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सुषमा स्वराज ने आखिर सोनिया गांधी को क्यों दी थी धमकी?

सुषमा स्वराज एक मुखर नेता हैं जिन्होंने कई मौकों पर पार्टी के पक्ष को मजबूती से लोगों के सामने रखा है

Updated On: Nov 20, 2018 05:20 PM IST

FP Staff

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सुषमा स्वराज ने आखिर सोनिया गांधी को क्यों दी थी धमकी?

भारतीय राजनीति में अगर ताकतवर महिलाओं की सूची बनाई जाए तो वह सूची बिना सुषमा स्वराज के नाम की अधूरी होगी. स्वराज के साथ ही भारतीय राजनीति में उदय कर रही थीं एक और शक्तिशाली महिला नेता सोनिया गांधी. हालांकि एक ही समय में राजनीतिक करियर शुरू करने वाली इन दोनों महिला नेताओं के बीच संबंध हमेशा तल्ख रहे हैं.

दो अलग-अलग विचारधाराओं से आने वाली इन दो शक्तिशाली राजनीतिक महिला शख्सियतों के बीच तल्खियों की शुरुआत तो साल 1999 में ही हो गई थी. यह वह साल था जब सोनिया गांधी ने पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा. कांग्रेस की तरफ से सोनिया गांधी एक साथ दो लोकसभा क्षेत्र, उत्तर प्रदेश में गांधी परिवार की पुस्तैनी सीट अमेठी और कर्नाटक में कांग्रेस की सुरक्षित मानी जाने वाली बेल्लारी सीट से चुनावी मैदान में उतरी थीं. जबकि बीजेपी ने 'आदर्श भारतीय नारी' के तौर पर सुषमा स्वराज को चुनावी रण में उतारा.

विदेशी बहू के जवाब में भारतीय बेटी

उन दिनों बीजेपी स्वराज को आदर्श भारतीय नारी की तरह प्रदर्शित कर रही थी. सुषमा के उन दिनों जो फोटो सामने आते थे उनमें वह माथे पर एक बड़ी बिंदी, मांग में सिंदूर लगाए भारतीय त्योहारों को मनाते देखी जाती थीं. इस अवतार में वह बीजेपी के लिए एक ऐसी राष्ट्रवादी छवि बन गई थीं जो इटली में जन्मी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की विधवा पत्नी सोनिया गांधी की छवि का मुकाबला कर सकती थीं.

और इसी तरह 'भारतीय बेटी' और 'विदेशी बहू' के बीच संघर्ष और तल्खियों के बीज बोए गए थे. खैर स्वराज बेल्लारी में चुनाव हार गईं. लेकिन यह तो इन दो ताकतवर राजनीतिक महिलाओं के बीच संघर्ष की शुरुआत मात्र थी. साल 2004 में इनके बीच की खटास को फिर से देखा गया. जब यूपीए ने आम चुनाव जीता और कांग्रेस के वफादारों ने सोनिया गांधी से प्रधानमंत्री पद संभालने का आग्रह किया.

सुषमा स्वराज ने दे दी थी सिर मुड़वाने की धमकी

इन सुर्खियों के बीच स्वराज के भीतर का आक्रोश बाहर आ गया और उन्होंने ऐसा होने पर अपना सिर मुड़वाने और सफेद वस्त्र पहन लेने की धमकी तक दे दी. यह शोक जाहिर करने का हिंदू पारंपरिक संकेत होता अगर सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बन जातीं. उस समय, स्वराज ने कहा था कि उनकी यह प्रतिक्रिया शहीदों से भावनात्मक लगाव के कारण थी.

उन्होंने कहा था, 'ब्रिटिश शासन की समाप्ति और कई भारतीयों द्वारा किए गए बलिदान के बाद भी आज एक विदेशी को (प्रधानमंत्री) चुना जा रहा है.' स्वराज तब से इस बात के समर्थन में हैं. उन्होंने कई मौकों पर सोनिया गांधी की प्रशंसा व्यक्त की है लेकिन प्रधानमंत्री पद के लिए उनके चयन को हमेशा अस्वीकार्य ही किया है.

सोनिया के एक कदम से फीकी पड़ गई बीजेपी की नीति

हालांकि जब सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया तो यह खेल उलटा पड़ गया. भारतीय बहू के साथ परम बलिदान करने वाली छवि सोनिया ने अपने इस फैसले से गढ़ दी थी. इसके बाद बीजेपी उन पर विदेशी होने के आरोप नहीं लगा सकी. सोनिया गांधी के इस कदम के बाद  सोनिया के सभी आलोचकों के मुंह बंद हो गए और बहसों से विदेशी मूल का मुद्दा खत्म हो गया.

पिछले कुछ वर्षों में, दोनों नेताओं के बीच संबंध अच्छे रहे हैं. एक समय था जब इन दो ताकतवर महिला राजनेताओं का एक साथ उदय हुआ, दोनों के बीच संघर्षों के भी कई किस्से हैं. लेकिन समय के चक्र पर चलते-चलते अब वह दौर आ गया है जब वह अपने राजनीतिक करियर से विराम लेने की ओर हैं. सुषमा स्वराज ने मंगलवार को घोषणा कर दी कि अब वह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी. जबकि सोनिया तो पहले ही स्वास्थ्य कारणों के चलते कांग्रेस का सर्वोच्च पद छोड़ चुकी हैं.

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