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गुजरात चुनाव 2017: बीजेपी को ‘सुरक्षित सीट’ पर मिलेगी कड़ी चुनौती

राजकोट की सीट बीजेपी के लिए ‘सुरक्षित’ मानी जाती है, रूपानी को इस सीट पर कांग्रेस के इंद्रनील राज्यगुरू से चुनौती मिल रही है

Bhasha Updated On: Dec 07, 2017 07:47 PM IST

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गुजरात चुनाव 2017: बीजेपी को ‘सुरक्षित सीट’ पर मिलेगी कड़ी चुनौती

बीजेपी का गढ़ माने जाने वाली राजकोट-पश्चिम सीट पर पार्टी के हाई-प्रोफाइल प्रत्याशी और गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी को कड़े और रोमांचक मुकाबले का सामना करना पड़ सकता है. इस सीट पर कांग्रेस के इंद्रनील राज्यगुरु से चुनौती मिल रही है.

इस सीट को बीजेपी के लिए ‘सुरक्षित’ माना जाता है. बीजेपी साल 1985 से इस सीट पर जीत हासिल करती रही है.

वजुभाई वाला दिलाते रहे हैं बीजेपी को जीत

गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान का पहला चरण नौ दिसंबर को होगा. राजकोट-पश्चिम सीट पर भी मतदान नौ दिसंबर को ही होगा. कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला वर्ष 1985 से 2012 तक बीजेपी के लिए सात बार इस सीट को जीत चुके हैं. वर्ष 1985 में उन्होंने हर्षदबा चूड़ासमा को हराया था.

नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री के तौर पर नामांकित किए जाने के बाद वजुभाई वाला ने वर्ष 2002 में मोदी के लिए यह सीट छोड़ दी थी. बाद में मोदी के मणिनगर विधानसभा क्षेत्र का रुख करने के बाद वाला ने वर्ष 2012 तक अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा.

राज्यगुरु को खड़ा कर कांग्रेस दे रही है कड़ी चुनौती

बाद में वाला को कर्नाटक भेजे जाने के बाद वर्ष 2014 में विजय रूपानी ने उपचुनाव में इस सीट पर जीत हासिल की. हालांकि राजकोट-पश्चिम आरएसएस का मजबूत गढ़ है. लेकिन कांग्रेस ने राज्यगुरु को इस सीट पर खड़ा कर एक कड़ी चुनौती पेश कर दी है. जातिगत संयोजन को पार्टी के पक्ष में करने के लिए कांग्रेस ने राजकोट-पूर्व के मौजूदा विधायक राज्यगुरु को इस सीट के लिए मैदान में उतारा है.

बीजेपी को जीतना होगा नाराज पाटीदार आर व्यपारी वर्ग का विश्वास

इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए रूपानी को नाराज पाटीदारों और व्यापारी समुदाय का विश्वास जीतना होगा जिन्हें नोटबंदी और जीएसटी लागू किए जाने के प्रभाव का सामना करना पड़ रहा है.

बीजेपी के शासन में शिक्षा और सरकारी नौकरी में आरक्षण के अभाव को लेकर पाटीदारों के गुस्से को कांग्रेस रूपानी के खिलाफ भुनाना चाह रही है. पार्टीदारों के बीच बीजेपी का आधार, कोटा आंदोलन और हार्दिक पटेल के कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने की वजह से प्रभावित हो सकता है.

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