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एक बार फिर चर्चा में है बिहार में चूहों का अनोखा कमाल

मंत्री जी अधिकारिक तौर पर मान रहे हैं कि चूहों ने अरबों रुपए खर्च करके बनाई गई तटबंधों में बिल कर दिया जिससे भयानक बाढ़ आ गई

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari Updated On: Sep 02, 2017 07:15 PM IST

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एक बार फिर चर्चा में है बिहार में चूहों का अनोखा कमाल

बिहार के चूहे फिर एक बार चर्चा में आ गए हैं. बहस का मुद्दा बन गए हैं. साथ ही, सरकार में जल संसाधन मंत्री और नीतीश कुमार के परम मित्र राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का पिछले दिनों चूहों की ‘खलनायकी’ पर दिया गया ‘गंभीर’ बयान अब गांवों में चलने वाली बतकही का हिस्सा है.

मंत्री जी अधिकारिक तौर पर मान रहे हैं कि चूहों ने अरबों रुपए खर्च कर के बनाई गई तटबंधों में बिल कर दिया जिससे भयानक बाढ़ आ गई. सैकड़ों लोग मर गए. अरबों की संपत्ति सैलाब में बह गई. बकौल ललन सिंह, ‘बाढ़ प्रभावित पीड़ित लोग तटबंधों पर अनाज रखते हैं. चूहे अनाज खाने आते हैं और अपने रहने के लिए बिल बनाकर तटबंधों को तहस-नहस कर देते हैं.’

समझदार और असरदार मंत्री की लाजवाब बयान पर सीएम नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया का मीडिया और जनता को इंतजार है.

पिछले दिनों जब चूहों द्वारा करोड़ों रुपए की लाखों लीटर शराब पी जाने की खबर देश भर में फैली तो नीतीश कुमार के कहने पर ओहदेदार सरकारी मुलाजिमों ने इसका खंडन किया था. जांच भी बैठाई गई थी. बाद में खुलासा हुआ कि चूहों ने नहीं बल्कि सरकारी गोदामों में जप्त करके रखी गई दारु के बोतलों और पाउचों की रखवाली करने वालों ने ही खेल किया है.

सत्ता के गलियारे में ललन सिंह

बहरहाल, सत्ता के गलियारे में ललन सिंह की गिनती एक लालबुझक्कड़ की शक्ल में होती है. 2009 में कुछ दिनों के लिए बागी हो गए थे. नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन को खलास करने की कसम खाई थी.

2010 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में स्पेशल उड़नखटोला से प्रचार कर रहे थे. तक उन्होनें एक राज की बात बताई थी. तत्कालीन सांसद ने कहा था कि ‘मुझे पक्की खबर है कि नीतीश कुमार के पेट के किस भाग में दांत है.’

पान प्रेमी ललन सिंह ने एलान किया था कि ‘उस जहरीले दांत को एक दिन मैं ही उखाड़ूगां’. पता नहीं मंत्री जी नीतीश कुमार के पेट की दांत को बाहर निकालने में सफल हुए या नही. पर यह तो साफ-साफ दिखा कि उन्होंने नीतीश कुमार के सामने साष्टांग दंडवत करके कुछ दिनों के बाद जेडीयू में वापसी कर ली.

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नीतीश कुमार भी भगवान श्रीराम की तरह खुश होकर अपने अल्पकाल के लिए बिछड़े ‘हनुमान’ को गले से लगाया और गवर्नर कोटा से तत्काल विधानपरिषद् का सदस्य बनाकर सरकार में मलाईदार विभाग का मंत्री बना दिया.

चारा घोटाले में लालू प्रसाद के खिलाफ पटना हाई कोर्ट में पीआईएल करने वालों में ललन सिंह सबसे आगे थे. वो कहा करते थे कि ‘हमको सब पता है कि लालू यादव सरकारी खजाना लूटकर माल कहां छिपाकर रखे हैं.’

