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तो क्या बन गई बात? बीजेपी-जेडीयू में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय!

फिलहाल 2019 के लोकसभा चुनाव से काफी पहले ही बिहार में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला लगभग तय होता दिख रहा है.

Updated On: Aug 31, 2018 09:39 AM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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तो क्या बन गई बात? बीजेपी-जेडीयू में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय!

बिहार में सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए के भीतर लगता है सबकुछ सुलझ गया है. दावा पहले से ही किया जा रहा था, इसके संकेत जेडीयू नेताओं की तरफ से दिए भी जा रहे थे कि सितंबर मध्य तक सीट शेयरिंग को लेकर ऐलान भी कर दिया जाएगा. अब सूत्र बता रहे हैं कि बिहार में एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर फॉर्मूला निकल गया है.

सूत्रों के मुताबिक, बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से बीजेपी 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. जबकि, बाकी 20 सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जाएंगी. जेडीयू के खाते में करीब 12 से 14 सीटें आ सकती हैं. इनमें 12 सीटें बिहार में जबकि दो सीटें झारखंड और यूपी में भी जेडीयू को मिल सकती हैं. इसके अलावा रामविलास पासवान की पार्टी एलजेपी के खाते में 5 जबकि उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी को 2 सीटें दी जा सकती हैं. आरएलएसपी से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले जहानाबाद सांसद अरुण कुमार के लिए एक सीट छोड़ी जाएगी.

पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त बीजेपी ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 22 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि सहयोगी एलजेपी ने 7 सीटों पर चुनाव लड़कर 6 पर जीत दर्ज किया था. आरएलएसपी ने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था और सभी सीटों पर उसे जीत मिली थी. दूसरी तरफ, अलग होकर चुनाव लड़ने वाले नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को महज 2 लोकसभा सीटों पर ही जीत मिली थी.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar receives greetings from speaker Vijay Chaudhary during special session of Bihar Vidhan Sabha in Patna on Friday. PTI Photo(PTI7_28_2017_000081B)

अब जेडीयू के एनडीए में शामिल होने के बाद से ही सीटों को लेकर मारामारी हो रही थी. लगातार हो रही बयानबाजी के चलते सीट शेयरिंग का मामला काफी उलझ गया था. लेकिन, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के पटना दौरे के वक्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ मुलाकात के बाद जेडीयू के साथ बीजेपी के रिश्तों में आई कड़वाहट काफी हद तक कम हो गई थी. उसी वक्त लगभग साफ हो गया था कि अगस्त-सितंबर तक दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग का विवाद सुलझा लिया जाएगा.

जेडीयू के एनडीए में शामिल होने के बाद बीजेपी समेत दूसरे सहयोगियों को भी समझौता करना पड़ रहा है. इस बात की संभावना पहले से ही थी. क्योंकि बीजेपी ने पिछली बार 22 सीटों पर जीत दर्ज करने के बावजूद इस बार 20 सीटों पर लड़ने का फैसला किया है. मतलब बीजेपी को भी 2 सीटों का नुकसान.

एलजेपी ने पिछली बार 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी. लेकिन, उसे भी एक सीट का नुकसान होता दिख रहा है. इसके अलावा आरएलएसपी ने पिछली बार तीन सीटों पर जीत दर्ज की थी. इस बार भी उसे दो सीटें मिलेगी, क्योंकि जहानाबाद के सांसद अरुण कुमार अब अलग हो चुके हैं. अरुण कुमार को भी महज एक सीट दिए जाने की ही संभावना दिख रही है.

सूत्रों के मुताबिक, इस बार सीट शेयरिंग के फॉर्मूले में कई सीटों की अदला-बदली भी हो सकती है तो कई सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारा जा सकता है. बीजेपी दरभंगा, वाल्मीकिनगर और शिवहर की अपनी सीटें जेडीयू के लिए छोड़ सकती है. दरभंगा से बीजेपी के टिकट पर कीर्ति आजाद की जीत हुई थी. लेकिन, अभी कीर्ति आजाद बीजेपी से निलंबित हैं. लिहाजा जेडीयू की तरफ से महासचिव और पूर्व विधान पार्षद संजय झा दरभंगा से नए उम्मीदवार हो सकते हैं.

बीजेपी पटना साहिब, मधुबनी और बेगूसराय में अपना उम्मीदवार बदल देगी. पटना साहिब से शत्रुघ्न सिंहा का तेवर पहले से ही पार्टी लाइन से अलग है. ऐसे में उनका टिकट कटना लगभग तय है. दूसरी तरफ, मधुबनी से बीजेपी सांसद हुकुमदेव नारायण यादव बढ़ती उम्र के चलते चुनाव मैदान से अलग हो सकते हैं. जबकि खराब स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के ही कारण बेगूसराय से सांसद भोला सिंह भी इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे.

Ram Vilas Paswan

एलजेपी खाते की दो सीटें भी बदली जा सकती हैं. एलजेपी सांसद रामा सिंह को वैशाली से इस बार पत्ता साफ होना तय है. रामा सिंह पाला बदलकर आरजेडी खेमे में भी जा सकते हैं. उनको शिवहर से आरजेडी मैदान में उतार सकती है. यानी वैशाली से भी अब एनडीए की तरफ से कोई नया चेहरा मैदान में होगा.

जबकि एलजेपी सांसद वीणा देवी की सीट बदली जा सकती है. वीणा देवी बाहुबली और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह की पत्नी हैं और पिछली बार मुंगेर सीट से सांसद बनने में सफल रही थी. लेकिन, इस बार यह सीट जेडीयू के लिए छोड़ी जा सकती है. जेडीयू की तरफ से नीतीश कुमार के करीबी और बिहार सरकार में मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह मुंगेर से उम्मीदवार हो सकते हैं.

हालाकि आरएलएसपी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के लगातार आ रहे बयान और उनके तेवर को देखकर ऐसा लग रहा है कि दो सीटों पर शायद वो न मानें. ऐसे में उनके एनडीए छोड़कर आरजेडी के साथ जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. सूत्रों के मुताबिक, अगर कुशवाहा एनडीए छोड़ते हैं तो उनकी दो सीटें सहयोगी दलों के खाते में जा सकती हैं.

फिलहाल 2019 के लोकसभा चुनाव से काफी पहले ही बिहार में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला लगभग तय होता दिख रहा है. विपक्ष अभी गठबंधन बनाने की बात कर रहा है. लेकिन, एनडीए की रणनीति उससे एक कदम आगे दिख रही है, जो कि चुनाव से काफी पहले अपने सहयोगियों के साथ विवादों को खत्म करना चाहती है.

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