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बिहार: पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप- ‘हमारा यूथ कांग्रेस अध्यक्ष बोधगया बम ब्लास्ट का संदिग्ध है’

शुक्रवार को यूथ कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए गुंजन पटेल को चुना गया तो पार्टी नेताओं ने ही आरोप लगाया कि पटेल 7 जुलाई 2013 को बोधगया में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के संदिग्ध रहे हैं

Updated On: Aug 12, 2018 11:01 AM IST

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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बिहार: पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप- ‘हमारा यूथ कांग्रेस अध्यक्ष बोधगया बम ब्लास्ट का संदिग्ध है’

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लोकसभा में दिए भाषण से देश को भले ही भूकंप के झटके महसूस नहीं हुए, लेकिन बिहार की कांग्रेस पार्टी को उस दिन से भूकंप के झटके लग रहे हैं. कांग्रेस के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार जब लोकसभा में भाषण दे रहे थे तो ठीक उसी समय भागलपुर में कांग्रेस के कई बड़े नेता आपस में झगड़ रहे थे.

बहरहाल, उस भूकंप के झटके अभी भी पार्टी को महसूस हो रहे हैं. शुक्रवार को यूथ कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए गुंजन पटेल को चुना गया तो पार्टी नेताओं ने ही आरोप लगाया कि पटेल 7 जुलाई, 2013 को बोधगया में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के संदिग्ध रहे हैं. गुंजन पटेल ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में कहा था कि केंद्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उनसे इस मामले में पूछताछ भी की थी, लेकिन एफआईआर में उनका नाम नहीं है. इस बम ब्लास्ट में 5 लोग घायल हुए थे जिनमें 2 बौद्ध भिक्षुक थे.

मामले की जांच के लिए सारे तथ्य दिल्ली भेज दिए हैं

शिकायत का संज्ञान लेते हुए मतदान कराने वाली जे.के राव और जी.एम लिंडा एजेंसी ने परिणामों पर रोक लगा दी है. गौरतलब है कि यूथ कांग्रेस में संगठन चुनावों के लिए पार्टी ने एक एजेंसी को हायर किया था. चुनाव के रिटर्निंग अफसर तेलंगाना निवासी नशीर अहमद ने फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में बताया कि यह बात सही है कि पटेल की बम ब्लास्ट में बतौर संदिग्ध नामित होने की लिखित शिकायत मिली है. हालांकि इसकी सफाई में पटेल ने एनआईए की दर्ज की गई एफआईआर की कॉपी भेजी है जिसमें उनका नाम नहीं है. फिर भी हमने मामले की जांच के लिए सारे तथ्य दिल्ली भेज दिए हैं. सोमवार तक इस पर फैसला हो जाएगा.

बिहार प्रदेश यूथ कांग्रेस के प्रभारी सर्वेश तिवारी का कहना है कि ‘कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है. पार्टी में कुछ लोग इस फैसले से खुश नहीं हैं जो इस बात का बतंगड़ बना रहे हैं. राजनीति में एक दूसरे की टांग खींचने का काम लगातार होता रहता है. इस प्रकार का खेल केवल जिला या प्रांत तक सीमित नहीं है बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में भी चलता है.’

राज्य यूथ कांग्रेस पद के 3 प्रत्याशियों के खिलाफ गंभीर शिकायत 28 जुलाई को ही एजेंसी के पास भेज दी गई थी. उसी शिकायत के आधार पर एक प्रत्याशी राकेश यादव को अयोग्य घोषित कर दिया गया था. जिसके बाद चुनाव की तारीख 6 अगस्त से बढ़ाकर 9 अगस्त कर दी गई थी. मतदान के दिन विरोधी पक्ष के भीषण आक्रोश को ध्यान में रखकर रिजल्ट की घोषणा रोक दी गई और इस संगीन मामले को दिल्ली भेज दिया गया है.