आखिर क्यों खासमखास हैं ललन सिंह

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2008 में ललन सिंह ने लालू यादव और उनके परिवार के पास कितनी बेनामी संपत्ति है उसकी विस्तृत लिस्ट तैयार की थी. इसी लिस्ट की झांकी सुशील कुमार मोदी टुकड़ों में मीडिया के सामने पिछले 5 महीने से पेश करते रहे हैं.

पूर्व सीएम राबड़ी ने अप्रैल में आरोप भी लगाया था कि ‘ललन सिंह और पीके शाही मोदी को हमारे परिवार के खिलाफ मैटेरियल सप्लाई कर रहे हैं.’ तब ललन सिंह महागठबंधन का हिस्सा हुआ करते थे.

जेडीयू के समर्पित कार्यकर्ता और नेता यह जानने का भागीरथ प्रयास करते हैं कि ‘आखिर ललन सिंह में ऐसी कौन सी कला है जिसके बदौलत वो हमारे नेता नीतीश कुमार को गाली देने के बाद भी मलाईदार पद और प्रतिष्ठा पा लेने में सफल हो जाते हैं?’ पार्टी के एक प्रवक्ता तो ललन सिंह की खातिरदारी से ईर्ष्या में दिन-दुगुना-रात चौगुना दुबला होते जा रहे हैं.

प्रवक्ता को समझाया गया कि ललन सिंह ‘संकटमोचक’ हैं. 2005 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी के पास एक छदाम नहीं था. तब के अध्यक्ष जार्ज फर्नांडीस ने माल डाउन करने से साफ इंकार कर दिया. तब ललन सिंह ने एक चर्चित नेता को राज्यसभा भेजवाकर संकट को अपने वश में किया था. वो चर्चित नेता बीजेपी छोड़कर सब घाट का पानी पी चुके हैं. दवाई की फैक्टरी भी है. वो खुलेआम कहते हैं कि ‘एक बोरा सत्तू को कैप्सूल में भरकर विटामिन के नाम पर बेचकर एक राज्यसभा का चुनाव लड़ लेता हूं.'

2015 विधानसभा चुनाव में भी संभावित संकट को ललन सिंह ने ही हल किया था. थोड़ा बहुत सहयोग फॉर्चूनर मंत्री ने किया था. वैसे विरोधी कहते हैं कि ललन सिंह के बारे में ठोस जानकारी की अगर किसी को जरूरत है तो उसे मारीशस और मकाउ सरकार से संपर्क करना चाहिए. जब पहली बार सांसद बने थे तो बहुत महंगी कार पर चलते थे. जो टाक ऑफ द टाउन हुआ करता था. नीतीश कुमार के समझाने के बाद गाड़ी बेच दिए.

Nitish Kumar

जब चूहों ने काटी नीतीश की ऊंगली

एक बार फिर से चूहे पर लौटते हैं. 2007 में नीतीश कुमार जब सीतामढ़ी सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम कर रहे थे तो उनकी कानी ऊंगली को चूहे ने काट लिया था. एक महीने के भीतर राज्य के सारे सर्किट हाउस को चूहा विहीन कर दिया गया. करोड़ो खर्च करके सरकारी गेस्ट हाउसेज का काया कल्प किया गया.

इसके बाद विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए ‘रैट-मीट’ परोसने का आइडिया अफसरों द्वारा इजाद किया गया. पर फेल हो गया. याद रहे कि 70 के दशक में बिहारी मछलियां बिजली का ट्रांसफॉर्मर भी चट कर चुकी हैं.

अब जल संसाधन मंत्री कहते हैं कि भीषण बाढ़ चूहों की देन है. जबकि विरोधी दल के नेता प्रत्यक्ष रूप से सरकार को दोषी मानते हैं. सिंचाई विभाग के अभियंता भी बयान देकर सरकारी नीतियों को बाढ़ के लिए जिम्मेवार बता रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ लालू प्रसाद यादव मंत्री ललन सिंह के बयान के पक्ष में हैं. लालू प्रसाद कहते हैं, ‘ललन सिंह स्वयं चूहा है इसीलिए वो जो कह रहा है वो सौ फीसदी सही है.'

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