्टी छोड़ दी’.

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बिहार में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए चौबे 2013 में सपरिवार केदारनाथ यात्रा पर गए थे. साथ में साली, पत्रकार साढ़ू, भागलपुर का एक पंडित तथा दो सुरक्षाकर्मी भी थे. भयंकर प्राकृतिक आपदा में इनका परिवार छोड़कर बाकी काल कलवित हो गए.

महत्वपूर्ण बात ये थी कि बिना सरकारी आदेश के अपने साथ सुरक्षाकर्मी ले गए थे जिनके परिवार को परोणोपरांत मिलने वाली सहायता को प्राप्त करने में काफी पापड़ बेलने पड़े थे.

एक अधिकारी बताते हैं कि ‘ये सीएम नीतीश कुमार की भलमानसी कहिए कि मृतक पुलिसवालों के पत्नियों को मुआवजा मिल गया. दूसरा सीएम होता तो नहीं सुनता. क्योंकि मंत्री लौटे तो भूतपूर्व हो गए थे. नीतीश कुमार बीजेपी से तलाक ले चुके थे’. हादसे पर इन्होंने ‘केदारनाथ की त्रासदी’ नाम की किताब भी लिखी है.

शहनवाज हुसैन को हराने का भी लगता रहा है आरोप 

भागलपुर के शाहकुंड ब्लॉक के दरियापुर गांव में एक सामान्य कर्मचारी के घर पैदा हुए चौबे पटना विश्वविद्याालय से जूलॉजी में स्नातकोत्तर करने बाद सक्रिय राजनीति में कूदे. वैसे छात्र जीवन से ही इनका आरएसएस से जुड़ाव रहा है. जेपी आंदोलन मे भागीदार रहकर जेल यात्रा भी की है.

1995 से 2010 तक विधायक रहे और 2014 में नेतृत्व पर ‘दबाव’ बनाकर गृह जिला से 400 किलो मीटर दूर ब्राहण बहुल बक्सर लोकसभा का उम्मीदवार बनकर मोदीमय चुनाव में जीत दर्ज की.

बीजेपी में ऐसे भी लोग हैं जो इन पर शहनवाज हुसैन को भागलपुर लोकसभा चुनाव हराने का आरोप लगाते हैं. जिसका मंत्री खंडन करते हैं. अपने चाहने वालों के बीच ईमानदार नेता की छवि रखने वाले अश्विनी कुमार चौबे ने चुनाव आयोग को जो जानकारी दी है उसके अनुसार 2005 में इनकी सम्पत्ति 12 लाख, जो 2010 में चढ़कर 75 लाख और 2014 लोकसभा चुनाव में दिए हलफनामें के अनुसार 2 करोड़ 20 लाख हो गई है.

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