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विरोधियों का आरोप है कि कांग्रेस नेता ब्रजेश पांडेय किसी भी शर्त पर गुजंन पटेल को यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं. पांडेय बेतिया लोकसभा से चुनाव लड़ना चाहते हैं. बतौर यूथ कांग्रेस अध्यक्ष गुंजन पटेल को अधिकार होगा कि वह किसी एक व्यक्ति का नाम अपने स्तर से लोकसभा के लिए आगे कर सकते हैं. इसके बाद ब्रजेश पांडेय को अपने रसूख के बल पर दिल्ली से अनुमति लेने में आसानी हागी. बता दें कि यह वही ब्रजेश पांडेय हैं जिनका नाम पिछले दिनों एक तथाकथित सेक्स स्कैंडल में उभरा था.

congress office

दिल्ली स्थित कांग्रेस पार्टी का दफ्तर

जो यूथ कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष होगा उसको विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा

एजेंसी को भेजी गई आरोप पत्र में गुजंन पटेल से हारने वाले निकटतम उम्मीदवार सिराजुद्दौला उर्फ दौलत इमाम का नाम भी है. पत्र में लिखा है कि दौलत इमाम के खिलाफ भी कई अपराधिक मुकदमे पटना के सुल्तानगंज थाने में दर्ज हैं. नियम के अनुसार यूथ कांग्रेस के सांगठनिक पद के लिए वही प्रत्याशी हो सकता है जिसके खिलाफ कोई अपराधिक मुकदमा दर्ज न हो और जिसकी उम्र 18 से 35 वर्ष के बीच हो. प्रदेश यूथ कांग्रेस के प्रत्याशी के लिए मानक है कि पूर्व में वो ब्लॉक से लेकर प्रांतीय स्तर पर संगठन के किसी पद पर रहा हो. गुंजन पटेल किसी पद पर नहीं रहे हैं. पहले वो जनता दल में थे. बम ब्लास्ट में नाम आने के बाद नीतीश कुमार ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया तो कांग्रेस ने हाथों हाथ लपक लिया. पांडेय की कृपा से पटेल कम समय में ही प्रदेश यूथ कांग्रेस के प्रवक्ता और फिर एआईसीसी सदस्य बना दिए गए.

बीते 7, 8 और 9 जुलाई को बिहार में यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष, महासचिव, प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ था. यह चुनाव टेबलेट के माध्यम से कुल 38 जिलों में एजेंसी की देखरेख में बिलकुल नए तरीके से कराए गए थे. कम से कम एक दर्जन जिलों में विरोधियों के बीच जमकर मारपीट भी हुई थी. हिंसक झड़प में समस्तीपुर जिला में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के भाई का सिर फट गया तो बक्सर में कांग्रेस विधायक मुन्ना तिवारी के खिलाफ प्रत्याशी अजय ओझा ने थाने में केस किया कि ‘विधायक कहते हैं कि चुनाव से हट जाओ नहीं तो जान से मार देगें.’ उसी तरह चुनाव के दिन बेगूसराय में कांग्रेस बिधायक रामदेव राय और अमृता भूषण के समर्थकों बीच हिंसक झड़प होते-होते बच गई.

जानकार बताते हैं कि यूथ कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए लाखों रुपए खर्च करते हैं. प्रत्येक प्रत्याशी अपना पैसा खर्च कर यूथ कांग्रेस का साधारण सदस्य बनाते हैं. ऑनलाइन सदस्य बनने में 75 रुपए, ऑफलाइन 125 रुपए और तिथि विस्तार की अवधि में 140 रुपए जमा कराने होते हैं. एक हारे हुए प्रत्याशी ने बताया, ‘हमलोग अपनी जेब से पैसा लगाकर सदस्य बनाते हैं. इसबार मेरे 7 लाख रुपए लग गए हैं.’

दसअसल, ऐसी परंपरा रही है कि जो यूथ कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष होगा उसको विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा. संभवतः इसीलिए इस पद को पाने लिए इतनी बेचैनी है.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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